Wednesday, 1 April 2026

tajkunvar

ताज कंुवरि  


दिल्ली की गद्दी पर कुतुबुद्दीन एबक का शासन था। शहर कानपुर के पास  किसोरा नामक एक छोटा सा हिन्दू राज्य था। उसके राजा थे सज्जन सिंह, क्षत्रिय राजपूत ,जैसा नाम था वैसा ही चरित्र था। राजा सज्जन सिंह धर्म प्रिय और प्रजा की देखभाल करने वाले सज्जन राजा थे। जनता उन्हें बहुत प्यार करती थी। उनके दो बालक थे पुत्री ताजकुंवरि और पुत्र लक्ष्मण सिंह। ताज कुंवरि और लक्ष्मण सिंह को राजा सज्जन सिंह ने साथ साथ शिक्षा दिलवानी प्रारम्भ की। अध्ययन के साथ-साथ उन्हें अस्त्र-शस्त्र चलाना घुड़सवारी आदि करने की शिक्षा वो स्वयं ही दिया करते थे।

एक दिन दोनों भाई बहन जंगल की तरफ शिकार करने निकले। लक्ष्मण सिंह बोला ‘‘ जीजी आगे घना जंगल लग रहा है। डर तो नहीं लग रहा है।’’ 

‘ डर मुझे डर क्यों लगेगा ?’

‘ नहीं लड़कियॉं जल्दी घबरा जाती हैं इसलिये कह रहा था।’ लक्ष्मण सिंह बोला।’

‘ अरे ! लड़कियाँ भी बहादुर ही होती हैं। वह कमजोर नही होतीं तुम क्या समझते हो मैं लड़की हूँ इसलिये तुम से कमजोर हूँ। नही यह भूलकर भी मत सोचना।’ ताज कंुवरि ने अपना घोड़ा आगे बढ़ाते कहा। 

‘नही‘, जीजी किसी से भी पूछ लो यही उत्तर मिलेगा ंिक स्त्री पुरूष से अधिक वीर नही हो सकती क्योंकि स्त्री कमजोर होती है।’ लक्ष्मणसिंह ने हंसते हुए कहा ।

‘ नहीं, मैं नही मानती इस बात को’ ताजकुंवरि ने दृढ़ता से कहा,‘ यह ठीक है कि महिलाऐं शरीर से पुरूष के मुकाबले कम शक्तिशाली होती हैं परन्तु अगर मन से हम कमजोर नही होंगे तो हम वीरता में कम नही होते हैं। मैं तुमसे अधिक वीर बहादुर हूँ।’ लक्ष्मण सिंह के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान आई और उपेक्षा से कहा,‘ कहने से ही कोई वीर नही हो जाता अवसर आने दो पता चला जायेगा मैं अधिक वीर या तुम। ’

‘हाँ अवसर आने दो ’ ताजकुंवरि ने कहा,‘ सिद्ध हो जायेगा मैं वीर याा तुम अधिक वीर।’ पर दोनों भाई बहन को ज्ञात नही था कि जिस अवसर को आने के लिये वो कह रहे हैं वह अवसर सामने ही है। दोनों बालक बात करते चले जा रहे थे। वहीं पास में ही दस बारह मुगल एक झाड़ी में बैठे थे। आपस में कुछ परामर्श कर रहे थे दो बालकों को अकेले जाते देखा तो उन्होने लाठियों उठाई और हो हो कर उनके ऊपर आक्रमण कर दिया। 

दोनों बालकों ने अपने ऊपर आक्रमण होते देखा तो बिजली की तेजी से म्यान से तलवारें निकाली और मुगल पठानों से युद्ध करने लगे। कुछ ही क्षण में लक्ष्मण सिंह ने बिजली की चमक सी तलवार चलाकर पाँच पठानों को मार गिराया तब तक ताजकंुवरि ने भी तीन पठान मार दिये थे। युद्ध करते हुए लक्ष्मण सिंह ताजकुंवरि को देख कर हँसा  और तलवार चलाते बोला,‘ देखा जीजी मैंने कहा था न कि पुरुष अधिक वीर होते हैं स्त्री पुरुष से अधिक बलवान नहीं हो सकती। ’

ताजकुंवरि ने झुककर एक मुगल की गरदन पर वार किया । भाई की ओर देखा उसकी बात सुनी उसकी तलवार और तेजी से चलने लगी । बचे हुए चार पाँच मुगल उन पर वार कर रहे थे देखते देखते ताजकुंवरि ने दो पठान और मार गिराये बाकी बचे दो तीन पठान भाग निकले। 

दस पठानों के शव पड़े थे। ताज कुंवरि ने कहा,‘ अब क्या कहते हो भाई अगर स्त्री अधिक वीर नही होती तो कम से कम बराबर तो होती ही है।’ दोनों भाई बहन हंस पड़े। बचे हुए पठान कुतुबुद्धीन के दरबार में पहुँचे वहाँ उन्होंने दोनों बालकों के शौर्य की गाथा सुनाई । कुतुबुद्धीन एबक से ताजकुंवरि की वीरता के साथ साथ उसकी सुन्दरता के भी विषय मैं  बताया कि ऐसा फूल तो कहंीं दूर दूर तक नहीं है। वह तो आपके हरम में ही खिलना चाहिये। ऐसा हूर सा सौन्दर्य तो आपके हरम में है ही नहीं । क्या ही 


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अच्छा होगा आप सज्जन सिंह से छीन कर ले आयें इससे आपके महल की रौनक तो बढ़ेगी ही मुगलों की मौत का बदला भी चुकेगा।’ 

ताजकंुवरि की वीरता और सौन्दर्य के विषय में सुनकर एबक बेचैन हो उठा। वह ताजकंुवरि को पाने के लिये उत्सुक था इसलिये सेना को कूच करने का आदेश दे दिया । तुरन्त किसारा राज्य को मुगल पठानों द्वारा घेर लिया गया। साथ ही सज्जन सिंह के पास पैगाम भिजवाया अगर अपनी खैर चाहते हो ताजकुंवरि को बादशाह की खिदमत में पेश कर दो। 

कुतुबुद्धीन का फरमान सुनकर राजपूतों की बाहें फड़कने लगीं झन झनाती तलवारें उनकी म्यान से निकल आईं और वे बादशाह की सेना पर टूट पड़ीं। लक्ष्मण सिंह और ताजकुंवरि किले की छत के कंगूरे से अपने वीर बहादुरों को लड़ते देख रहे थे। पर बादशाह की विशाल सेना के आगे उनके मुठ्ठी भर राजपूत एक एक कर गिरने लगे और सज्जन सिंह का पक्ष कमजोर होने लगा। 

