जादुई देश
बसंता की सुनहरी धूप ढलती जा रही थी बच्चे एक एक कर लॉन में इकट्ठे होने लगे।
गहरी भूरी एक इकहर बदन और लम्बे कद वाला सा आदमी ने फाइलो और कागजो के ढेर से सिर ऊपर उठाया। आंखे बेहद शांत थी वह सब बच्चों को अच्छी तरह से पहचानता था। उसके अपने दो बच्चो के साथ मोहल्ले पड़ोस के सब बच्चे वहाँ मौजूद नजर आ रहा था। अधिकतर यही होता था।
अगर भीड़ ऐसी ही बढ़ती रही तो मुझे एक बड़े घर की खोज करनी पड़ेगी निगाहे कमरे में चारों ओर घूम गई घर कमरा घिरा घिरा और छोटा था।
बड़े कमरे की तरफ से उसकी पत्नी की पदचाप सुनाई थी। उसके चेहरे पर अपराधी के से भाव छा गया। बड़ा घर जरूर लेना पड़ेगा। उसके खुद के चारों बच्चे बड़े होते जा रहे हैं। पहले वह कितना भाग्यवान था कि सब खर्चे आराम से बर्दाश्त कर लेता था।
असने लैम्प की रोशनी कुछ धीमी कर दी। उसकी पत्नी गाड कमरे में आई’ फैक तुम्हारे वफादार सुनने वाले आ गये है। उसके कथन में कड़वाहट स्पष्ट झलक रही थी।
वह मुस्कराया कम से कम बच्चों के बीच तो मैं पूरी तरह से सफल हूँ।
ऐसा नहीं फ्रैक वह शांति से बोली तुम्हारी नई पत्रिका भी सफल रहेगी। हो सकता है लेकिन तब तक आने बिना भुगतान किये बलो के ढेर की ओर देखा अगर जब तक पत्रिका चले तब तक कोई और जरिया आमदनी का हो जाता।
ऐसा कर सकते हो भाड कुसी खिसका कर फ्रैक के समीप बैठते हुए बोला, शाम को खाना खा कर तुम कुद काम घर पर ही क्यो नहीं कर लेते?
कहते कहते उसे रुक जाना पड़ा। क्यों कि लॉन में से जोर से खिलखिलाने की आवाज आई दोनों उधर ही देखने लग माड आह गरती उठ गई नही मैं जानती हूँ यह नहीं हो पायेगा।
फ्रैंक ने बेचैनी से माड की ओर देखा वह खिड़की के पस गई और पर्दा एक ओर खिसका दिया। बच्चे अब घर की ओर बढ़ रहे थे। उनकी आवाजे सुनाई पड़ने लगी थी बातो में उत्साह था।
मैं जानता हूँ कि तुम सोचती हो कि मैं इन बच्चों के लिये ताने बाने बुनने में बहुत समय जाया करता हूँ। फ्रैंक दो बच्चे तुम ही कहती हो इस समय को कुछ काम कर उपयोग में ला सकता हूँ कुछ भी माड उसके चेहरे की ओर देख उसकी बात सुन आह भरते भी मुस्कर उठी फ्रैंक कहता गया आज मैं उन्हें अंदर नही आने दूँगा। बहुत समय बरवाद होता है इतने भोर बिलो का भुगतान आखिर कैसे करूँगी? वह कागजों को देखकर कसमसाया।
बाहर से स्वीटी की उत्साह भरी आवाज आ रही थी मालुम नही आज रात को कहानी में क्या होगा दरवाजे के बाहर जूतों की खटखटाहट आ रही थी फ्रैंक बेचैनी से कुर्सी पर पहलू बदल रहा था उसे बिलों की चिंता अधिक सवार थी।
गाड कुछ क्षण उसे देखती रही फिर खिलखिला पड़ी खिड़की से हट करउसने कसीदा हााि में उठाया और बोली, फ्रैंक उन्हें अंदर आ जाने दो नहीं तो कल रात तक मैं तुम्हें चैन पड़ेगा और न इन बच्चों को।
दस क्षण बाद ही कमरा बच्चों की आवाजों से भर गया। फ्रैंक ने एक के बाद एक का अभिवादन किया। उनकी खुशियों के बीच वह बिल और आंकडत्रे सब भूल गया।
हैलो मार्था और बाबी आना ऐलन बहुत अच्छा बहुत अच्छा! वाह! वाह! बिलकुल नया रिबन? अरे वाह यह कौन है स्वीटी? तुम्हारा चचेरा भाई। मुझे बाहर एक नई आवाज भी सुनाई दी थी
क्या आप हमारे लिये कहानी पड़ेंगे स्वीटी के चचेरे भाई ने शर्माते हुए पूछा, बच्चे फर्श पर बैठने में व्यस्त थे वो कहानियाँ पढ़ते नहीं सुनाते है स्वीटी ने कहा, अब जल्दी से बैठ जाओ।
मै। पढ़ नहीं सकता, फ्रैंक ने बताया उसने जोर की अंगड़ाई ली और बच्चे के साथ फर्श पर आ बैठा, ये कहानियाँ किताबो में नही लिखी है ये तो मेरे दिमाग में लिखी हुई है।
अपनी लम्बी टांगो को सिकोड़ते हुए वह मुस्कराया, अच्छा बताओ बच्चों मैंने कल कहाँ पर छोड़ा था?
