हवा नहीं तुम दिखती हो
परमुझकों आकर छू लेती हो
मैं भी तुमको छूना चाहूं
दिखने में कैसी लगती हो
मेरी चीजों को ले जाती
ना जाने कब आ जाती हो
कभी कभी धीरे से बहती
आंधी बन छा जाती हो
छप्पर कपड़े अपने संग ले
तेजी से उड़ जाती हो
छुपन छुपाई मुझसे खेलो
तुम ही मुझे पकड़ पाती हो
पर जब जब तुम आ जाती हो
मुझको अच्छा लगता है
ऐसा लगता बाहों में भर
कोई संग संग चलता है।
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