दोनों बालक अपने पक्ष को कमजोर हेाते देख कर बेचैन हो उठे । ताज ने लक्ष्मण सिंह से कहा,‘ भाई क्या देख रहे हो ? अब खड़े खड़े देखते रहने का समय नही रहा। चलो रण क्षेत्र में हम दोनों चलते हैं । अब ही तो जो कुछ सीखा है काम में आयेगा।’ यह कहते वह अपना वेश बदलने अपने कक्ष की ओर बढ़ गई । लक्ष्मण सिंह भी अपने वस्त्र बदलकर तुरन्त आ गया और दोनों भाई बहन रण क्षेत्र में पहुँच गये और एक एक कर शत्रुओं को उनकी तलवारें काटने लगीं। न जाने कितने पठान उन दोनों भाई बहनों द्वारा मौत की नींद सुला दिये गये गिनती नही थी। 

कुतुबुद्धीन दूरबीन से युद्ध के दृश्य देख रहा था। ताजकुंवरि को देख कर बोला,‘ हूर  बहिश्त की हूर बला की खूबसूरत हैं सचमुच यह मेरे हरम के लायक ही है।’ फिर सिपाहियों से बोला ,‘जो भी इस हूर को मेरे पास जिंदा पकड़कर लायेगा मुँह माँगा इनाम पायेगा। ’

इनाम की सुनकर एक जुट होकर मुगल सज्जन सिंह की सेना पर टूट पड़े। सज्जन सिंह मारे गये और मुगल ताज को पकड़ने के लिये बढ़े। लक्ष्मण और ताज बिजली की गति से तलवार चला रहा था। उसके युद्ध कौशल को देखकर सब दंग रह गये ,किन्तु कब तक वे दोनों बालक और मुठ्ठी भर राजपूत मुगलों के विशाल दल को रोक सकते थे। मुगल ताज के चारों ओर घेराबन्दी करने लगे। ताज ने देखा वह घिरने लगी है तो उसने लक्ष्मण सिंह की ओर देखा और कहा, ‘भाई अपनी बहिन की रक्षा करो।’ 

लक्ष्मण ंिसह ने कहा ,‘अब रक्षा की संभावना कहाँ रह गई है जीजी ’। कहते लक्ष्मण सिंह का गला भर आया। ‘छिः तुम वीर राजपूत हो राजपूत होकर रो रहे हो। मेरे शरीर की नही मेरे धर्म की रक्षा करो यदि यवनों ने मेरे शरीर को अपने नापाक हाथों से छू भी लिया तो मेरा धर्म भ्रष्ट हो जायेगा।’ 

लक्ष्मण सिंह समझ गया और दूसरे ही क्षण लक्ष्मण सिंह ने तलवार उठाई और बहिन का सिर धड़ से अलग हो गया। बहिन को तलवार के घाट उतारकर लक्ष्मण सिंह भी अधिक देर तक युद्ध क्षेत्र में नहीं रहा और वीर गति को प्राप्त हो गया। 

कुतुबुद्धीन एबक ने अपना झंडा किले पर फहरा दिया और सिपाहियों को सम्बोधित करते हुए बोला,‘ मेरे बहादुर सिपाहियो हमने इस लड़ाई में फतह हासिल की है। इसके लिये अल्लाहताला का शुक्र है। लेकिन राजपूतों के ये फौलादी बच्चे किस मिट्टी से बने हैं यह पता नही चल सका। जीत कर भी अन्दर से हम अपने को हारा महसूस कर रहे हैं।’





Saturday, 21 February 2026

pari katha phool kumari

 

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Monday, 8 September 2025

Do bhai

 दो भाई

बहुत समय पहले एक गाँव में दो भाई रहते थे। बड़े भाई का विवाह हो चुका था लेकिन छोटा भाई अभी कुँवारा था, तथा बहुत सीधा सादा भी था।

छोटा भाई ने खेत में ज्वार बोया था, लेकिन पूरे खेत में केवल एक ज्वार का पौधा उगा। यह पौधा खेत के बीचोंबीच था। उसे वह पौधा इतना सुंदर लगा कि वह पूरे जतन से उस पौधे की देखरेख करने लगा। पौधा जल्दी बड़ा हो गया और उसमें ज्चार का फूल एकदम बड़ा सा लगा। धीरे धीरे फूल में ज्वार लगने लगा। दाने बहुत बड़े बड़े थें लेकिन जैसे ही वह पकने लगा एक अदभुत चिड़िया आई और ज्वार को तोड़ कर ले गयी। सीधा सादा भाई हाथ हिलाता चिड़िया के पीछे भागा। भागते भागते वह बहुत दूर निकल आया धीरे धीरे रात हो गयी और चिड़िया ने दिखाई देना बंद कर दिया। अब छोटे भाई ने अपने चारों ओर देखा। वहाँ बड़े बड़े पहाड़ घने जंगल थे। चीते, शेर, भेड़िया गुरगुरा रहे थे। उसे एक विशाल वृक्ष दिखाई दिया, उस पर चढ़कर पत्तियों के बीच छिप कर बैठ गया।

पेड़ के नीचे कुछ ही देर बाद तीन मित्र चीता, भेड़िया और बंदर आकर एकत्रित हुए। चीते बोला, आज बहुत आराम महसूस हो रहा है। भाई बंदर कोई कहानी सुनाओं। बंदर बोला, कोई कहानी तो आती नहीं है हाँ एक मजेदार किस्सा सुना सकता हूँ। भेड़िया और चीता किस्सा सुनने केा तैयार हो गये तो बंदर ने किस्सा सुनाना शुरू किया।

दक्षिण पूर्व में करीब पचास मील दूर एक छोटा सा गाँव है। वहाँ एक लड़की को एक ऐसी बीमारी है जिसका इलाज तो बहुत सरल है लेकिन कोई जानता नहीं है। उसके पिता ने घोषणा की है कि जो भी इसका इलाज कर देगा उसकी शादी उस लड़की से कर दी जायेगी। यदि इस पेड़ की छाल खुरच कर उसकी तीन गालियाँ बना कर लड़की को खिला दीं। जाय तो वह ठीक हो जायेगी।

चीता और भेड़िया ने आह भरी काश हम आदमी होते तो शादी का कितना अच्छा अवसर था।छोटे भाई ने बैठे बैठे उस डाल पर में इतनी छाल उतार ली कि करीब तीन गोलियाँ बन जाय। तीनों जानवर कुछ देर तक और गपशप करते रहे फिर चले गये।

