Monday, 30 June 2025

kahani ek aur bansurivala

 एक और बाँसुरीवाला

किसी शहर में एक किसान रहता था, उसके तीन पत्नियाँ थीं, बड़ी पत्नी से एक पुत्र जै था अैर दो पत्नियाँ निसंतान थी। पिता पुत्र को बहुत प्यार करता था लेकिन दोनों सौतेली माताओं को वह एक आंख नहीं भाता था। वे उसके लिये कोई न कोई परेशानी पैदा करती रहती थी। एक दिन उसकी माँ ने पति से कहा, तुम किसी तरह लड़के को यहाँ से हटा दो, इसे कहीं काम पर लगा दो नहीं तो इसकी जान मुश्किल में पड़ जायेगी।

पति ने कहा,‘ अभी वह बच्चा है, एक साल और पास रहने दो फिर उसे कहीं काम पर भेज दूंगा। नहीं तो इसे तो खेत पर काम करने के लिये भेज दूंगा और खेत के मजदूरों को घर के काम के लिये भेज दँूगा। एक साल बाद किसान ने लड़के को भेड़ें चराने के लिये भेजना प्रारम्भ कर दिया। पहले ही दिन उसे पोटली में खाना बांध कर दे दिया, वह गाता हुआ भेड़ों को चरते देखते एक पहाड़ी पर जा बैठा। तभी वहाँ एक वृद्ध आया और बोला,‘ बेटा भगवान तुम्हारा भला करें।’

‘बैठो बाबा, ’लड़का बोला,।

‘मैं बहुत भूखा हूँ ’वृद्ध ने कहा, ‘अगर तुम्हारे पास थोड़ा सा खाना हो तो मुझे खाना दे दो।’

‘हाँ बाबा, खाना तो है पर थोड़ा ही है,’ यह कहते हुए उसने खाना दे दिया।

वृद्ध ने तृप्ति से खाना खाया और बोला, ‘तुम दयालु लड़के हो तुमने अपना खाना मुझे दिया, इसलिये मैं तुम्हें तीन चीजें देना चाहूँगा। तुम बताओ तुम्हें क्या चाहिये।’

‘एक चिड़िया मारने के लिये धनुष होता तो अच्छा था ’लड़के ने सोचते हुए कहा,

‘ठीक है मैं ऐसा धनुष दूँगा जो जिंदगी भर टूटेगा नहीं और निशाना लगाओगे तो कभी खाली नहीं जायेगा।’ यह कहकर उसके एक धनुष अैार तीर अपने झोले में से निकाल कर दिया। लड़का बहुत खुश हुआ, फिर बोला,‘ एक छोटी ही सी सही बाँसुरी बजाने के लिए मिल जाती।’

‘ मैं तुम्हें बाँसुरी देता हूँ, वृद्ध व्यक्ति बोला, लेकिन यह अदभुत् है तुम्हें छोड़कर जो भी इसे सुनेगा नाचने लगेगा। अब तीसरी वस्तु बताओ।’ 

लड़का कुछ देर सोचता रहा फिर बोला, मुझे और कुछ नहीं चाहिये।

‘कुछ नहीं ’वृद्ध बोला, ‘कुछ तो बताओ, जो मांगोगे मिल जायेगा।’ तो लड़का सोच कर बोला, मेरी सौतेली माँ बहुत खराब है मुझे जरा भी प्यार नहीं करती बल्कि मेरे में कोई न कोई नुक्स निकालती रहती है जिससे पिता मुझे पीटते हैं मुझे पिटता देखकर हंसेती है, मैं चाहता हूँ वो मैं कहूँ तो इतना हंसे कि वो न हंसने के लिये गिड़गिड़ाये, जब मैं मना करूँ तो चुप हो जाये।’

ऐसा ही होगा, अच्छा अलविदा यह कहकर वृद्ध चला गया। शाम हुई वह घर चला जैसे ही उसने बाँसुरी बजाई उसकी भेडं़े नाचने लगी। घर पहुँचने पर उसने बाँसुरी बंद कर दी। बाँसुरी बंद करते ही उनका नाचना बंद हो गया।

