Monday, 7 September 2026

bal kahani medhak

 मेंढक

बहुत पुरानी बात है किसी गाँव में एक मछुआरा रहता था। जिस स्थान से वह मछलियाँ पकड़ता था वहाँ पर दिन पर दिन मछलियाँ कम थी।

वह मछलियाँ पकड़ने में बहुत चतुर था लेकिन न जाने क्या हुआ कि दिन व दिन उसके जाल में मछलियाँ फंसना कम होती जा रही थी उसने नये तरह का चारा डालकर देखा नई जगह जाल डाला। यह देखकर वह आश्चर्य में पड़ गया कि धीरे धीरे मछलियों के साथ साथ झील का पानी भी कम होता जा रहा था। एक दिन दोपहर में झील की तली दिखने लगी और एक बड़ा सा मेंढक दिखाई दिया और वह मुछआरे से बोला मैं तुम्हारे साथ तुम्हारे घर में रहना चाहता हूँ यदि तुमने मुझे अपने साथ रख लिया तो मैं तुम्हारे भाग्य बदल दूँगा, पर मछुआरा एक मेंढक को बोलते देख घबड़ा गया और जल्दी से वहाँ से चला गया।

लेकिन मेंढक ने दूसरे दिन मछुआरे के घर का दरवाजा खटखटाया। मछुआरे की पत्नी पति के मुँह से मेंढक के विषया में सुन तो चुकी ही थी उसने मेंढक का आदर सत्कार किया उसके सोने के लिये बिस्तर बिछाया उसे भोजन दिया। मछुआरा दंपत्ति निसंतान थे। मछुआरे की पत्नी ने सोचा कि वह मेंढक को पाल लेगी। मेंढक का आकार दिन प्रति दिन बढ़ने लगा और एक लड़के के बराबर हो गया।

मछुआरे के घर के पास एक बहुत अमीर व्यापारी रहता था उसके तीन लड़कियाँ थीं एक दिन मेंढक मछुआरे से बोला कि वह उन तीनों में से किसी एक से शादी करेगा। मछुआरा घबड़ा गया। यह कैसी बात, हम तो बहुत गरीब है और आप से तुम मनुष्य भी नहीं हो।

मैं ऊँच नीच नहीं मानता मेंढक बोला माता पिता भले ही मना करें पर कोई न कोई पुत्री शादी के लिये अवश्य तैयार हो जायेगी। आप वहाँ जाओ और जो भी उत्तर वहां से मिले लेकर आइये। 

मछुआरे की पत्नी हारकर अमीर की पत्नी के पास गई और अपने मेंढक पुत्र की इच्छा कह सुनाई सुनकर अमीर की पत्नी आग बबूला हो गई और मछुआरे की पत्नी को नौकरों से धक्के देकर निकलवा दिया।

तुम्हारा अपमान किया इसका बड़ा दुःख है लेकिन चिंता मत करो देखो क्या होता है। बाहर जाकर एक बाज पकड़ लिया उस रात अपने पैरों में जल हुई लालटेन बांधी बाज के पैरों में एक डोरी बांध अमीर के घर के बाहर के पेड़ पर पहुँच गया फिर उसने बाज को छोड़ दिया। बाज अमीर के घर के चारों ओर चक्कर काटने लगा। स्वयं ऊँची आवाज में बोला, इस घर का मालिक मेरी बात ध्यान से सुने मैं स्वर्ग से आया दूत हूँ आज तुमने एक शादी का आमंत्रण ठुकराया है। उस प्रस्ताव पर फिर से ध्यान दो, अगर तुमने ध्यान नहीं दिया तो तुम्हारे बेटे-बेटियों का हश्र बहुत बुरा होगा।

आकाश से आती इन आवाजों से घबड़ा कर घर वालों ने खिड़की खोली ऊपर देखा तो एक टिमटिमाती रोशनी के चारों ओर चक्कर काटते देखां व्यापारी खौफ से डर गया और उसने आकाश की ओर हाथ उठा कर घुटने टेक दिये और एक लड़का को विवाह मेंढक से करने के लिये तैयार हो गया।

दूसरे दिनप व्यापारी मेंढक के घर आया और मछुआरे की पत्नी से माफी मांगते हुए मेंढक को अपना दामाद बनाने की आज्ञा मांगी। 

वहाँ से लौटकर व्यापारी ने अपनी बड़ी पुत्री से मेढक से विवाह करने के लिये कहा लेकिन वह कान पर हाथ रखकर डरकर वहाँ से भाग गई। तब व्यापारी ने अपनी दूसरी पुत्री को बुलाया लेकिन वह भी वहाँ से इस प्रस्ताव से घबड़ा कर भाग गई। तब उसने अपनी सबसे छोटी पुत्री को बुलाया और कहा अगर वह भी मेंढक से विवाह करने के लिये तैयार न हुई तो सारा घर तबाह हो जायेगा क्योंकि आकाशवाणी यही हुई थी एक न एक पुत्री को विवाह करना ही है।

सबसे छोटी पुत्री बिना किसी हिचकिचाहट मेंढक से शादी के लिये तैयार हो गई दूसरे दिन ही विवाह निश्चित हुआ दूर दूर से इस बेमेल विवाह को देखने के लिये लोग एकत्रित हो गये विवाह के कुछ समय बाद मेढक ने अपनी पत्नी से कैंची लाने के लिए कहा, कैंची लाने पर अपनी पीठ की खाल काटने के लिये कहा उसकी पत्नी ने जैसे ही पीठ की खाल काटी की खाल के अंदर से एक बहुत ही सुंदर युवक बाहर आया।

जिसे देख सब आश्चर्यचकित रह गये। युवक ने हवा में हाथ हिलाय और तरह तरह के गहने वस्त्र दुल्हन के लिये आ गये तथा मेहमानो के सामने भोजन थाल आ गये। सबके आनन्द पूर्वक भोजन करने के पश्चात उसने फिर हाथ दिलाया और मछुआरे की झोपड़ी के स्थान पर सुंदर महल तैयार हो गया। जब वह अपने माँ बाप और पत्नी को लेकर महल में घुसा व्यापारी की हर्ष से अंगदू मैं आंसू आ गये लेकिन दोनों बहनें ईर्ष्या और दुःख से भर गई अब पछताने से क्या होता।


No comments:

Post a Comment