प्रातः होते ही छोटा भाई पेड़ से उतरा गोलियाँ लेकर गाँव की ओर चल दिया रास्ता पूछते पूछते गाँव पहुँचा। बीमार लड़की के घर पहुँच उसे गोली खिला दी। लड़की तुरंत अच्छी हो गयी। पिता ने तुरंत छोटे भाई की शादी उस लड़की से कर दी।

उधर बड़े भाई को छोटे भाई की कमी बहुत खल रही थी। क्योंकि वह घर के और खेत के सभी भारी काम छोटे भाई से करवाता था। बड़ा भाई पत्नी से बोला, छोटा न जाने कहाँ धूम रहा है उसे घर आकर काम धाम करना चाहिये। यह कहकर वह छोटे भाई को ढूँढ़ने निकला। चलते चलते रात हो गयी और वह भी उसी पेड़ के नीचे पहुँचा। जानवरों के डर से वह भी पेड़ पर छिप कर बैठ गया।

तीनों जानवर पहले दिन की तरह एकत्रित हुए। चीते ने कहा, बंदर भाई कोई किस्सा सुनाओ। बंदर बोला कल कोई पेड़ पर छिप कर हमारी बातें सुनकर धनवान बन गया, आज पहले देख लें कोई यहाँ छिपा तो नहीं है। बड़े भाई ने जब यह सुना तो डर से इतने जोर से कांपने लगा। कि पेड़ जोर जोर से हिलने लगा। बंदर तेजी से पेड़ पर चढ़ा और बड़े भाई को जमीन पर गिरा लिया और तीनों जानवर उस पर टूट पड़े और उसे मार कर खा गये।


Wednesday, 3 September 2025

Khoya uunt

 खोया ऊॅट

बीजापुर के महाराजा वीर सेन बहुत अधक बुद्विमान एंव कुशल शासक थे। उनके कुशल नेतृत्व मंे चार बुद्विमान मंत्रियों का बहुत हाथ था। परन्तु राजा को अपने ऊपर बहुत विश्वास था। वह कभी कभी अपनी बात क आगेे मंत्रियों की नहीं चलने देता था। एक बार उसने जनता पर चाहे अमीर हो गरीब एक महल बनवाने के लिये कर लगाने की कही। मंत्रियों ने स्पष्ट रूप से कहा यह जनता पर अत्याचार होगा। जैसा कि उन्हे आशा थी राजा अपनी इच्छा के खिलाफ बात सुनकर बहुत गुस्सा हुआ। राजा ने सोचा उसके महल को ये मंत्री लोग बनने नहीं देना चाहते हैं। उसने उन चारों को उसी क्षण देश निकाला दे दिया।

चारों मंत्रियों ने जन साधारण से कपडे पहने और शहर से बाहर चल दिये। लक्ष्यहीन चलते चलते वे एक विशाल बरगद के पेड़ के नीचे पहुंचे। वहां से चार रास्ते जाते थे पहले कि किसी एक पर चलें वे पेड़ के नीचे सुस्ताने के लिये बैठ गये। बैठे इधर उधर की बात कर रहे थे। बातों ही बातों मे इधर उधर ध्यान दिया तो लगा कि रात को इस स्थान पर बारिश हुई है और एक अकेला ऊंट उस रास्ते से गुजरा है चारों उस ऊंट के पदचिन्ह को देखकर ऊंट का वर्णन करने मंे लग गये। अभी वे इस विषय में बात ही कर रहे थे कि एक ऊंट वाला रोता चीखता आया । उसका ऊंट खो गया था उसने उन लोगो से पूछा कि क्या उन्हांेने उसका ऊंट देखा है ?

पहले मन्त्री ने कहा “ क्या तुम्हारा ऊंट बांये पैर से लंगडाता था”

“ हां हां हजूर वह लंगडाता था क्या आपने उसे देखा है ?”

तभी दूसरा मंत्री बोला,‘ मेरा ख्याल है वह केवल लंगडा ही नही था उसकी पूंछ भी नही थी।’

“हां बिलकुल वही है मेरा ऊंट उसके एक आंख भी नही हैं आप लोग बता नही रहे हैं कि वह कहां है तो जरूर आप लोगो ने उसे चुराया है”

अब चौथा बोला “ हम सच कह रहे हैं हमने उसे देखा तक नहीं है, चुराने की बात तो बहुत दूर रही हां एक बात बताना भाई वह बहुत कमजोर भी था”

“ हे भगवान “ ऊंट वाला बोला,‘ मै बिलकुल सही कह रहा हूॅ अवश्य आप लोगो ने मेरा ऊंट चुराया है मै राजा से शिकायत करूंगा।’

“ हम तुमसे सत्य कह रहे हैं ” प्रथम म़न्त्री ने कहा ,‘फिर कह रहे हैं हमने तुम्हारा ऊंट देखा भी नहीं है राजा से शिकायत करना चाहते है तो करो पर हम तुम्हारा ऊंट लौटाने मंे सहायता नहीं कर पायेंगे। इसमे समय बरबाद करोगे इससे अच्छा है अभी अधिक दूर नही होगा उसे खोजो। हम लोग ईमानदार भले आदमी हैं।

“ईमानदार भले आदमी ,‘ऊंटवाला चिल्लाया,‘ मैं तुम जैसे लोगो का खूब अच्छी तरह से जानता हूॅ जो अच्छी तरह से कपडे पहनकर जनता को लूटते हैं तुम्हीं लोगो ने ही मेरा ऊंट चुराया है ” वह रोता चिल्लाता राजा से शिकायत करने चला ,‘न्याय मुझे न्याय चाहिये।’

अभी वह अधिक दूर नहीं गया होगा कि उसे राजा अपने अंगरक्षको के साथ आता दिखाई दिया। न्याय न्याय! की मांग सुन वीरसेन रूक गये। ऊंट का मालिक परेशान था वह उलझन में यही निश्चत समझ बैठा कि वे ही ऊंट चोर हैं।

‘महाराज’ वह राजा के पैर पडते बोला “ मै एक गरीब ऊंट वाला हूॅ। अगर मेरा ऊंट खो गया तो मै भूखा मर जाऊंगा। हजूर ही मुझे बचा सकते हैं”।

‘रुको भाई “ राजा ने कहा मुझे बात तो बताओ ।”

ऊंट वाले ने कहा सब बात बताई और कहा कि चोरांे को दंड देकर मेरा ऊंट दिलवाइये।

“ इसमे परेशानी की क्या बात है चलो मुझे चारों चोरांे को दिखाओ मैं एक अपना अंगरक्षक  यहीं छोड देता हूॅ तुम घोडे पर चढ जाओ।