घर पहुँचा तो लड़के का पिता खाना खा रहा था, लड़का बोला सारा दिन घूमते घूमते थक गया, मुझे बहुत जोर की भूख लगी है। पिता ने उसे अपने साथ खाने पर बिठा लिया तो सौतेली माँ ने आंखों ही आंखों में उसे डांटा और साथ ही सौतेली माँ ने हंसना प्रारम्भ कर दिया और हंसती चली गई, अंत में हंसते हंसते थक गई और जमीन पर गिर पड़ी। लेकिन हंसी नहीं रुकी वह अधमरी सी हो गई, यह देख लड़के ने कहा, ‘बस अब मत हंसो।’ यह कहते ही हंसी रुक गई यह देख सब आश्चर्य चकित रह गये।

सौतेली माँ का भाई टोपा अधिकतर घर आता था। सौतेली माँ ने उससे लड़के की शिकायत की कि किस प्रकार उसे हंसा हंसा कर बेदम कर दिया था। शायद लड़के पर कोई प्रेत भूत चढ़ गया उसे निकाल दो। 

‘ठीक है मैं ऐसा पीटूँगा कि उसका प्रेत झट पट भाग लेगा’ सौतेली माँ के भाई ने कहा, 

दूसरे दिन जब सुबह लड़का ढोर लेकर जंगल के लिये चला, पीछे पीछे सौतेली माँ का भाई चला जब जंगल वे पहुँच गये तब टोपा बोला, तूने अपनी माँ के साथ बहुत बुरा किया है, मुझे सच सच बताओं तुमने यह किया कैसे जो कुछ भी किया, अगर मुझे विश्वास नहीं हुआ तो तुम्हें पीटूँगा।’

‘ओ हो तो तुम इसलिये मेरे पीछे पीछे परेशान से आ रहे थे,’ लड़का बोला, ‘चलो तुम्हें दिखाऊँ मैं क्या क्या कर सकता हूँ, मैं छोटा जरूर हूँ पर बहुत दूर की चिड़िया मार कर दिखाऊँगा।’

‘ठीक है निशाना लगाओ,’

अपने छोटे से धनुष से खींच कर एक तीर उसने दूर उड़ती हुई चिड़िया के मारा। जैसे ही टोपा ने चिड़िया उठाई लड़के ने बाँसुरी बजाना प्रारम्भ कर दिया। भाई के हाथ से चिड़िया गिर गयी और वह नाचने लगा, जैसे जैसे बाँसुरी का संगीत ऊँचा होता गया उसका नाचना भी तेज होता गया। वह अपने कपड़े फाड़ने लगा यहाँ तक कि उसकू पैरों से खून बहने लगा।

‘रोको, भगवान के लिये रुक जाओ,’ टोपा गिड़गिड़ाने लगा, ‘अगर थोड़ा और नाचा तो मैं मर जाऊँगा, मैं वादा करता हूँ आगे से में तुम्हें कभी नहीं सताऊँगा।’

‘पीछे कूदो’ लड़का बोला, ‘और भाग जाओ।’

टोपा तेजी से पलटा और भाग लिया। घर पहुँचा तो सब हैरान रह गये कि उसकी यह गत कैसे बनी।

‘यह सब तुम्हारे बेटे ने किया है ’टोपा चिल्लाया‘ जरूर उस पर किसी राक्षस का साया पड़ा है और कोई इतना कुछ नहीं कर सकता।’

‘ आखिर उसने किया क्या है।’

‘उसने मुझे मारने की हद तक नचाया, पता नहीं उस बाँसुरी में क्या था कि मेरा नाचना रुका ही नहीं’

 शाम को जब घर आया तो पिता ने पूछा।

‘पिताजी मैंने कुछ नहीं किया बस बाँसुरी बजाई थी ’लड़का भोला सा मुँह बना कर बोला।

‘ठीक है बाँसुरी मुझे भी बजा कर सुनाओ ’पिता बोले

‘बाप रे बाप’ टोपा बोला ‘बाँसुरी मत बजाना’

