Wednesday, 3 September 2025

Khoya uunt

 खोया ऊॅट

बीजापुर के महाराजा वीर सेन बहुत अधक बुद्विमान एंव कुशल शासक थे। उनके कुशल नेतृत्व मंे चार बुद्विमान मंत्रियों का बहुत हाथ था। परन्तु राजा को अपने ऊपर बहुत विश्वास था। वह कभी कभी अपनी बात क आगेे मंत्रियों की नहीं चलने देता था। एक बार उसने जनता पर चाहे अमीर हो गरीब एक महल बनवाने के लिये कर लगाने की कही। मंत्रियों ने स्पष्ट रूप से कहा यह जनता पर अत्याचार होगा। जैसा कि उन्हे आशा थी राजा अपनी इच्छा के खिलाफ बात सुनकर बहुत गुस्सा हुआ। राजा ने सोचा उसके महल को ये मंत्री लोग बनने नहीं देना चाहते हैं। उसने उन चारों को उसी क्षण देश निकाला दे दिया।

चारों मंत्रियों ने जन साधारण से कपडे पहने और शहर से बाहर चल दिये। लक्ष्यहीन चलते चलते वे एक विशाल बरगद के पेड़ के नीचे पहुंचे। वहां से चार रास्ते जाते थे पहले कि किसी एक पर चलें वे पेड़ के नीचे सुस्ताने के लिये बैठ गये। बैठे इधर उधर की बात कर रहे थे। बातों ही बातों मे इधर उधर ध्यान दिया तो लगा कि रात को इस स्थान पर बारिश हुई है और एक अकेला ऊंट उस रास्ते से गुजरा है चारों उस ऊंट के पदचिन्ह को देखकर ऊंट का वर्णन करने मंे लग गये। अभी वे इस विषय में बात ही कर रहे थे कि एक ऊंट वाला रोता चीखता आया । उसका ऊंट खो गया था उसने उन लोगो से पूछा कि क्या उन्हांेने उसका ऊंट देखा है ?

पहले मन्त्री ने कहा “ क्या तुम्हारा ऊंट बांये पैर से लंगडाता था”

“ हां हां हजूर वह लंगडाता था क्या आपने उसे देखा है ?”

तभी दूसरा मंत्री बोला,‘ मेरा ख्याल है वह केवल लंगडा ही नही था उसकी पूंछ भी नही थी।’

“हां बिलकुल वही है मेरा ऊंट उसके एक आंख भी नही हैं आप लोग बता नही रहे हैं कि वह कहां है तो जरूर आप लोगो ने उसे चुराया है”

अब चौथा बोला “ हम सच कह रहे हैं हमने उसे देखा तक नहीं है, चुराने की बात तो बहुत दूर रही हां एक बात बताना भाई वह बहुत कमजोर भी था”

“ हे भगवान “ ऊंट वाला बोला,‘ मै बिलकुल सही कह रहा हूॅ अवश्य आप लोगो ने मेरा ऊंट चुराया है मै राजा से शिकायत करूंगा।’

“ हम तुमसे सत्य कह रहे हैं ” प्रथम म़न्त्री ने कहा ,‘फिर कह रहे हैं हमने तुम्हारा ऊंट देखा भी नहीं है राजा से शिकायत करना चाहते है तो करो पर हम तुम्हारा ऊंट लौटाने मंे सहायता नहीं कर पायेंगे। इसमे समय बरबाद करोगे इससे अच्छा है अभी अधिक दूर नही होगा उसे खोजो। हम लोग ईमानदार भले आदमी हैं।

“ईमानदार भले आदमी ,‘ऊंटवाला चिल्लाया,‘ मैं तुम जैसे लोगो का खूब अच्छी तरह से जानता हूॅ जो अच्छी तरह से कपडे पहनकर जनता को लूटते हैं तुम्हीं लोगो ने ही मेरा ऊंट चुराया है ” वह रोता चिल्लाता राजा से शिकायत करने चला ,‘न्याय मुझे न्याय चाहिये।’

अभी वह अधिक दूर नहीं गया होगा कि उसे राजा अपने अंगरक्षको के साथ आता दिखाई दिया। न्याय न्याय! की मांग सुन वीरसेन रूक गये। ऊंट का मालिक परेशान था वह उलझन में यही निश्चत समझ बैठा कि वे ही ऊंट चोर हैं।