ऊंटवाला घोडे पर राजा को उसी बरगद के पेड के नीचे लाया जहां चारों म़ंत्री आराम से बैठ बाते कर रहे थे।

राजा को यह देखकर बडा आश्चर्य हुआ कि जिन्हे ऊंट बाला चोर बता रहा है वह उसके द्वारा निश्काषित मंत्री हैं। वे लोग ऐसा नही करेंगे यह राजा को विश्वास था। वह बिना किसी पूछ ताछ के भी यही निर्णय देता लेकिन ऐसा करना उचित नहीं समझा क्योंकि इससे ऊंट वाले को सतोष नहीं होता इसलिये उसने चारों से ऊंट के लिये पूछा।

“ चुराने की तो दूर रही हमने उसे देखा तक नहीं है।’ चारों ने कहा

उनके विरूद्व की गई शिकायत के हिसाब से यह आश्चर्य जनक बात थी। 

‘तब तुम्हें यह कैसे मालूम हुआ कि वह लंगडा था ?’ राजा ने पूछा।

“ बहुत साधारण बात है महाराज प्रथम मन्त्री ने कहा यह तो उसके गीली मिटटी पर चिन्हों को देखकर कोई  भी कह सकता है। आप भी देखिये बायें खुर को पूरे दबाब से नहीं रखा गया है”

राजा और अंगरक्षकों ने देखा और सन्तुष्ट हो गये “ यह तो ठीक है लेकिन यह कैसे मालूम हुआ कि उसके पूंछ नही थी क्या पद चिन्हांे से यह बात भी मालूम की थी क्या?’

“ नहीं हजूर “ दूसरा मंत्री बोला यह बात पद चन्हांे से नही बल्कि जांेको को देखकर कहा था जो जमीन पर पड़ी है” राजा ने देखा अनेको जोंकंे  रक्त पीकर जमीन पर पडी हुई है‘ अगर ऊॅट के पूॅछ होती तो वे इतना खून पी पाती उससे पहले ही वह उन्हे पूंछ से झाड देता ।’

“ अच्छा कैसे कहा की उसके आंख नही थी?”

 तीसरे मन्त्री ने स्पष्ट किया कि उसकी दांयी आंख नहीं थी” राजा ने चौक हर पूछा “ वह कैेसे? ’ 

‘हुजूर यह तो कोई भी घास को देखकर कह सकता है कि बायीं तरफ घास काफी थी फिर भी ऊॅट ने दाहिनी तरफ से ही घास खायी है।”

राजा और ऊॅट बाला सब सन्तुष्ट हो गये  । चौथे मंत्री ने ऊॅट के गोबर को देखकर बताया था कि वह कमजोर है अब उनकी निर्दाेषता मे केाई सन्देह नही रह गया था। ‘आप लोगों की बुद्वि देखकर ’,राजा ने कहा ,‘मेरी आंखें खुल गई है आप लोग वस्तु को अच्छी तरह से देखकर परखना जानते हैं दिमाग को खुला रखते हैं यह मैं इस छोटी सी घटना ही से जान गया हॅू ंआप लोगो की सलाह कि जनता पर अधिक कर नहीं लगाना चाहिये मै आदर करता हूॅैै। क्या आप लोग अब मेरे साथ और फिर से अपना पद सम्भालें चारों मन्त्री राजमहल मे लौट आये। ऊॅट वाले को एक ऊॅट देकर उसे विदा किया।


Monday, 1 September 2025

do bhai

 दो भाई


बहुत समय पहल एक गाँव में दो भाई रहते थे। बड़े भाई  का विवाह हो चुका था लेकिन छोटा भाई अभी कुँवारा था बहुत सीधा सादा भी था।

छोटे भाई ने खेत में ज्वार बोया लेकिन पूरे खेत में केवल एक ज्वार का पौधा हुआ। यह पौधा खेत के बीचों-बीच था। उसे वह पौधा इतना सुंदर लगा कि वह पूरे जतन से उस पौधे को देख-भाल करने लगा। पौधा जल्दी ही बड़ा हो गया और उसमें ज्वार का फूल एकदम बड़ा सा लगा। धीरे-धीरे फूल में ज्वार लगने लगे। दाने बहुत बड़े-बड़े थे। लेेकिन जैसे ही वह पकने लगा एक अद्भुत चिड़िया आईं और ज्वार को तोड़ ले गई। सीधा सादा भाई हाथ हिलाता चिड़िया के पीछे भागा। भागते-भागते वह बहुत दूर निकल आया। धीरे धीरे रात हो गई और चिड़िया ने दिखाई देना बंद कर दिया। अब छोटे भाई ने अपने चारों ओर देखा। वहाँ बड़े-बड़े पहाड़ घने जंगल थे चीते, शेर, भेड़िया गुरगुरा रहे थे। उसे एक विशाल वृक्ष दिखाई दिया उस पर चढ़कर पत्तियों के बीच छिप कर बैठ गया। 

पेड़ के नीचे कुछ ही देर बाद तीन मित्र, चीता, भेड़िया और बंदर आकर एकत्रित हुए। चीता बोला,‘ आज बहुत आराम महसूस हो रहा है। भाई बंदर कोई कहानी सुनाओ’, बंदर बोला, ‘कोई कहानी तो आती नहीं है हाँ एक मजेदार किस्सा सुना सकता हूँ।’ भेड़िया और चीता किस्सा सुनने को तैयार हो गये हो बंदर ने कहना शुरू किया, 

‘दक्षिण पूर्व में करीब पचास मील दूर एक छोटा-सा गाँव हैं। वहाँ एक लड़की को कोई लाइलाज बीमारी लग गयी है। कोई भी उसे ठीक नहीं कर पा रहा है। उसके पिता ने घोषणा की है कि जो भी उसे ठीक कर देगा उसकी शादी उस लड़की से कर दूँगा। जब कि इसका इलाज बहुत सरल है, इस पेड़ की डाल की छाल को खुरचकर उसकी तीन गोलियाँ बनाकर उसे खिला दे तो वह ठीक हो जायेगी।’

चीता और भेड़िया ने आह भरी, काश, ‘हम आदमी होते तो शादी का कितना अच्छा अवसर था।’ छोेटे भाई ने बैठे-बैठे उस डाल पर से इतनी छाल उतार ली कि करीब तीन गोलियाँ बन जाय। तीनों जानवर कुछ देर तक और गपशप करते रहे और फिर चलंे गये।

