‘अंतरिक्ष की एक उड़ान’
डा0 ष्शषि गोयल
विकी को बचपन से ही आकाष में चमकते पिंडों को देखने का बहुत शौक था। विकी के पिता अंतरिक्ष शोध संस्थान के सदस्य थे । अपनी लंबी दूरबीन से उसे बचपन से ही सितारों का परिचय दिया करते थे । जब वे संस्थान के अध्यक्ष बने विकीे भी उसका सक्रिय सदस्य बन चुका था। अब अपनी यात्राओं में वे उसको साथ रखने लगे। प्रो0 हरवंष राडार के साथ दूर आकाष में शोध में व्यस्त थे । एकाएक उन्होंने विकी के पिता शर्मन और विकी को बुलाया। राडार के पर्दे पर चमकीली बोैछारें सी दिखने लगीं और लगा छत पर पानी की बूंदे पड़ रही हैं।‘फुऐं फुए जैसे छोटे छोटे पदार्थ करीब एक हजार मील दूर ठीेक उनके ऊपर ऐसा लग रहा था जैसे झपटनेके लिये तैयार बाज’ दूसरे दिन एक व्यक्ति डा 0 षिवहरे उनके पास आया। उसने भी आकाष की वह वस्तु देखी थी। देखी क्या थी उसे उसका विषद ज्ञान था। वह बोला,‘ पिछले कुछ समय से उड़न तष्तरियों के समूह यहॉं आ रहे हैं । काफी करीब आकर ये ध्वनियॉं निकालते हैं जिसका कारण अज्ञात है । ये ध्वनियॉं इतनी तीखी और उत्तेजक होती हैं कि स्टील का पुल भी ऐसे हिलने लगता है जैसे उत्तेजक वायलन की घ्वनियों से ष्शराब का गिलास ।
‘ क्या उड़न तष्तरियों में जीवन है?’ प्रो0 हरवंष ने पूछा । ‘ यह तो नहीं मालुम ’ पिछले सप्ताह अमेरिकन सरकार ने अपने नये एटोमिक रॉकेट को खोज बीन के लिये भेजा था । वह रॉकेट उड़न तष्तरियों के जरा अधिक ही नजदीक पहुॅंच गया और नष्ट हो गया । यह महज आवाज से नष्ट हुआ था’
‘ शायद अजनबियों ने सोचा हो कि हमले के लिये आ रहे हैं ।’ ष्शर्मन ने कहा
‘ अब हम आपके पास सहायतार्थ आये हैं आप और आपके सहयोगी डा0 शर्मन ने अनेकों अन्तरिक्ष की यात्राऐं की हैं आपके पास आधुनिक यंत्रों से युक्त अन्तरिक्ष यान है । आपने अन्तरिक्ष से आती ध्वनियों का अध्ययन किया है । ’षिवहरे बोले
‘ यह तो ठीक है ,’ प्रो हरवंष बोले ,‘ लेकिन आप मुझसे चााहते क्या हैं ?’
