Friday, 21 October 2016

आलूराजा

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 हरी हरी है झालर वाली
टोपी तुर्रेदार
बैंगन राजा ने बुलवाया
सब्जी का दरबार

आलू आया कटहल आया
और लुढ़कता कद्दू आया
लगा पाउडर टिंडा आया
तोरी ने सिर फूल सजाया।

नया नया सिलवाकर लंहगा
पहनके मूली आई
सैट कराके बालों को
गाजर है शरमाई।

भिंडी, ककड़ी, पत्तागोभी
नहा नहा कर आये
मटर, टमाटर, पालक, मैथी
बच्चों के संग आये।

गोभी फूलों का गुच्छा
सिर पर धर कर लाया
पत्ता गोभी ने पत्तों को
मैक्सी में लगवाया

अपने अपने गुण बतलाए
अपना स्वाद बताया
नाज किसी को अपने रंग पर
कोई कद पर था इठलाया

हंसा जोर से आलू बोला
यह तो है सब मेरी ही माया
गाजर, गोभी, मटर, टमाटर
सबने अपने साथ मिलाया

हूँ भद्दा सा बेढब भूग
पर सबको अच्छा लगता हूँ
अच्छा लगना ही जीवन है
बस इतना ही कहता हूँ

जोर जोर से ताली बजाकर
राजा आलू को ही बनाया
बैंगन ने आलू राजा को
पत्तों का था मुकुट पहनाया



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