प्रातः होते ही छेाटा भाई पेड़ से उतरा गोलियाँ लेकर गाँव की आरे चल दिया। रास्ता पूछता-पूछता वह गाँव में पहुँचा जहाँ वह बीमार लड़की थी। छोटे भाई ने लड़की को गोलियाँ खिलाई। लड़की तुरंत अच्छी हो गई। पिता ने धूमधाम से छोटे भाई की शादी लड़की से कर दी।

उधर बड़े भाई को छोटे भाई की कमी अखर रही थी क्योंकि वह घर की और खेत के सभी भरी काम छोटे भाई से करवाता था। बड़ा भाई पत्नी से बोला,‘ छोटा न जाने कहाँ घूम रहा है उसे घर आकर ंकाम-धाम करना चहिए।’ यह कहकर वह छोटे भाई को ढूँढ़ने निकला। चलते चलते रात हो गई और वह भी उसी पेड़ के नीचे पहुँचा। जानवरों के डर से वह भी पेड़ पर छिप कर बैठ गया।

तीनों जानवर पहले दिन की तरह एकत्रित हुए। चीता बोला, ‘बंदर भाई कोई किस्सा कहानी सुनाओ’। बंदर बोला, ‘कल कोई पेड़ पर छिपा बैठा था उसने हमारी बातें सुन ली थी और धनवान बन गया आज पहले देख ले कोई यहाँ छिपा तो नहीं है।’ 

बडे़ भाई ने जब यह सुना तो डर से इतने जोर से कांपने लगा कि पेड़ जोर-जोर से हिलने लगा। बंदर तेजी से पेड़ पर चढ़ा और बड़े भाई को जमीन पर गिरा लिया और तीनों जानवर उस पर टूट पड़े उसे मार कर खा गये।


Saturday, 30 August 2025

Antrikhsh ki ek udaan

 ‘अंतरिक्ष  की एक उड़ान’


                                  डा0 ष्शषि गोयल


         विकी को बचपन से ही आकाष में चमकते पिंडों को देखने का बहुत शौक था। विकी के पिता अंतरिक्ष शोध संस्थान के  सदस्य थे । अपनी लंबी दूरबीन से उसे बचपन से ही सितारों का  परिचय दिया करते थे । जब वे  संस्थान के अध्यक्ष बने विकीे भी उसका सक्रिय  सदस्य बन चुका था। अब अपनी यात्राओं में वे उसको साथ रखने  लगे। प्रो0 हरवंष राडार के साथ दूर आकाष में शोध में व्यस्त थे । एकाएक उन्होंने विकी के पिता शर्मन और विकी को बुलाया। राडार के पर्दे पर चमकीली बोैछारें सी दिखने लगीं और लगा छत पर पानी की बूंदे पड़  रही हैं।‘फुऐं फुए  जैसे छोटे छोटे पदार्थ करीब एक हजार मील दूर ठीेक उनके ऊपर ऐसा लग रहा था जैसे झपटनेके लिये तैयार बाज’  दूसरे दिन एक व्यक्ति डा 0 षिवहरे उनके पास आया। उसने भी आकाष की वह वस्तु देखी थी। देखी क्या थी उसे उसका विषद ज्ञान था। वह बोला,‘ पिछले कुछ समय से उड़न तष्तरियों के समूह यहॉं आ रहे हैं । काफी करीब आकर ये ध्वनियॉं निकालते हैं जिसका कारण अज्ञात है । ये ध्वनियॉं इतनी तीखी और उत्तेजक होती हैं कि स्टील का पुल भी ऐसे हिलने लगता है जैसे उत्तेजक वायलन की घ्वनियों से ष्शराब का गिलास ।

‘ क्या उड़न तष्तरियों में जीवन है?’ प्रो0 हरवंष ने पूछा । ‘ यह तो नहीं मालुम ’ पिछले सप्ताह अमेरिकन सरकार ने  अपने  नये  एटोमिक रॉकेट को  खोज बीन के लिये  भेजा था । वह रॉकेट उड़न तष्तरियों के जरा अधिक ही नजदीक पहुॅंच गया और नष्ट हो गया । यह महज आवाज से नष्ट हुआ था’ 

‘ शायद अजनबियों ने सोचा हो कि  हमले के लिये  आ रहे हैं ।’ ष्शर्मन ने कहा

 ‘ अब हम आपके पास सहायतार्थ आये हैं  आप और आपके सहयोगी डा0 शर्मन ने अनेकों अन्तरिक्ष की यात्राऐं की हैं आपके पास आधुनिक  यंत्रों से युक्त अन्तरिक्ष यान है । आपने अन्तरिक्ष से  आती  ध्वनियों का  अध्ययन किया है । ’षिवहरे  बोले 

 ‘ यह तो ठीक है ,’ प्रो हरवंष बोले ,‘ लेकिन आप मुझसे चााहते क्या हैं ?’ 

‘ हम चाहते हैं कि आप उन रहस्यमयी उड़न तष्तरियों के  नजदीक जाकर उनका अध्ययन करें व फोटो आदि ले लें  । उन अजनबियों से किसी प्रकार बात करें यद्यपि इसमें काफी खतरा है लेकिन मनुष्य के  लिये वरदान सिद्ध होगा और भारत विष्व पटल पर नाम करेगा कि हमारे यहॉं  ऐसे प्रतिभाषाली वैज्ञानिक हैं । ’

 दो दिन बाद  प्रो0 हरवंष , विकी उसके पिता शर्मन के साथ अपने अत्याधुनिक विमान में बैठे थे । इसके अंदर अपनी स्वयं की गुरुत्वाकर्षण ष्शक्ति थी यह किसी भी दिषा में चलाया जा सकता था । राडार के पर्दे पर बार बार चमक दिखाई दे रही थी और आवाज सुनाई पड़ रही थी । वहॉं

 पहुॅंचने में आधा घंटे की देरी थी  । 

 नीचे पृथ्वी एक गेंद की तरह लुढ़कती दूर जा रही थी । आकाष गहरा नीला होता जा रहा था । विकी जरा जरा घबराने लगा । एक दो बार दूसरों का चेहरा देखा । विकी के पिता का चेहरा भी जरा जरा  पीला था । एकाएक उन्हें एक आवाज सुनाई दी जैसे चर्च में घंटियॉं बज रही हों  ।विकी ने दूरबीन से देखा जो  दृष्य पर्दे पर था वह उसे जिन्दगी में नहीं भूल सकता । करीब सौ प्याले  के आकार की वस्तुऐं आकाष में नृत्य की माफिक  लहरा रही थी । उनके चारो ओर रोषनी निकल रही थी। ध्वनि पकड़ने वाले यंत्र से उनका संगीत आ रहा था । देखते और  सुनते उड़ते वे उनसे  केवल सौ मील दूर रह गये ।उन्होंने हवा का दबाव सह सकने  योग्य कपड़े पहने  और पारदर्षक हैमलेट पहने।अब तष्तरियॉं स्पष्ट दिखाई दे रही थीं। उनका कमरा संगीत से गॅूंज रहा था । प्रांे0 हरवंष ने उनसे करीब एक  मील दूर यान स्थिर कर लिया ।