‘ हम चाहते हैं कि आप उन रहस्यमयी उड़न तष्तरियों के नजदीक जाकर उनका अध्ययन करें व फोटो आदि ले लें । उन अजनबियों से किसी प्रकार बात करें यद्यपि इसमें काफी खतरा है लेकिन मनुष्य के लिये वरदान सिद्ध होगा और भारत विष्व पटल पर नाम करेगा कि हमारे यहॉं ऐसे प्रतिभाषाली वैज्ञानिक हैं । ’
दो दिन बाद प्रो0 हरवंष , विकी उसके पिता शर्मन के साथ अपने अत्याधुनिक विमान में बैठे थे । इसके अंदर अपनी स्वयं की गुरुत्वाकर्षण ष्शक्ति थी यह किसी भी दिषा में चलाया जा सकता था । राडार के पर्दे पर बार बार चमक दिखाई दे रही थी और आवाज सुनाई पड़ रही थी । वहॉं
पहुॅंचने में आधा घंटे की देरी थी ।
नीचे पृथ्वी एक गेंद की तरह लुढ़कती दूर जा रही थी । आकाष गहरा नीला होता जा रहा था । विकी जरा जरा घबराने लगा । एक दो बार दूसरों का चेहरा देखा । विकी के पिता का चेहरा भी जरा जरा पीला था । एकाएक उन्हें एक आवाज सुनाई दी जैसे चर्च में घंटियॉं बज रही हों ।विकी ने दूरबीन से देखा जो दृष्य पर्दे पर था वह उसे जिन्दगी में नहीं भूल सकता । करीब सौ प्याले के आकार की वस्तुऐं आकाष में नृत्य की माफिक लहरा रही थी । उनके चारो ओर रोषनी निकल रही थी। ध्वनि पकड़ने वाले यंत्र से उनका संगीत आ रहा था । देखते और सुनते उड़ते वे उनसे केवल सौ मील दूर रह गये ।उन्होंने हवा का दबाव सह सकने योग्य कपड़े पहने और पारदर्षक हैमलेट पहने।अब तष्तरियॉं स्पष्ट दिखाई दे रही थीं। उनका कमरा संगीत से गॅूंज रहा था । प्रांे0 हरवंष ने उनसे करीब एक मील दूर यान स्थिर कर लिया ।
यान की चालक सीट पर अब विकी के पिता थे और प्रो 0 हरवंष ने चित्र खींचने प्रारम्भ कर दिये । कुछ देर तक कुछ नहीं हुआ ।विकी बेचैन था कब उड़नतष्तरियॉं उन लोगों के यान को देखेंगी। एकाएक छोटे छोटे अन्तरिक्ष यानों के बीच में एक विषाल यान प्रकट हुआ उसमें से सबसे अधिक तेज प्रकाष निकल रहा था ।विकी के दिमाग में घंटियॉं सी बजने लगी फिर उनके बीच से ध्वनि तरंगें विकी के दिमाग में प्रवाहित होने लगीं ,‘ वे कह रहे थे ‘ लड़के को भेजा , लड़के को भेजो ।’ विकी ने अपने पिता और प्रो0 हरवंष की ओर देखा । उनके चेहरे से लग रहा था कि वे ध्यान से सुन रहे हैं । यद्यपि कोई आवाज नहीं थी यह मानसिक संदेष था । और निष्चित ही उन्होंने भी उसे सुना था ।विकी के पिता बोले ‘ लड़के को नहीं ,मैं स्वयं आता हॅूं ’
लेकिन तुरंत प्रत्युत्तर मिला ‘लड़के को भेजो ’
विषाल यान उड़कर उनके और समीप आ गया था विकी के होंठ सूख गये । बड़ी मुष्किल से अपनी अकड़ी जवान खोली और कहा ,‘ मुझे जाने दो तभी तो आगे कुछ पता लगेगा ’
‘ यह कोई चाल भी हो सकती है ,’प्रो0 हरवंष ने कहा , ‘ तुम्हें बंधक भी बनाया जा सकता है ।’
विकी खतरा समझ रहा था लेकिन बोला,‘ वे मित्र भी हो सकते हैं हमसे अधिक
बुद्धिमान हैं यही क्यों सोचें कि हानि पहुॅंचायेगे ’
विकी के पिता का चेहरा कठोर हो गया । लेकिन अपने कर्तव्य को सामने रख कर बोले ,‘ बेटा ठीक कहता है वह छल कपट नहीं जानता । बड़ों की बुद्धि उन्हें धोखा दे सकती है ।’