‘रुको,’ टोपा बोला, ‘अगर आपको बाँसुरी सुननी ही है तो मुझे पहले पहले खंम्भे से बांध दें क्योंकि अब मुझमें नाचने की हिम्मत जरा भी नहीं है। मैं जरूर मर जाऊँगा।’

सबको टोपा की खस्ता हालत देखकर बहुत हंसी आ रही थी, उन्होंने उसे खम्भे से बांध दिया।

‘अब बाँसुरी बजाओ,’ पिता ने कहा, 

‘ठीक है मैं बाँसुरी शुरु करता हूँ, लेकिन जब आप बंद करने की कहेंगे मैं बंद कर दूँगा।’ जै ने कहा

जैसे ही जै ने बाँसुरी बजाना शुरु किया सबने उछलना कूदना शुरु कर दिया यहाँ तक कि टोपा खम्भे से सिर टकराने लगा और दर्द से चीखने लगा। कोई मेज पर कूद रहा था तो कोई कुर्सी हवा में उठाये नाच रहा था जै गली में निकल गया सब उसके पीछे पीछे नाचते चलने लगे। जो भी बाँसुरी की आवाज सुनता घर से दीवार फांदता निकल आता। यहाँ तक कि सोते हुए व्यक्ति भी उठ बैठे और नाचने लगे। जब नाचने नाचते बहुत थक गये तो पिता ने जै से बाँसुरी बजाना बंद करने के लिये कहा, लड़के ने जैसे ही बाँसुरी बजाना बंद किया सबके कदम अपने आप रुक गये।

‘ ऐसा मधुर संगीत मैंने आज तक नहीं सुना ’पिता प्रसन्न होकर बोला,

‘ ठहर जा दुष्ट लड़के, ’जब सब घर वापस आ गये तो टोपा बोला, ‘मैंने कल पंचायत बुलाई है मैं तुझे  पंचायत में मजा चखाऊँगा।’

‘भगवान करे कल जल्दी आये,’ जै हंसता हुआ बोला,

दूसरे दिन टोपा और सौतेली माँ पंचायत के सामने पहुँचे, सारा गाँव एकत्रित हो गया। टोपा ने पंचों के सामने सारा किस्सा रक्खा ,और कहा जरूर यह तंत्र मंत्र जानता है और पूरे गाँव को नष्ट कर देगा।

‘इस पर चुड़ैल आती है’ सौतेली माँ ने जै को घूरते हुए कहा, लेकिन एकाएक उसका भाव बदल गया। पहले उसके चेहरे पर मुस्कान आई फिर हंसी और वह जोर जोर से हंसने लगी।

मुखिय चिल्लाया,‘ ए औरत पागलों की तरह हंसना बंद कर।’ लेकिन उसकी हंसी तब तक नहीं रुकी जब तक जै ने टोका नहीं।

तब टोपा बोला, ‘देख लीजिए हजूर, यह तो कुछ भी नहीं बाँसुरी बजाकर तो आप सब की वो गत बनायेगा कि आप भी इससे तौबा कर जाओगे।’

‘जै हम भी सुनना चाहेगे, तुम्हारी बाँसुरी।’

‘अरे नहीं नहीं ’टोपा चिल्लाया ‘यह गजब मत कीजिये। पहले से बाँसुरी की आवाज से ही दूर भाग जाऊँ।’

टोपा सिर पर पैर रखकर वहाँ से भागा।

जैसे ही जै ने बाँसुरी में फूंक मारी सारे के सारे गाँव वालों के हाथ पैर अपने आप उठ गये और सब उछल कूद करने लगे। मुखिया चौकी पर खड़ा कूद रहा था।  अब वह थक गया तो चिल्लाया ‘जै इसे बजाना बंद करो।’