यान की चालक सीट पर अब विकी के पिता थे और  प्रो 0 हरवंष ने  चित्र खींचने प्रारम्भ कर दिये  । कुछ देर तक कुछ नहीं हुआ ।विकी बेचैन था कब उड़नतष्तरियॉं उन लोगों के यान को देखेंगी। एकाएक छोटे छोटे अन्तरिक्ष यानों के बीच में एक विषाल यान प्रकट हुआ उसमें से सबसे अधिक तेज प्रकाष निकल रहा था ।विकी के दिमाग में घंटियॉं सी बजने  लगी  फिर उनके  बीच  से ध्वनि तरंगें विकी के दिमाग में प्रवाहित होने लगीं ,‘ वे कह रहे थे ‘ लड़के को भेजा , लड़के को भेजो ।’ विकी ने  अपने पिता और प्रो0 हरवंष की ओर देखा । उनके चेहरे से लग रहा था कि वे ध्यान से  सुन रहे हैं । यद्यपि कोई आवाज नहीं थी  यह मानसिक संदेष था । और निष्चित ही  उन्होंने भी उसे सुना था ।विकी के पिता बोले ‘ लड़के को नहीं ,मैं स्वयं आता हॅूं  ’ 

लेकिन तुरंत प्रत्युत्तर मिला ‘लड़के को भेजो ’

विषाल यान उड़कर उनके और समीप आ गया था विकी के होंठ सूख गये । बड़ी मुष्किल से अपनी अकड़ी जवान खोली और कहा ,‘ मुझे जाने दो  तभी तो आगे कुछ पता लगेगा ’ 

‘ यह कोई चाल भी हो सकती है ,’प्रो0 हरवंष ने कहा , ‘ तुम्हें बंधक भी बनाया जा सकता है  ।’

विकी खतरा समझ रहा था  लेकिन  बोला,‘ वे मित्र भी हो सकते हैं हमसे अधिक

 बुद्धिमान हैं यही क्यों सोचें कि हानि पहुॅंचायेगे ’ 

 विकी के पिता का चेहरा कठोर हो गया । लेकिन अपने कर्तव्य को सामने रख कर बोले ,‘ बेटा ठीक कहता है वह छल कपट नहीं जानता । बड़ों की बुद्धि उन्हें धोखा दे सकती है ।’ 

 विकी ने अपना हैलमेट पहना और नीचे बने कमरे में गया । एक बटन दबाते ही अंतरिक्ष यान का द्वार खुल गया और वह शून्य में बाहर निकल आया । दाव युक्त हवा के सिलैंडर उसकी पीठ पर बंधे थे  उसी के दबाव से वह उनके यान की ओर बढ़ गया । यह छोटी सी यात्रा अपने  आप में अनोखी थी । वैसे उन्होंने  कई बार अन्तरिक्ष में यात्राऐं की थीं  ,संकट के समय क्या करना है यह अभ्यास किया था लेकिन तब संकट की कल्पना मात्र थी अब संकट सामने था । 

 विषाल जहाज केगुरुत्वाक 

र्षण  के अंदर पहुॅंचते ही उसने  अपना हवा का बटन बंद कर दिया । विषाल यान कई मंजिल के मकान की तरह था। 

और किसी चमकदार पदार्थ का बना हुआ था। अब संगीत की ध्वनि सुनाई नहीं दे रही थी लेकिन फुसफुसाहट सी सुनाई पड़ रही थी।विकी ने यान के एक अंधेरे द्वार में प्रवेष किया। उसके प्रवेष करते ही द्वार बंद हो गया ।विकी को मानसिक रुप से आगे बढ़ने का निर्देष मिला विकी अंदर ही

 अंदर आदेषानुसार बढ़ रहा था मेहराबदार दीवार पर चमकदार रोषनी की पारदर्षी रॉड लगी हुई थी चारो ओर गहन ष्शांति छाई हुई थी । एकाएक एक मनुष्याकृति  उसे ऊॅंचे  आसन पर बैठी दिखाई दी । वह एक वृद्ध दाढ़ी वाला व्यक्ति था  उसने श्वेत वस्त्र पहन रखे थे । चेहरे पर दया और अपार बुद्धि के भाव थे । ‘ मेरे बेटे ,’ संगीतमय ध्वनि उसके मुॅह से निकली ,’ मुझे खुषी हुई कि तुम आये ।’

 ‘ लेकिन  आप तो  बिलकुल हमारे जैसे हैं,’ वह हकलाया , ‘एक साधारण पृथ्वी वासी ’। 

 वह मुस्कराया,‘ यह एक भ्रम मात्र है , मेरी असली आकृति तुम पृथ्वी वालों को सहन नहीं होगी इसलिये मैंने तुम्हारे मस्तिष्क की इच्छा के अनुरूप  रूप रखा है । इसी प्रकार मेरे शब्द तुम्हारे मस्तिष्क से टकराते ही तुम्हारी भाषा में बदल जाते हैं ।’ ।

 विकी हैरानी से देख रहा था ,‘ क्या इस यान में आप ही हैं ? ,’  वह बोला 

उसने पीछे एक द्वार की ओर इषारा करते हए कहा,‘ अन्य भी हैं लेकिन उनसे तुम्हें कोई मतलब नहीं है,‘ मैंने तुम्हें बुलाया है इसलिये मैं ही तुम से कुछ प्रष्न पूछूंगा ।’

 ‘ किस प्रकार के प्रष्न?’

‘ पृथ्वी के विषय में । कुछ दिन पहले हमारे यन्त्रों ने यहॉं पृथ्वी पर धमाके सुने थे  और एक छोटे ग्रह पर तुम्हारे यहॉं से एक यान गया था । हम सचेत हो गये।संभवतः तुम लोग अन्य ग्रहों पर आक्रमण करने की इच्छा तो नहीं रखते । मैं अनेकों बार पहुॅंचा लेकिन लोगों के मस्तिष्क में मुझे 

 केवल नफरत और भय के विचार मिले  । हम मित्र बन कर आये  हैं केवल ज्ञान प्राप्त करने  तुम्हारा मस्तिष्क छल कपट रहित है’।

‘ मैं भी डर गया था ’ , विकी ने स्वीकार किया ।

‘ भय एक भाव मात्र है जिस पर विजय पाई जा सकती है । लेकिन  क्या तुम भी हम से घृणा करते हो ? क्या युद्ध करना चाहते हो ’?

