Monday, 8 September 2025

Do bhai

 दो भाई

बहुत समय पहले एक गाँव में दो भाई रहते थे। बड़े भाई का विवाह हो चुका था लेकिन छोटा भाई अभी कुँवारा था, तथा बहुत सीधा सादा भी था।

छोटा भाई ने खेत में ज्वार बोया था, लेकिन पूरे खेत में केवल एक ज्वार का पौधा उगा। यह पौधा खेत के बीचोंबीच था। उसे वह पौधा इतना सुंदर लगा कि वह पूरे जतन से उस पौधे की देखरेख करने लगा। पौधा जल्दी बड़ा हो गया और उसमें ज्चार का फूल एकदम बड़ा सा लगा। धीरे धीरे फूल में ज्वार लगने लगा। दाने बहुत बड़े बड़े थें लेकिन जैसे ही वह पकने लगा एक अदभुत चिड़िया आई और ज्वार को तोड़ कर ले गयी। सीधा सादा भाई हाथ हिलाता चिड़िया के पीछे भागा। भागते भागते वह बहुत दूर निकल आया धीरे धीरे रात हो गयी और चिड़िया ने दिखाई देना बंद कर दिया। अब छोटे भाई ने अपने चारों ओर देखा। वहाँ बड़े बड़े पहाड़ घने जंगल थे। चीते, शेर, भेड़िया गुरगुरा रहे थे। उसे एक विशाल वृक्ष दिखाई दिया, उस पर चढ़कर पत्तियों के बीच छिप कर बैठ गया।

पेड़ के नीचे कुछ ही देर बाद तीन मित्र चीता, भेड़िया और बंदर आकर एकत्रित हुए। चीते बोला, आज बहुत आराम महसूस हो रहा है। भाई बंदर कोई कहानी सुनाओं। बंदर बोला, कोई कहानी तो आती नहीं है हाँ एक मजेदार किस्सा सुना सकता हूँ। भेड़िया और चीता किस्सा सुनने केा तैयार हो गये तो बंदर ने किस्सा सुनाना शुरू किया।

दक्षिण पूर्व में करीब पचास मील दूर एक छोटा सा गाँव है। वहाँ एक लड़की को एक ऐसी बीमारी है जिसका इलाज तो बहुत सरल है लेकिन कोई जानता नहीं है। उसके पिता ने घोषणा की है कि जो भी इसका इलाज कर देगा उसकी शादी उस लड़की से कर दी जायेगी। यदि इस पेड़ की छाल खुरच कर उसकी तीन गालियाँ बना कर लड़की को खिला दीं। जाय तो वह ठीक हो जायेगी।

चीता और भेड़िया ने आह भरी काश हम आदमी होते तो शादी का कितना अच्छा अवसर था।छोटे भाई ने बैठे बैठे उस डाल पर में इतनी छाल उतार ली कि करीब तीन गोलियाँ बन जाय। तीनों जानवर कुछ देर तक और गपशप करते रहे फिर चले गये।

प्रातः होते ही छोटा भाई पेड़ से उतरा गोलियाँ लेकर गाँव की ओर चल दिया रास्ता पूछते पूछते गाँव पहुँचा। बीमार लड़की के घर पहुँच उसे गोली खिला दी। लड़की तुरंत अच्छी हो गयी। पिता ने तुरंत छोटे भाई की शादी उस लड़की से कर दी।

उधर बड़े भाई को छोटे भाई की कमी बहुत खल रही थी। क्योंकि वह घर के और खेत के सभी भारी काम छोटे भाई से करवाता था। बड़ा भाई पत्नी से बोला, छोटा न जाने कहाँ धूम रहा है उसे घर आकर काम धाम करना चाहिये। यह कहकर वह छोटे भाई को ढूँढ़ने निकला। चलते चलते रात हो गयी और वह भी उसी पेड़ के नीचे पहुँचा। जानवरों के डर से वह भी पेड़ पर छिप कर बैठ गया।

तीनों जानवर पहले दिन की तरह एकत्रित हुए। चीते ने कहा, बंदर भाई कोई किस्सा सुनाओ। बंदर बोला कल कोई पेड़ पर छिप कर हमारी बातें सुनकर धनवान बन गया, आज पहले देख लें कोई यहाँ छिपा तो नहीं है। बड़े भाई ने जब यह सुना तो डर से इतने जोर से कांपने लगा। कि पेड़ जोर जोर से हिलने लगा। बंदर तेजी से पेड़ पर चढ़ा और बड़े भाई को जमीन पर गिरा लिया और तीनों जानवर उस पर टूट पड़े और उसे मार कर खा गये।