‘लेकिन मैं तब ही बजाना बंद करूँगा, माँ और टोपा मामा यह वादा करेंगे कि मुझे कभी नहीं सतायेंगे।’ जै ने कहा,

सब घर वालों ने उछलते कूदते पंचों के सामने कसम खाई कि वे कभी जै को परेशान नहीं करेंगे। और उसकी सहायता करेंगे।

जै ने बाँसुरी बजाना बंद कर दिया और फिर किसी ने उसे नहीं सताया।

डॉ॰ शशि गोयल


Sunday, 29 June 2025

Mulla nasruddeen

 तुरंत जबाव लीजिये -  

                     बुखारा के मुल्ला नसरूद्दीन अपने आप में अपनी मिसाल 

थे । उनके किस्से दूर दूर तक मशहूर थे । एक आदमी ने सुन रखा था कि मुल्ला नसरूद्दीन बहुत ही समझदार है । उसके पास हर समस्या का हल ,हर सवाल का जवाब मौजूद रहता है।  वह बड़ी दूर से चलकर मुल्ला नसरूद्दीन के पास पहॅुचा और बोला‘,‘ मैंने आपकी बहुत तारीफ सुनी है ,और मैं बहुत दूर से चलकर आया हॅू। एक सवाल मुझे बहुत देर से परेशान किये हुए है ,‘जिन्दगी में आदमी को क्या याद रखना चाहिये और क्या भूल जाना चाहिये ? कृपया मुझे इस बात का जबाव दीजिये ।’ क्षण भर को मुल्ला ने सोचा और फिर बोला ,‘किसी ने आपके लिये अच्छा किया हो उसे याद रखना चाहिये और अगर किसी ने बुरा किया हो तो भूल जाना चाहिये ।’’

मुल्ला नसरूद्दीन दोस्तों के साथ बैठे गुफ्तगू का मजा ले रहे थे एक दोस्त ने गप्प मारी ,’’ मेरे दादा बड़े तैराक थे। एक बार उनके सिर पर तैरने का ऐसा जनून सवार हुआ कि चार दिन और चार रात लगातार तैरते रहे। ’’ मुल्ला ने दोस्त की बात काटते हुए कहा,’’ यह तो कुछ भी नहीं , मेरे दादा के तो पासंग में भी नहीं ’ दोस्त ने पूछा ,’’ वह कैसे ,’’ बड़ी शान से छाती फुलाकर मुल्ला ने कहा,’’ पचास वर्ष पहले वे झील में तैरने गये थे और आज तक नहीं लौटे।’

’मुल्ला नसरूद्दीन एक दिन बाजार में चले जा रहे थे कि एक दलाल ने कहा,’’ मैनें सुना है कि शैतान के साथ तुम्हारी खूब पटती है। जरा मुझे शैतान का हुलिया तो बताओ कि उसकी शक्ल सूरत कैसी है?’

’’ तुमने ठीक सुना है,’’ मुल्ला ने जबाव दिया ,’’ जरा शीशे में अपना मुॅह देखलो ।’’

एक दिन बादशाह मुल्ला नसरूद्दीन से बातें कर रहा था बातों ही बातों में उसने मुल्ला से पूछा,’’ मुल्ला यह तो बताओ मौत के बाद में स्वर्ग में जाउंगा या नर्क में ।’

’मुल्ला ने तुरंत कहा , ’’ में निश्चय पूर्वक कह सकता हँू नर्क में ।’ यह सुनना था कि बादशाह एकदम आग बबूला हो गया गुस्से में उसकी आँखें लाल हो गईं । इस अपमान से वह तिलमिला उठा ।

‘भगवान आपका भला करे इतना गुस्सा मत कीजिये ,’’ बादशाह को शांत करने के लिये मुल्ला ने कहा ,’’ मैने सोच समझकर ही ऐसा कहा है । बात यह है कि स्वर्ग जाने योग्य बहुत से ऐसे लोगों को आपने कत्ल करवा दिया है अब वहाँ इतनी भीड़ भाड़ हो गई होगी कि आपके लिये जगह ही नहीं बची होगी ।’