‘महाराज’ वह राजा के पैर पडते बोला “ मै एक गरीब ऊंट वाला हूॅ। अगर मेरा ऊंट खो गया तो मै भूखा मर जाऊंगा। हजूर ही मुझे बचा सकते हैं”।

‘रुको भाई “ राजा ने कहा मुझे बात तो बताओ ।”

ऊंट वाले ने कहा सब बात बताई और कहा कि चोरांे को दंड देकर मेरा ऊंट दिलवाइये।

“ इसमे परेशानी की क्या बात है चलो मुझे चारों चोरांे को दिखाओ मैं एक अपना अंगरक्षक  यहीं छोड देता हूॅ तुम घोडे पर चढ जाओ।

ऊंटवाला घोडे पर राजा को उसी बरगद के पेड के नीचे लाया जहां चारों म़ंत्री आराम से बैठ बाते कर रहे थे।

राजा को यह देखकर बडा आश्चर्य हुआ कि जिन्हे ऊंट बाला चोर बता रहा है वह उसके द्वारा निश्काषित मंत्री हैं। वे लोग ऐसा नही करेंगे यह राजा को विश्वास था। वह बिना किसी पूछ ताछ के भी यही निर्णय देता लेकिन ऐसा करना उचित नहीं समझा क्योंकि इससे ऊंट वाले को सतोष नहीं होता इसलिये उसने चारों से ऊंट के लिये पूछा।

“ चुराने की तो दूर रही हमने उसे देखा तक नहीं है।’ चारों ने कहा

उनके विरूद्व की गई शिकायत के हिसाब से यह आश्चर्य जनक बात थी। 

‘तब तुम्हें यह कैसे मालूम हुआ कि वह लंगडा था ?’ राजा ने पूछा।

“ बहुत साधारण बात है महाराज प्रथम मन्त्री ने कहा यह तो उसके गीली मिटटी पर चिन्हों को देखकर कोई  भी कह सकता है। आप भी देखिये बायें खुर को पूरे दबाब से नहीं रखा गया है”

राजा और अंगरक्षकों ने देखा और सन्तुष्ट हो गये “ यह तो ठीक है लेकिन यह कैसे मालूम हुआ कि उसके पूंछ नही थी क्या पद चिन्हांे से यह बात भी मालूम की थी क्या?’

“ नहीं हजूर “ दूसरा मंत्री बोला यह बात पद चन्हांे से नही बल्कि जांेको को देखकर कहा था जो जमीन पर पड़ी है” राजा ने देखा अनेको जोंकंे  रक्त पीकर जमीन पर पडी हुई है‘ अगर ऊॅट के पूॅछ होती तो वे इतना खून पी पाती उससे पहले ही वह उन्हे पूंछ से झाड देता ।’

“ अच्छा कैसे कहा की उसके आंख नही थी?”

 तीसरे मन्त्री ने स्पष्ट किया कि उसकी दांयी आंख नहीं थी” राजा ने चौक हर पूछा “ वह कैेसे? ’ 

‘हुजूर यह तो कोई भी घास को देखकर कह सकता है कि बायीं तरफ घास काफी थी फिर भी ऊॅट ने दाहिनी तरफ से ही घास खायी है।”

राजा और ऊॅट बाला सब सन्तुष्ट हो गये  । चौथे मंत्री ने ऊॅट के गोबर को देखकर बताया था कि वह कमजोर है अब उनकी निर्दाेषता मे केाई सन्देह नही रह गया था। ‘आप लोगों की बुद्वि देखकर ’,राजा ने कहा ,‘मेरी आंखें खुल गई है आप लोग वस्तु को अच्छी तरह से देखकर परखना जानते हैं दिमाग को खुला रखते हैं यह मैं इस छोटी सी घटना ही से जान गया हॅू ंआप लोगो की सलाह कि जनता पर अधिक कर नहीं लगाना चाहिये मै आदर करता हूॅैै। क्या आप लोग अब मेरे साथ और फिर से अपना पद सम्भालें चारों मन्त्री राजमहल मे लौट आये। ऊॅट वाले को एक ऊॅट देकर उसे विदा किया।


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