Wednesday, 3 September 2025

Khoya uunt

 खोया ऊॅट

बीजापुर के महाराजा वीर सेन बहुत अधक बुद्विमान एंव कुशल शासक थे। उनके कुशल नेतृत्व मंे चार बुद्विमान मंत्रियों का बहुत हाथ था। परन्तु राजा को अपने ऊपर बहुत विश्वास था। वह कभी कभी अपनी बात क आगेे मंत्रियों की नहीं चलने देता था। एक बार उसने जनता पर चाहे अमीर हो गरीब एक महल बनवाने के लिये कर लगाने की कही। मंत्रियों ने स्पष्ट रूप से कहा यह जनता पर अत्याचार होगा। जैसा कि उन्हे आशा थी राजा अपनी इच्छा के खिलाफ बात सुनकर बहुत गुस्सा हुआ। राजा ने सोचा उसके महल को ये मंत्री लोग बनने नहीं देना चाहते हैं। उसने उन चारों को उसी क्षण देश निकाला दे दिया।

चारों मंत्रियों ने जन साधारण से कपडे पहने और शहर से बाहर चल दिये। लक्ष्यहीन चलते चलते वे एक विशाल बरगद के पेड़ के नीचे पहुंचे। वहां से चार रास्ते जाते थे पहले कि किसी एक पर चलें वे पेड़ के नीचे सुस्ताने के लिये बैठ गये। बैठे इधर उधर की बात कर रहे थे। बातों ही बातों मे इधर उधर ध्यान दिया तो लगा कि रात को इस स्थान पर बारिश हुई है और एक अकेला ऊंट उस रास्ते से गुजरा है चारों उस ऊंट के पदचिन्ह को देखकर ऊंट का वर्णन करने मंे लग गये। अभी वे इस विषय में बात ही कर रहे थे कि एक ऊंट वाला रोता चीखता आया । उसका ऊंट खो गया था उसने उन लोगो से पूछा कि क्या उन्हांेने उसका ऊंट देखा है ?

पहले मन्त्री ने कहा “ क्या तुम्हारा ऊंट बांये पैर से लंगडाता था”

“ हां हां हजूर वह लंगडाता था क्या आपने उसे देखा है ?”

तभी दूसरा मंत्री बोला,‘ मेरा ख्याल है वह केवल लंगडा ही नही था उसकी पूंछ भी नही थी।’

“हां बिलकुल वही है मेरा ऊंट उसके एक आंख भी नही हैं आप लोग बता नही रहे हैं कि वह कहां है तो जरूर आप लोगो ने उसे चुराया है”

अब चौथा बोला “ हम सच कह रहे हैं हमने उसे देखा तक नहीं है, चुराने की बात तो बहुत दूर रही हां एक बात बताना भाई वह बहुत कमजोर भी था”

“ हे भगवान “ ऊंट वाला बोला,‘ मै बिलकुल सही कह रहा हूॅ अवश्य आप लोगो ने मेरा ऊंट चुराया है मै राजा से शिकायत करूंगा।’

“ हम तुमसे सत्य कह रहे हैं ” प्रथम म़न्त्री ने कहा ,‘फिर कह रहे हैं हमने तुम्हारा ऊंट देखा भी नहीं है राजा से शिकायत करना चाहते है तो करो पर हम तुम्हारा ऊंट लौटाने मंे सहायता नहीं कर पायेंगे। इसमे समय बरबाद करोगे इससे अच्छा है अभी अधिक दूर नही होगा उसे खोजो। हम लोग ईमानदार भले आदमी हैं।

“ईमानदार भले आदमी ,‘ऊंटवाला चिल्लाया,‘ मैं तुम जैसे लोगो का खूब अच्छी तरह से जानता हूॅ जो अच्छी तरह से कपडे पहनकर जनता को लूटते हैं तुम्हीं लोगो ने ही मेरा ऊंट चुराया है ” वह रोता चिल्लाता राजा से शिकायत करने चला ,‘न्याय मुझे न्याय चाहिये।’

अभी वह अधिक दूर नहीं गया होगा कि उसे राजा अपने अंगरक्षको के साथ आता दिखाई दिया। न्याय न्याय! की मांग सुन वीरसेन रूक गये। ऊंट का मालिक परेशान था वह उलझन में यही निश्चत समझ बैठा कि वे ही ऊंट चोर हैं।