दरभंगा नरेश के घने घुंघराले केश थे , जबकि गोनू झा की चंदियॉं चमचमाती जरा जरा से केश इधर उधर थे । एक बार विनोद में महाराज ने कहा , क्या बात है गोनू झा मेरे सिर पर तो इतने घने केश हैं और आपका सिर बंजर धरती बना हुआ हैं।ै 

’’ मेरी खोपडी़ में अंदर विधाता ने गोबर भरने में कंजूसी कर दी ,’’ गोनू झा का छूटते ही जबाब था। महाराज कट कर रह गये । 


Saturday, 28 June 2025

eshi patel kahani

 एशी पटेल

लेगार्थ देश के समृद्ध किसान के पास बहुत से खलिहान थे,  उसकी पत्नी बहुत खर्चीली थी। उसके सात पुत्र और एक पुत्री थी। सबसे छोटा पुत्र एशी पटेल सारा दिन इधर उधर भागता रहता था और एसे ही धूल मिट्टी में सो जाता इसलिये अन्य सब बड़े पुत्र उसे दुत्कारते रहते थे । उसे सारे छोटे छोटे काम करने के लिये दिये जाते थे। सबके लिये वह हंसी का पात्र था लेकिन उसकी बहन उसे बहुत प्यार करती थी। एशी पटेल तरह तरह की दानवों और राक्षसों से लड़ने की बहादुरी की कथाऐं सुनाता था जिसका नायक वह खुद होता था। उसके भाई सुनते और मजाक उडाते थे।

एक दिन राजकुमारी जैमलवली वहां घुमनें आई नदी में एशी पटेल की बहन तैर रही थी। राजकुमारी को एशी पटेल की बहन इतनी अच्छी लगी कि उसने उसका घर पता लिया और पिता से कहकर अपने महल में अपनी सहेली बनाने के लिये बुलवा लिया। वह प्रतिदिन सुबह अच्छें अच्छे कपडे पहन कर टट्टू पर चढकर महल में चली जाती थी इससे एशी पटेल और भी अकेला हो गया था।

चारों ओर खबर फैली कि समुद्र की राह भयानक जानवर आ रहा है जिसकी सांस में जहर है जिसको भी उसकी सॉस की हवा लग जाये वह व्याक्ति मर जाता है और जमीन बंजर हो जाती है।

वह जानवर आया और चारों ओर हाहाकार मच गया। वहंी एक मांत्रिक रहता था जिसे सब ज्ञात था लेकिन राजा उसकी सहायता नहीं लेना चाहते थे। क्योकि कभी कभी वह धोखेबाजी कर देता था। रानी ने एक टोहनी का पता लगाया वह एक लम्बे चौडे शरीर वाली स्त्री के पास ले गई जिसने एक अन्य मांत्रिक का पता लगाया जो बहुत बुद्विमान और शक्तिशाली मंा़िंत्रक था। सूर्योदय होने पर उसे सूर्य की अभ्यर्थना की और बताया कि जहरीले जानवर को हर हफ्ते सात कुंवारी कन्याओं की बलि चढा़ने पर ही प्रसन्न किया जा सकता है। अगर इससे भी वह सन्तुष्ट नहीं हुआ तो एक अन्य उपाय है यद्यपि उपाय बहुत खतरनाक है उसे आवश्यकता होने पर ही बताया जायेगा। राजा हर हफ्ते सात कुंवारी कन्याऐ जहरीले जानवर के पास भेजता । वह अपनी लंबी जीभ बाहर निकालता और एक ही झपेटे में उन्हे अंदर समेट लेता। सब व्यक्ति दृश्य देख देख कर रोते थंे। एक दिन एशी पटेल बोला ।

‘इस राक्षस से मै लडूंगा इस तरह तो यह सबको थोडा थोडा करके खा जायेगा ’भाइयों ने उसे खूब मारा जब पिता बचाने आये तो एशी पटेल ने कहा घबराइये नहीं पिता जी मै उन सबको मार गिरा सकता था लेकिन मै अपनी शक्ति जहरीले जानवर से लड़ने के लिये बचा रहा हूॅ।