विकी ने अपना हैलमेट पहना और नीचे बने कमरे में गया । एक बटन दबाते ही अंतरिक्ष यान का द्वार खुल गया और वह शून्य में बाहर निकल आया । दाव युक्त हवा के सिलैंडर उसकी पीठ पर बंधे थे उसी के दबाव से वह उनके यान की ओर बढ़ गया । यह छोटी सी यात्रा अपने आप में अनोखी थी । वैसे उन्होंने कई बार अन्तरिक्ष में यात्राऐं की थीं ,संकट के समय क्या करना है यह अभ्यास किया था लेकिन तब संकट की कल्पना मात्र थी अब संकट सामने था ।
विषाल जहाज केगुरुत्वाक
र्षण के अंदर पहुॅंचते ही उसने अपना हवा का बटन बंद कर दिया । विषाल यान कई मंजिल के मकान की तरह था।
और किसी चमकदार पदार्थ का बना हुआ था। अब संगीत की ध्वनि सुनाई नहीं दे रही थी लेकिन फुसफुसाहट सी सुनाई पड़ रही थी।विकी ने यान के एक अंधेरे द्वार में प्रवेष किया। उसके प्रवेष करते ही द्वार बंद हो गया ।विकी को मानसिक रुप से आगे बढ़ने का निर्देष मिला विकी अंदर ही
अंदर आदेषानुसार बढ़ रहा था मेहराबदार दीवार पर चमकदार रोषनी की पारदर्षी रॉड लगी हुई थी चारो ओर गहन ष्शांति छाई हुई थी । एकाएक एक मनुष्याकृति उसे ऊॅंचे आसन पर बैठी दिखाई दी । वह एक वृद्ध दाढ़ी वाला व्यक्ति था उसने श्वेत वस्त्र पहन रखे थे । चेहरे पर दया और अपार बुद्धि के भाव थे । ‘ मेरे बेटे ,’ संगीतमय ध्वनि उसके मुॅह से निकली ,’ मुझे खुषी हुई कि तुम आये ।’
‘ लेकिन आप तो बिलकुल हमारे जैसे हैं,’ वह हकलाया , ‘एक साधारण पृथ्वी वासी ’।
वह मुस्कराया,‘ यह एक भ्रम मात्र है , मेरी असली आकृति तुम पृथ्वी वालों को सहन नहीं होगी इसलिये मैंने तुम्हारे मस्तिष्क की इच्छा के अनुरूप रूप रखा है । इसी प्रकार मेरे शब्द तुम्हारे मस्तिष्क से टकराते ही तुम्हारी भाषा में बदल जाते हैं ।’ ।
विकी हैरानी से देख रहा था ,‘ क्या इस यान में आप ही हैं ? ,’ वह बोला
उसने पीछे एक द्वार की ओर इषारा करते हए कहा,‘ अन्य भी हैं लेकिन उनसे तुम्हें कोई मतलब नहीं है,‘ मैंने तुम्हें बुलाया है इसलिये मैं ही तुम से कुछ प्रष्न पूछूंगा ।’
‘ किस प्रकार के प्रष्न?’
‘ पृथ्वी के विषय में । कुछ दिन पहले हमारे यन्त्रों ने यहॉं पृथ्वी पर धमाके सुने थे और एक छोटे ग्रह पर तुम्हारे यहॉं से एक यान गया था । हम सचेत हो गये।संभवतः तुम लोग अन्य ग्रहों पर आक्रमण करने की इच्छा तो नहीं रखते । मैं अनेकों बार पहुॅंचा लेकिन लोगों के मस्तिष्क में मुझे
केवल नफरत और भय के विचार मिले । हम मित्र बन कर आये हैं केवल ज्ञान प्राप्त करने तुम्हारा मस्तिष्क छल कपट रहित है’।
‘ मैं भी डर गया था ’ , विकी ने स्वीकार किया ।
‘ भय एक भाव मात्र है जिस पर विजय पाई जा सकती है । लेकिन क्या तुम भी हम से घृणा करते हो ? क्या युद्ध करना चाहते हो ’?
‘ नहीं हम युद्ध केवल आपस में करते हैं और घृणा भी बस आपस में ही करते हैं ।’
एक लम्बी चुप्पी छा गई केवल यन्त्रों की सरसराहट और किसी यन्त्र के क्लिक क्लिक करने की आवाज आ रही थी ।
‘ तुम्हारे उत्तरों ने हमें बड़ी ष्शांति पहुॅंचाई है । एक बोझ सा उतर गया हम पर से ।’
‘ आप कौन हैं ? आप कहॉं से आये हैं ?’