‘महाराज’ वह राजा के पैर पडते बोला “ मै एक गरीब ऊंट वाला हूॅ। अगर मेरा ऊंट खो गया तो मै भूखा मर जाऊंगा। हजूर ही मुझे बचा सकते हैं”।

‘रुको भाई “ राजा ने कहा मुझे बात तो बताओ ।”

ऊंट वाले ने कहा सब बात बताई और कहा कि चोरांे को दंड देकर मेरा ऊंट दिलवाइये।

“ इसमे परेशानी की क्या बात है चलो मुझे चारों चोरांे को दिखाओ मैं एक अपना अंगरक्षक  यहीं छोड देता हूॅ तुम घोडे पर चढ जाओ।

ऊंटवाला घोडे पर राजा को उसी बरगद के पेड के नीचे लाया जहां चारों म़ंत्री आराम से बैठ बाते कर रहे थे।

राजा को यह देखकर बडा आश्चर्य हुआ कि जिन्हे ऊंट बाला चोर बता रहा है वह उसके द्वारा निश्काषित मंत्री हैं। वे लोग ऐसा नही करेंगे यह राजा को विश्वास था। वह बिना किसी पूछ ताछ के भी यही निर्णय देता लेकिन ऐसा करना उचित नहीं समझा क्योंकि इससे ऊंट वाले को सतोष नहीं होता इसलिये उसने चारों से ऊंट के लिये पूछा।

“ चुराने की तो दूर रही हमने उसे देखा तक नहीं है।’ चारों ने कहा

उनके विरूद्व की गई शिकायत के हिसाब से यह आश्चर्य जनक बात थी। 

‘तब तुम्हें यह कैसे मालूम हुआ कि वह लंगडा था ?’ राजा ने पूछा।

“ बहुत साधारण बात है महाराज प्रथम मन्त्री ने कहा यह तो उसके गीली मिटटी पर चिन्हों को देखकर कोई  भी कह सकता है। आप भी देखिये बायें खुर को पूरे दबाब से नहीं रखा गया है”

राजा और अंगरक्षकों ने देखा और सन्तुष्ट हो गये “ यह तो ठीक है लेकिन यह कैसे मालूम हुआ कि उसके पूंछ नही थी क्या पद चिन्हांे से यह बात भी मालूम की थी क्या?’

“ नहीं हजूर “ दूसरा मंत्री बोला यह बात पद चन्हांे से नही बल्कि जांेको को देखकर कहा था जो जमीन पर पड़ी है” राजा ने देखा अनेको जोंकंे  रक्त पीकर जमीन पर पडी हुई है‘ अगर ऊॅट के पूॅछ होती तो वे इतना खून पी पाती उससे पहले ही वह उन्हे पूंछ से झाड देता ।’

“ अच्छा कैसे कहा की उसके आंख नही थी?”

 तीसरे मन्त्री ने स्पष्ट किया कि उसकी दांयी आंख नहीं थी” राजा ने चौक हर पूछा “ वह कैेसे? ’ 

‘हुजूर यह तो कोई भी घास को देखकर कह सकता है कि बायीं तरफ घास काफी थी फिर भी ऊॅट ने दाहिनी तरफ से ही घास खायी है।”

राजा और ऊॅट बाला सब सन्तुष्ट हो गये  । चौथे मंत्री ने ऊॅट के गोबर को देखकर बताया था कि वह कमजोर है अब उनकी निर्दाेषता मे केाई सन्देह नही रह गया था। ‘आप लोगों की बुद्वि देखकर ’,राजा ने कहा ,‘मेरी आंखें खुल गई है आप लोग वस्तु को अच्छी तरह से देखकर परखना जानते हैं दिमाग को खुला रखते हैं यह मैं इस छोटी सी घटना ही से जान गया हॅू ंआप लोगो की सलाह कि जनता पर अधिक कर नहीं लगाना चाहिये मै आदर करता हूॅैै। क्या आप लोग अब मेरे साथ और फिर से अपना पद सम्भालें चारों मन्त्री राजमहल मे लौट आये। ऊॅट वाले को एक ऊॅट देकर उसे विदा किया।


Monday, 1 September 2025

do bhai

 दो भाई


बहुत समय पहल एक गाँव में दो भाई रहते थे। बड़े भाई  का विवाह हो चुका था लेकिन छोटा भाई अभी कुँवारा था बहुत सीधा सादा भी था।

