Thursday, 28 July 2016

वर्षा बिटिया

 धवल श्वेत वस्त्रों से सजकर
पापा बादल चले टहलने
मै भी पापा संग चलूंगी
वर्षा बिटिया लगी मचलने।
पहले अपनी हालत देखो
लिपटी हो कीचड से
हाथ पैर मॅुह धोकर
वस्त्र बदल लो झटपट से
चढ़ी दौडकर गोदी मंे
चलने की जिद लगी मचाने
काले कपडे सने देखकर
पापा बादल लगे गरजने
डर से सहमी वर्षा बिटिया
काली आंखे भर आई
छमछम रोती भागी
इसीलिये तो वर्षा आई ।

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