जब माली को आते देखा
जब माली को देखा आते
पौधे खुशी मनाते
पहले दिन के अपने
सुख दुख हैं बतलाते
तितली आई भंवरा आया
मकड़ी ने है जाल लगाया
कुछ सुंडी ने पत्ते खाये
अधिक धूप से कुछ मुरझाये
पीले पत्ते टूट गये हैं
कुछ डाली पर छूट गये हैं
माली ने उनको सहलाया
पानी उनको खूब पिलाया
सूखा पत्ता दूर हटाया
फव्वारे से खूअ नहलाया
जरा देर में लगे किलकने
झूम झूम कर लगे चहकने
माली काका कल भी आना
कल छोटी सी डलिया लाना
फूलों का देंगे उपहार
हम तुमको करते हैं प्यार।
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