‘ हम मंगल ग्रह के वासी हैं । वहॉं हम बहुत गहरी घाटी में रहते हैं हमारे ऊपर का आवरण रहने योग्य नहीं है । हम सालों से अपने समीप के एक ग्रह का अध्ययन कर रहे हैं । कई बार वीनस ग्रह के निवासियों ने कठोर बादलों के द्वारा हम पर आक्रमण किया। लेकिन हमारा
युद्ध इन्फ्रा किरणों पर आधारित है और उन्हें हमने नष्ट कर दिया । अब उनकी शक्ति पृथ्वी की ओर केन्द्रित हो रही है । और वे किसी भी पल पृथ्वी पर हमला कर सकते हैं ।’
‘ अच्छा क्या मैं अपने यान पर जाऊॅं’?
‘ जैसी तुम्हारी इच्छा ’
‘लेकिन जाने से पहले मैं एक बात पूछना चाहता हॅूं । आपके यान से जो संगीत की ध्वनि निकली थी वह क्या है ?’
उसने अपने आगे बने की बोर्ड के आगे के कई बटनों में से एक को दबाया और विकी को घंटियॉं सुनाई देने लगी ।‘ ये छोटे छोटे धातु के गोलों की ध्वनियॉं हैं जिन्हें ऐम्पलीफायर से विकसित किया है प्रत्येक यान को अलग आवाज दी गई यद्यपि हम इसका उपयोग दिषा ज्ञान के लिये करते हैं
परन्तु सब यानों की ध्वनि मिलकर इतनी ष्शक्ति रखती है कि किसी भी प्रकार की धातु को नष्ट कर दे ,’ ।
‘ यहॉं तक कि वीनस ग्रह के यानों को भी ?विकी नेे पूछा
उसने सिर हिलाया , एकाएक विकी के दिमाग में एक विचार कौंधा,’ अगर वीनस ग्रह ने हम पर आक्रमण किया तो क्या आप हमारी सहायता करने आयेंगे ?’
एक क्षण वह विकी की ओर देखते हुए मुस्कराया फिर बोला, ‘ तुम्हें हम पर बहुत विष्वास हो गया है, और विष्वास को पूरा सहयोग मिलेगा ।’
ॅ विकी ने विदा ली नीचे की तरफ जाने वाली सुरंग के द्वार पर पहुॅंच कर उसमें घुसने से पहले विकी ने एक बार फिर विदा के लिये हाथ हिलाते मुड़ कर देखा एक लम्बी सी आकृति फिर वहॉं कुछ नहीं था ।
अपने यान में आते ही ही प्रोफेसर हरवंष और विकी के पिता ने उसे घेर लिया। पिता के चेहरे पर राहत साफ महसूस की जा रही थी ।विकी ने पूरी घटना का वर्णन किया । उन्होंने ध्वनि पकड़ने वाले यन्त्र की ओर देखा। संगीत की ध्वनि धीरे धीरे कम हो रही थी। यान धीरे धीरे दूर जा रहे
थे लेकिन विकी मन ही मन ष्शर्म से गड़ा जा रहा था । मंगल वासियों को पृथ्वी की सभ्यता की खोखली बुनियादों का पता लग गया था ।
अभी वे उन संगीत मय तष्तरियों को छोटा और छोटा होते देख रहे थे कि पर्दे पर एक तेजी से आती वस्तु दिखाई दी । प्रो 0 हरवंष ने हिसाब