जब कई हफ्ते बीत गये और जहरीले जानवर को प्रसन्न नहीं किया जा सकता तो राजा ने मान्त्रिक से दुसरा उपाय पूछा । मान्त्रिक ने सिर झुका कर कहा यह जहरीला जानवर तब ही जायेगा जब राजकुमारी जैमलवली को उसके हवाले किया जाये। सुनकर राजा का चेहरा पीला पड़ गया और दिल दुःख से भर गया फिर भी बोला मै यह कार्य करूंगा। लेकिन राजा ने जैमलवली को दानव के हवाले करने के लिये तीन हफ्ते का समय मांगा।

राजा ने पूरे शहर में मुनादी करवा दी कि जो कोई भी जहरीले जानवर को मारेगा उसकी राजकुमारी से शादी करा दी जायेगी तथा राज्य का उत्तराधिकारी बना दिया जायेगा। उसे जादुई तलवार और जादुई खंजर दी जायेगी अगर यह उपाय भी कारगर न हुआ तो जैमलवली को दानव के हवाले े कर दिया जायेगा। अगर तब भी रााक्षस नहीं गया तो मांत्रिक को भी जहरीले दानच के सुपुर्द कर दिय जायेगा।

रानी सुनकर बहुत प्रसन्न हुई क्योकि वह जैमलवली की सौतेली मॉ थी। छत्तीस शक्तिशाली विजेता पधारे लेकिन बारह जानवर की शक्ल देखते ही बीमार पड़ गये। बारह भाग गये। बारह  राजा के मेहमान बने । यद्यपि राजा ने तरह तरह के पकवान बनवाने नाच गाने का प्रोग्राम रखा लेकिन उनके चेहरे पर मुर्दनी छायी हुई थी जब सब योद्धा सोने चले गये तो राजा उन्हे देख हताश हुआ। उसने जादुई खंजर तलवार बाहर निकाली और बोला अपनी पु़त्री का बलिदान वे अपने हांथों से करेगा। उसने सुबह नाव तैयार करायी। क्षण भर मे यह खबर पूरे लेगार्थ में फैल गई और बच्चा बच्चा राजकुमारी का बलिदान देखने के लिये बलिस्थल पर पहुंचने लगा।

एशी पटेल ने रात को सोते में पिता को मॉं से कहते सुना कि उसकी मॉ टीगांेग नामक घोडे के पीछे पीछे चले। टीगोंग बहुत तेज दौडने वाला घोडा था लेकिन उसे चलाना केवल एशी पटेल के पिता ही जानते थे। एशी पटेल की मॉ ने पूछा आखिर उस घोडे को तुम चलाते कैसे हो।

पिता ने कहा, किसी को कहना मत मै बता रहा हूॅ जो भी इसका राज जान जायेगा वह घोडा ले उडा तो कोई भी उसकेा पकड़ नहीं पायेगा। बांयी तरफ कान पर एक ताली का मतलब है खडा हो जाये। दो दायें कंधे पर खूब तेज और तीखी पाइप की आवाज मतलब पूरी तेजी से दौडे।

जब पिता सोया हुआ था एशी पटेल ने पिता के सिरहाने से रखा पाइप चुरा लिया और टीगांेग की पीठ पर चढ़ गया। टीगोंग ने जैसे ही महसूस किया कि उसक मालिक उसकी पीठ पर नहीं वह हिनहिना उठा। बूढा जागा उसने अपने पुत्रों को जगाया वो अस्तबल की ओर भागे। बूढा जैसे ही चिल्लाया उसकी आवाज हे हे हो टीगोंग हो सुनकर स्थिर खडा़ हो गया लेकिन एशी पटेल ने पाइप बजा दिया और टीगोंग पूरी तेजी से भाग खडा़ हुआ। और बूढा और उसके बेटे निराश वापस लौट गये।