डॉरोथी को स्केयर को मक्के के खेत में मिला जल्दी से स्वीटी ने कहा और तब...
हाँ तब वे दोनों माणिक देश दिजाड को देखने चल दिये दूसरे बच्चे ने जोड़ा
बिलकुल ठीक मुझे याद आ गया फ्रैंक ने कहा, कमरा कहानी सुनने के लिये बिलकुल शांत हो गया। फ्रैंक का दिमाग बिना यह जाने इधर उधर घूमने लगा।
मुझे यह सब कितना अच्छा लगता है। काश मैं कहानियाँ सुनाकर ही कुछ रुपये कमा सकता। अरे हाँ यह सब समस्या सुलझ जायेगी। कितना मजा रहेगा अगर वह डारोथी और विजाडे के जादुई देश को लेकर कहानी लिख चले। नहीं यह कैसे हो पायेगा मैं अभी तक इस कल्पित देश का नाम तक नही सोच पाया हूँ।
सुनाइये न! सुनाइये ना बच्चे चिल्लाये फ्रैंक हड़बड़ा उठा अरे वह कहाँ सोचने लगा हाँ ठीक, वह बोला अब स्केयर को और टिनबुडमैन
अंकल ड्डपया ये बताइये न ये दोनों कहाँ रहते थे स्वीटी गिड़ड़िाया।
मुझे इस कल्पित देश का नाम सोचना ही पड़ेगा। उसकी आंखे स्वीटी के प्रश्न का उत्तर देने के लिये कमरे में इधर उधर घूमने लगी वे कहाँ रहते थे वह बुदबुदाया।
उसने पुराने ढंग के पियानों की ओर देखा फटे कॉलीन स्टोव उंहुं कुछ नहीं उसकी निगाहे फाइलों के कैबीनेट पर पड़ी वाह यह ठीक रहेगा। वह बच्चों से बोला वो आगे के अदुभुत प्रदेश में रहते थे।
ओज बच्चे धीमे से गुजारे पापा यह ऑज कहाँ है, फ्रैंक के पुत्र कैनेथ ने कहा,
अरे बेटा बहुत बहुत दूर फ्रैंक ने कहा हम लोगों में से अब तक वहाँ कोई नही जा सका है इसके ओर भयानक रेगिस्तान है और एक ओर दरवाजे की घंटी बजीह बच्चे झुझला गये उनके घर से बुलावा आ गया था वह शाम खत्म हो गई।
आखिरी बच्चे को गुडवाय कहा फ्रैंकक्लेर में आया तो उसमें एक नया उत्साह भरा हुआ था। अब वह उस प्रदेश की कल्पना उसके दिमाग में साकार हो उठी थी अब वह एक किताब लिख डालेगा। वह जल्दी से मेज पर बैठ एक लिफाफे के पीछे लाइन घसीटने लगा।
फ्रैंक मॉड ने कमरे में से निकलने का बहाना सा बनाते कहा, ‘यह तुम्हें ओज शब्द कहा से मिला।’
हंसते हुए उसने फाइल की केबिनेट की ओर इशारा कर दिया। पहले दराज के सामने लिखा था ए से एन और नीचे की दराज पर ओ से जैड तक
मुझे यह नाम नीचे की दराज से मिला। मैं इस प्रदेश पर एक कहानी लिख रहा हूँ एक पूरी किताब उसने उत्साह से कहा। वह लिफाफे पर झुक गया। वहाँ उसने कई शीर्षक लिख डाले थे डारायी और उसके मित्र स्केयरकेा के अनुभव? मानिक देशो कुछ सोचने पर एक शीर्षक और लिख लिया।
कुछ क्षण लिखने के बाद उन सब शीर्षको को देखता रहा। धीरे धीरे उसने आज का अदभुत विजाइ शीर्षक के चारों ओर घेरा बना दिया।
रचित लेगेन फ्रैंक वॉम प्रसिध्द ओज पुस्तकांे के निर्माता की कहानी।
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