छोटे भाई ने खेत में ज्वार बोया लेकिन पूरे खेत में केवल एक ज्वार का पौधा हुआ। यह पौधा खेत के बीचों-बीच था। उसे वह पौधा इतना सुंदर लगा कि वह पूरे जतन से उस पौधे को देख-भाल करने लगा। पौधा जल्दी ही बड़ा हो गया और उसमें ज्वार का फूल एकदम बड़ा सा लगा। धीरे-धीरे फूल में ज्वार लगने लगे। दाने बहुत बड़े-बड़े थे। लेेकिन जैसे ही वह पकने लगा एक अद्भुत चिड़िया आईं और ज्वार को तोड़ ले गई। सीधा सादा भाई हाथ हिलाता चिड़िया के पीछे भागा। भागते-भागते वह बहुत दूर निकल आया। धीरे धीरे रात हो गई और चिड़िया ने दिखाई देना बंद कर दिया। अब छोटे भाई ने अपने चारों ओर देखा। वहाँ बड़े-बड़े पहाड़ घने जंगल थे चीते, शेर, भेड़िया गुरगुरा रहे थे। उसे एक विशाल वृक्ष दिखाई दिया उस पर चढ़कर पत्तियों के बीच छिप कर बैठ गया। 

पेड़ के नीचे कुछ ही देर बाद तीन मित्र, चीता, भेड़िया और बंदर आकर एकत्रित हुए। चीता बोला,‘ आज बहुत आराम महसूस हो रहा है। भाई बंदर कोई कहानी सुनाओ’, बंदर बोला, ‘कोई कहानी तो आती नहीं है हाँ एक मजेदार किस्सा सुना सकता हूँ।’ भेड़िया और चीता किस्सा सुनने को तैयार हो गये हो बंदर ने कहना शुरू किया, 

‘दक्षिण पूर्व में करीब पचास मील दूर एक छोटा-सा गाँव हैं। वहाँ एक लड़की को कोई लाइलाज बीमारी लग गयी है। कोई भी उसे ठीक नहीं कर पा रहा है। उसके पिता ने घोषणा की है कि जो भी उसे ठीक कर देगा उसकी शादी उस लड़की से कर दूँगा। जब कि इसका इलाज बहुत सरल है, इस पेड़ की डाल की छाल को खुरचकर उसकी तीन गोलियाँ बनाकर उसे खिला दे तो वह ठीक हो जायेगी।’

चीता और भेड़िया ने आह भरी, काश, ‘हम आदमी होते तो शादी का कितना अच्छा अवसर था।’ छोेटे भाई ने बैठे-बैठे उस डाल पर से इतनी छाल उतार ली कि करीब तीन गोलियाँ बन जाय। तीनों जानवर कुछ देर तक और गपशप करते रहे और फिर चलंे गये।

प्रातः होते ही छेाटा भाई पेड़ से उतरा गोलियाँ लेकर गाँव की आरे चल दिया। रास्ता पूछता-पूछता वह गाँव में पहुँचा जहाँ वह बीमार लड़की थी। छोटे भाई ने लड़की को गोलियाँ खिलाई। लड़की तुरंत अच्छी हो गई। पिता ने धूमधाम से छोटे भाई की शादी लड़की से कर दी।

उधर बड़े भाई को छोटे भाई की कमी अखर रही थी क्योंकि वह घर की और खेत के सभी भरी काम छोटे भाई से करवाता था। बड़ा भाई पत्नी से बोला,‘ छोटा न जाने कहाँ घूम रहा है उसे घर आकर ंकाम-धाम करना चहिए।’ यह कहकर वह छोटे भाई को ढूँढ़ने निकला। चलते चलते रात हो गई और वह भी उसी पेड़ के नीचे पहुँचा। जानवरों के डर से वह भी पेड़ पर छिप कर बैठ गया।

तीनों जानवर पहले दिन की तरह एकत्रित हुए। चीता बोला, ‘बंदर भाई कोई किस्सा कहानी सुनाओ’। बंदर बोला, ‘कल कोई पेड़ पर छिपा बैठा था उसने हमारी बातें सुन ली थी और धनवान बन गया आज पहले देख ले कोई यहाँ छिपा तो नहीं है।’ 

बडे़ भाई ने जब यह सुना तो डर से इतने जोर से कांपने लगा कि पेड़ जोर-जोर से हिलने लगा। बंदर तेजी से पेड़ पर चढ़ा और बड़े भाई को जमीन पर गिरा लिया और तीनों जानवर उस पर टूट पड़े उसे मार कर खा गये।