दुर्गादास राठौर
जोधपुर नरेश यशवंत सिंह जी को सूचना मिली कि उनकी एक ऊँटनी का वध एक किसान के लड़के ने कर दिया है। महाराजा ने किसान को पकड़ बुलाया। किसान महाराजा का क्रोध देख थर थर काॅपने लगा और अपने बारह वर्ष के बालक को आगे करके बोला महाराज अपराध इस बालक से हो गया है।
महाराज ने क्रोध से डाॅटकर लड़के से पूछा तुमने ऊँटनी को मारा। बालक की भवें सिकुड़ी और निर्भीकता से बोला,‘ हाँ महाराज मैने ऊँटनी को मारा पर क्या करता मैं अपने खेत की रक्षा कर रहा था। आपका ऊँटों का रखवाला खेत की तरफ से ऊँटनियाँ लाने लगा मैंने मना किया लेकिन चरवाहे ने ध्यान नही दिया। हूजुर अगर हमारा खेत नष्ट हो जाता तो हम खाते क्या? इसलिये जैसे ही ऊँटनी ने खेत में मुँह डाला मैने उसका सिर धड़ से अलग कर दिया यह देखकर दूसरी ऊँटनियाँ लेकर रक्षक आपके पास आ गया।’
महाराज ने बालक की ओर देखा उन्हें विश्वास नही हुआ कि इतना छोटा सा बालक ऊँटनी मार सकता है उन्होनें पूछा ,‘तुमने ऊँटनी मारी कैसे?’
बालक ने इधर उधर देखा एक परबालिया ऊँट सामने से जा रहा था। वह उस ऊँट के पास गया और कमर से तलवार खीचकर उसने ऐसा हाथ मारा कि ऊँट की गर्दन एक बार में ही कट गई। उसका सिर गिर पड़ा। महाराज बालक की वीरता और निर्भीकता से दंग रह गये उसे उन्होनें अपने पास रख लिया और उसे युद्ध की अस्त्र शस्त्र की और शास्त्रों की शिक्षा दिलवाई। यही बालक इतिहास प्रसिद्ध वीर दुर्गादास हुए जिन्होनें औरंगजेब से यशंवत सिंह की रानी और राजकुमार अजीत सिंह की रक्षा की।
जोधपुर नरेश यशवंत सिंह जी को सूचना मिली कि उनकी एक ऊँटनी का वध एक किसान के लड़के ने कर दिया है। महाराजा ने किसान को पकड़ बुलाया। किसान महाराजा का क्रोध देख थर थर काॅपने लगा और अपने बारह वर्ष के बालक को आगे करके बोला महाराज अपराध इस बालक से हो गया है।
महाराज ने क्रोध से डाॅटकर लड़के से पूछा तुमने ऊँटनी को मारा। बालक की भवें सिकुड़ी और निर्भीकता से बोला,‘ हाँ महाराज मैने ऊँटनी को मारा पर क्या करता मैं अपने खेत की रक्षा कर रहा था। आपका ऊँटों का रखवाला खेत की तरफ से ऊँटनियाँ लाने लगा मैंने मना किया लेकिन चरवाहे ने ध्यान नही दिया। हूजुर अगर हमारा खेत नष्ट हो जाता तो हम खाते क्या? इसलिये जैसे ही ऊँटनी ने खेत में मुँह डाला मैने उसका सिर धड़ से अलग कर दिया यह देखकर दूसरी ऊँटनियाँ लेकर रक्षक आपके पास आ गया।’
महाराज ने बालक की ओर देखा उन्हें विश्वास नही हुआ कि इतना छोटा सा बालक ऊँटनी मार सकता है उन्होनें पूछा ,‘तुमने ऊँटनी मारी कैसे?’
बालक ने इधर उधर देखा एक परबालिया ऊँट सामने से जा रहा था। वह उस ऊँट के पास गया और कमर से तलवार खीचकर उसने ऐसा हाथ मारा कि ऊँट की गर्दन एक बार में ही कट गई। उसका सिर गिर पड़ा। महाराज बालक की वीरता और निर्भीकता से दंग रह गये उसे उन्होनें अपने पास रख लिया और उसे युद्ध की अस्त्र शस्त्र की और शास्त्रों की शिक्षा दिलवाई। यही बालक इतिहास प्रसिद्ध वीर दुर्गादास हुए जिन्होनें औरंगजेब से यशंवत सिंह की रानी और राजकुमार अजीत सिंह की रक्षा की।
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