‘ नहीं हम युद्ध केवल आपस में करते हैं  और घृणा भी बस आपस में ही करते हैं  ।’ 

 एक लम्बी चुप्पी छा गई केवल यन्त्रों  की सरसराहट और किसी  यन्त्र के क्लिक क्लिक करने की आवाज आ रही थी । 

‘ तुम्हारे उत्तरों ने  हमें बड़ी ष्शांति पहुॅंचाई है । एक बोझ सा उतर गया  हम पर से ।’

 ‘ आप कौन हैं ? आप कहॉं से आये हैं ?’

‘ हम मंगल ग्रह के वासी हैं । वहॉं हम बहुत गहरी घाटी में रहते हैं हमारे ऊपर का आवरण रहने योग्य नहीं है । हम सालों से अपने समीप के एक ग्रह का अध्ययन कर रहे हैं । कई बार वीनस ग्रह के निवासियों ने  कठोर बादलों के द्वारा हम पर आक्रमण किया। लेकिन हमारा 

युद्ध इन्फ्रा किरणों पर आधारित है और उन्हें हमने नष्ट कर दिया । अब उनकी शक्ति पृथ्वी की ओर केन्द्रित हो रही है । और वे किसी भी  पल पृथ्वी पर हमला कर सकते हैं ।’ 

‘ अच्छा क्या मैं अपने यान पर जाऊॅं’?

‘ जैसी तुम्हारी इच्छा ’ 

‘लेकिन जाने से पहले मैं एक  बात पूछना चाहता हॅूं  । आपके यान से जो संगीत की ध्वनि निकली थी वह क्या है ?’

 उसने अपने आगे बने  की बोर्ड के आगे के कई बटनों में से एक को दबाया और विकी को घंटियॉं सुनाई देने लगी ।‘ ये छोटे छोटे धातु के गोलों की ध्वनियॉं हैं जिन्हें ऐम्पलीफायर से विकसित किया है प्रत्येक यान को अलग आवाज दी गई यद्यपि हम इसका उपयोग दिषा ज्ञान के लिये करते हैं 

 परन्तु सब  यानों की ध्वनि मिलकर इतनी ष्शक्ति रखती है कि किसी भी प्रकार की धातु  को नष्ट कर दे ,’ ।

‘ यहॉं तक कि  वीनस ग्रह के यानों को भी ?विकी नेे पूछा

 उसने सिर हिलाया , एकाएक विकी के दिमाग में एक विचार कौंधा,’ अगर वीनस ग्रह ने हम पर  आक्रमण किया तो  क्या आप हमारी सहायता करने आयेंगे ?’

 एक क्षण वह विकी की ओर देखते हुए मुस्कराया फिर बोला, ‘ तुम्हें हम पर  बहुत विष्वास हो गया है, और विष्वास को पूरा सहयोग मिलेगा ।’

 ॅ विकी ने विदा ली नीचे की तरफ जाने वाली सुरंग के द्वार पर पहुॅंच कर उसमें घुसने से पहले विकी ने  एक बार फिर विदा के लिये हाथ हिलाते मुड़ कर देखा एक लम्बी सी आकृति फिर वहॉं कुछ नहीं था । 

 अपने यान में आते ही ही प्रोफेसर हरवंष और विकी के पिता ने उसे घेर लिया। पिता के चेहरे पर राहत साफ महसूस की जा रही थी ।विकी ने पूरी घटना का वर्णन किया । उन्होंने ध्वनि पकड़ने वाले यन्त्र की ओर देखा। संगीत की ध्वनि धीरे धीरे कम हो रही थी। यान धीरे धीरे दूर जा रहे

 थे लेकिन विकी  मन ही मन ष्शर्म से गड़ा जा रहा था । मंगल वासियों को पृथ्वी की सभ्यता की खोखली बुनियादों का पता लग गया था ।

 अभी वे उन संगीत मय तष्तरियों को  छोटा और छोटा  होते देख रहे थे  कि पर्दे पर  एक तेजी से आती वस्तु दिखाई दी । प्रो 0 हरवंष ने हिसाब 

 लगाया वह करीब तीन सौ मील  दूर थी और दो हजार मील प्रति घंटे की गति से  सीधे उन लोगों की ओर आ रही थी । एक मिनट बीता  फिर दो  मिनट बीते , तीसरे ही मिनट पर्दे पर एक अन्य उड़न तष्तरी प्रगट हुई लेकिन यह  पहली तष्तहरयों से भिन्न अधिकतर पृथ्वी पर दिखाई देने वाली उड़न तष्तरी जैसी थी। एक गोलाकार वस्तु  पीछे से  चिन्गारियाों की पूंछ  छोड़ती गई । एकाएक विकी के मस्तिष्क में आया ,‘ इसके अंदर ष्शुक्रग्रह के निवासी हैं पृथ्वी के दुष्मन जो सालों से मनुष्य जाति का अध्ययन कर रहे हैं । जल्दी जल्दी उसने दोनों को  मंगलग्रह वासी के द्वारा कही बातें बताईं,’ जल्दी से  भाग चलो ’ विकी के पिता ने कहा और प्रो0 हरवंष ने पृथ्वी की ओर जाने वाला स्विच दबा दिया ।’शक्ति थी लेकिन अंदर लगा कि वह आगे नहीं बढ़ रहा है । उड़न तष्तरी ने रुख सीधा उनकी ओर कर लिया था । प्रति सेंकेंड यान बड़ा होता  जा रहा था। यह उनकी स्थिति से एक मील दूर था और पृथ्वी और उनके बीच आ गया। उसमें बनी 

खिड़कियों में से एक में रोषनी हुई । विकी के पिता ने विकी की बॉंह कस कर पकड़ ली,‘ ये मौर्स ही हैं ’ वह हैरान रह गया  पिता वीनस वासियों के विषय में कैसे  जानते हैं । ध्यान आया पिता पृथ्वी पर आने वाले  संकेतों का सालों से अध्ययन कर रहे हैं  ,‘ ये कह रहे हैं,हमारे पीछे आओ  नहीं तो हम तुम्हें  नष्ट कर द ेंगे’। पिता के स्वर में निराषा सी आ गई ।उन्होंने पर्दे पर देखा अनेकों बंदूकों की नाल जैसी वस्तुऐं यान में से निकल आई थी । एक बार फिर मार्स लोगों की रोषनी चमकी ,विकी के पिता बोले  ,‘ वे हमें तीस सेकेंड का समय  सोचने  का दे  रहे हैं ।’ 