लगाया वह करीब तीन सौ मील दूर थी और दो हजार मील प्रति घंटे की गति से सीधे उन लोगों की ओर आ रही थी । एक मिनट बीता फिर दो मिनट बीते , तीसरे ही मिनट पर्दे पर एक अन्य उड़न तष्तरी प्रगट हुई लेकिन यह पहली तष्तहरयों से भिन्न अधिकतर पृथ्वी पर दिखाई देने वाली उड़न तष्तरी जैसी थी। एक गोलाकार वस्तु पीछे से चिन्गारियाों की पूंछ छोड़ती गई । एकाएक विकी के मस्तिष्क में आया ,‘ इसके अंदर ष्शुक्रग्रह के निवासी हैं पृथ्वी के दुष्मन जो सालों से मनुष्य जाति का अध्ययन कर रहे हैं । जल्दी जल्दी उसने दोनों को मंगलग्रह वासी के द्वारा कही बातें बताईं,’ जल्दी से भाग चलो ’ विकी के पिता ने कहा और प्रो0 हरवंष ने पृथ्वी की ओर जाने वाला स्विच दबा दिया ।’शक्ति थी लेकिन अंदर लगा कि वह आगे नहीं बढ़ रहा है । उड़न तष्तरी ने रुख सीधा उनकी ओर कर लिया था । प्रति सेंकेंड यान बड़ा होता जा रहा था। यह उनकी स्थिति से एक मील दूर था और पृथ्वी और उनके बीच आ गया। उसमें बनी
खिड़कियों में से एक में रोषनी हुई । विकी के पिता ने विकी की बॉंह कस कर पकड़ ली,‘ ये मौर्स ही हैं ’ वह हैरान रह गया पिता वीनस वासियों के विषय में कैसे जानते हैं । ध्यान आया पिता पृथ्वी पर आने वाले संकेतों का सालों से अध्ययन कर रहे हैं ,‘ ये कह रहे हैं,हमारे पीछे आओ नहीं तो हम तुम्हें नष्ट कर द ेंगे’। पिता के स्वर में निराषा सी आ गई ।उन्होंने पर्दे पर देखा अनेकों बंदूकों की नाल जैसी वस्तुऐं यान में से निकल आई थी । एक बार फिर मार्स लोगों की रोषनी चमकी ,विकी के पिता बोले ,‘ वे हमें तीस सेकेंड का समय सोचने का दे रहे हैं ।’
उनसे पॉंच मील दूर पृथ्वी दिखाई दे रही थी। विकी के गले में गोला सा अटक गया ।षायद ष्शुक्रग्रह वासियों की दुष्मनी का वे लोग पहला षिकार होंगे । नहीं पहला नहीं अनेकों विमान बिना किसी प्रकार का सुराग दिये गायब हो गये । अनेकों आदमी अपने घरों से गायब हो गये ,‘ पन्द्रह सेकेंड ’ विकी के पिता बोले ।
विकी कॉंप उठा एकाएक विकी को याद आया,‘ डैडी मंगल ग्रह वासियों ने हमारी सहायता करने का वचन दिया था मैं संदेष भेजने की कोषिष करता हॅंू ।’विकी ने पूरा ध्यान उस वृद्ध मुस्कराते व्यक्ति पर केंन्द्रित किया और चिल्लाया ,बचाओ हमें ’पॉंच सेकेंड तीन सेकेंड बचाओ बचाओ ’ और वह ष्शॉंत हो गया उसके चेहरे पर मुस्कराहट आ गई उसे लगा उसका संदेष पहुॅंच गया है ,‘ वे आ रहे हैं ’ अभी उसने कहा ही था कि उन्हें घंटी की आवाजें सुनाई दीं । वे अंधेरे आकाष में देवदूत की भांति प्रकट हुए उनका संगीत सब जगह था उनके आगे पीछे नीचे ऊपर। अब दुष्मन की याद कर उसे दया आई , वह पिंजरे में चूहे की भांति फस गया था । एकाएक संगीत एक तीखी चीत्कार में बदल गया और उस ध्वनि का रुख उन्होंने
ष्शुक्र यान की ओर मोड़ दिया उनके देखते देखते शुक्रग्रह का यान लाखों छोटे टुकडों में फट गया । आकाष साफ था। मंगल ग्रह के यान ऊपर
उठने लगे विकी के मस्तिष्क में संदेष आया,‘ पृथ्वी पर वापस जाओ , याद रखना हम तुम्हारे साथ हैं ।’ प्रो0 हरवंष ने यान का लीवर दबा दिया और वे पृथ्वी की ओर बढ़ने लगे ।