उनसे  पॉंच मील दूर पृथ्वी दिखाई दे रही थी। विकी के गले में गोला सा अटक गया ।षायद ष्शुक्रग्रह वासियों की दुष्मनी का वे लोग पहला षिकार होंगे । नहीं  पहला नहीं  अनेकों विमान बिना किसी प्रकार का सुराग दिये गायब हो गये  । अनेकों आदमी अपने घरों से गायब हो गये  ,‘ पन्द्रह सेकेंड ’ विकी के पिता बोले । 

 विकी कॉंप उठा एकाएक  विकी को याद आया,‘ डैडी  मंगल ग्रह वासियों ने  हमारी सहायता करने का वचन दिया था मैं संदेष भेजने की कोषिष करता हॅंू ।’विकी ने पूरा ध्यान उस वृद्ध मुस्कराते व्यक्ति पर केंन्द्रित किया और चिल्लाया ,बचाओ हमें ’पॉंच सेकेंड तीन सेकेंड बचाओ बचाओ ’ और वह ष्शॉंत हो गया उसके चेहरे पर मुस्कराहट आ गई उसे लगा उसका संदेष पहुॅंच गया है ,‘ वे आ रहे हैं ’ अभी उसने कहा ही था कि उन्हें  घंटी की आवाजें सुनाई दीं । वे अंधेरे आकाष में देवदूत की भांति प्रकट हुए उनका संगीत सब जगह था उनके आगे पीछे नीचे ऊपर। अब दुष्मन की याद कर उसे दया आई , वह पिंजरे में चूहे की भांति फस गया था । एकाएक संगीत एक तीखी चीत्कार में बदल गया और उस ध्वनि का रुख उन्होंने 

ष्शुक्र यान की ओर मोड़ दिया उनके देखते देखते शुक्रग्रह का यान लाखों छोटे टुकडों में फट गया । आकाष साफ था। मंगल ग्रह के यान ऊपर

 उठने लगे विकी के मस्तिष्क में संदेष आया,‘ पृथ्वी पर वापस जाओ , याद रखना हम तुम्हारे साथ हैं ।’ प्रो0 हरवंष ने  यान का लीवर दबा दिया और वे पृथ्वी की ओर बढ़ने लगे ।







Tuesday, 26 August 2025

ole

 कुषुआ कहानी 

ओले

तीन ओले भाई थे। एक लंगड़ा,एक अंधा और एक भाई गूंगा था। तीनों की मां बुढ़िया पीली पोषाक पहनती थी। एक दिन एक डाकिया यात्रा पर जा रहा था । तीन दिन तक वह चलता रहा। एक रात तेज बारिष हुई,उसे कोई आश्रय नहीं मिला। वह चारो ओर किसी घर की तलाष करने लगा । कुछ दूर पर उसे रोषनी चमकती दिखाई दी। वह यह सोचकर उस ओर चल दिया कि रोषनी किसी घर की है ।

वहां जरूर कोई घर होगा।’ चलते चलते उसने सोचा। उस स्थान पर पहुंच कर उसने देखा कि पास पास दो झोंपड़ियां बनी हुई हैं। एक बुढ़िया दरवाजे के पास बैठी है। वह ओलों की मां थी । डाकिया बोला ,‘ मां षरण दो ।’

‘ बहुत अच्छा मैं तुम्हें षरण दूंगी,’ बुढ़िया ने कहा

बुढ़िया अपने तीनों बेटों के लिये एक बड़े बर्तन में खाना बना रही थी।

‘ अंदर आओ ’ बुढ़िया ने यात्री को बुलाया। उसके अंदर आने पर बोली ,‘ मेरे बेटे आ रहे हैं, मैं उन्हें क्या बताउंगी, अब मैं क्या करूं अगर तुम्हें देख लिया तो मार डालेंगे ।’

उसी समय तड़ तड़ की आवाज आकाष से आई,ओले आ रहे थे । बुढ़िया बोली ,‘एक मेरा बेटा लंगड़ा है दूसरा अंधा है और तासरा गूंगा है । लंगड़ा और अंधा बहुत बदमाष हैं उन्हें किसी को मारने में डर नहीं लगता है। तुम उन्हें मिल गये तो तुम्हें मार डालेंगें कोने में बैठ जाओ। ’’

एक बड़े से कटोरे में उसने मांस दिया। मांस सब जानवरों का मिला हुआ था। लेकिन जितना डाकिया खा रहा था उतनी ही उसकी भूख बढ़ रही थी । कारण यह था ओले रास्ते पर से गुजर रहे यात्रियों और जानवरों को मारकर मां को लाकर देते थे । यह मांस अभिषप्त होता था और किसी की भी भूख संन्तुष्ट नहीं कर पाता था।

धीरे धीरे तड़तड़ की आवाज नजदीक आती जा रही थी। झोंपड़ी के चारो ओर आवाज आइ्र फिर दरवाजे पर अंत में ठंडे पानी के छींटे आने लगे। ‘जल्दी खाना खतम करो जल्दी।’ बुढ़िया चिल्लाई। 

यात्री ने जल्दी से खाना खाया। ओलों की तड़तड़ दरवाजे पर आई। बुढ़िया ने यात्री को एक बड़े बर्तन में ढक दिया। तीनों ओले भाई एक एक करके आये। बुढ़िया ने उन्हें खाना दिया। षीघ्र ही एक भाई बोला,‘ मां कुछ गंध सी आ रही है,यह कहां से आ रही है ।’

‘मालुम नहीं,’ बुढ़िया बोली,‘ यहां तो कुछ नहीं है ।’ 

कुछ देर में दूसरा बोला,‘ मां कुछ न कुछ तो है गंध आ रही है ।’

‘ हो सकता है आटा सड़ गया है उसकी गंध आ रही है ।’

‘ तीनों भाई चुप हो गये और सो गये। यात्री को बहुत देर तक नींद नहीं आई।काफी रात गये वह सो गया । सुबह नींद खुली तो देखा न झोंपड़ी ,न ओले न बुढ़िया। खुले मैदान में मेड़ के किनारे सो रहा था ं आष्चर्य चकित वह उठ कर चल दिया ।