प्रातः होते ही एशी पटेल समुद्र के किनारे पहुंच गया वहां उसने देखा कि राजा की नाव किनारे खडी है राजा के अंगरक्षक वगैरह नाव में बैठे है। एशी पटेल ने इधर उधर देखा उसे सामने एक झोंपडी नजर आई चुपचाप वहां गया चूल्हें में से एक हांडी में आग लगाकर बाहर चुल्हा बनाने का सा बहाना करने लगा। मिटटी खोदने लगा खोदते खोदतेे चिल्लाया सोना सोना जैस उसे मिट्टी खोदने मिला हो नाव में से लोग उतरकर देखने लगे। एशी पटेल आग की हांडी लेकर जल्दी से नाव खोलकर उसमे चढ़ गया और भयानक समुद्री दानव के रहने के स्थान के लिये चला। अजगर कई मील के दायरे मे पसरा पडा था उसकी जीभ भी मील भर लम्बी थी एक झपट में अनेको बस्तुओं को लपेटकर ले सकती थी उसके छुरे जैसे नुकीले दांत थे। एशी पटेल सीधे उसके मुंह की तरफ नाव खेता रहा उसने नाव का मस्तूल ऊॅचा कर दिया था और पतवार नीची । अजगर ने जम्हाई ली और सारा पानी बहाव के साथ अजगर के मुॅह में चला गया जिसमें एशी पटेल की नाव भी चली गई लेकिन उसका मस्तूल अजगर के तलवे में अटक गया और पतवार ने नीचे जबडे पर पकड कर ली एशी पटेल हांडी लेकर अंदर पेट में चलता चला गया यहां तक कि उसका जिगर आ गया। जल्दी जल्दी जिगर मे गडढा खोदकर उसने आग की हांडी रखदी और वापस नाव में चढ गया। अजगर के पेट का तेल जलने लगा और वह अंदर से काफी जल गया। उसकी जवान दर्द से ऐंठने लगी। धीर धीरे जीभ मंुह से बाहर आ गई और लंबी पसर गई वह सख्त होगई वह समुद्री टापू सी बन गई । आजकल यह वही टापू है जो डेनमार्क को स्वीडन और नार्वे से अलग करा है। दानव ने अपना सिर दर्द से इधर उधर पटका तो दांत निकल कर इधर उधर गिर गये जो बाद में आर्कन शैट लैंड और फराओ द्वीप बने । खुद अजगर ने कुंडली मारली वह आइस लौंड बन गया वह  अंदर  से अब भी जल रहा है और ज्वालामुखी के रूप मंे फटता रहता है।

राजा ने एशी पटेल को आशीर्वाद दिया और अपनी पुत्री की शादी कर दी। टीगांग घोडे पर सवार राजकुमारी को लेकर ऐशी पटेल वापस चला वह कुछ ही दूर गया था कि रानी के सवार आते दिखे उन्होने एशी पटेल को जान से मारने की कोशिश की मांत्रिक भी साथ था क्योकि सारा राज्य एशी पटेल का हो जाने वाला था इससे रानी घबरा गई लेकिन जादुई तलवार और खंजर उडे़ और रानी और मांत्रिक के पेटों मे घुस गये। खून का दरिया सा बह गया।

एशी पटेल और राजकुमारी राजा रानी बन गये। राजा ने सन्यास ले लिया और समय समय पर उन्हे सलाहे देेने लगा।


Friday, 27 June 2025

akbar birbal ke kisse

 नये मंत्री

एक बार अकबर बाग में घूम रहे थे बीरबल उनके साथ थे । अकबर कुछ राजनैयिक समस्यााओं पर बीरवल से सलाह करना चाहता था। बीरबल से किसी बात पर असहमत था । बीरबल ने अपने पक्ष को रखना चाहा तो अकबर क्रुद्ध होकर बीरबल से बोले ‘ बीरबल तुम मेरे सामने से हट जाओ आगे से दरबार में भी मत आना ।’

बीरबल ने सामने से हट जाना ही बेहतर समझाा और वह दूसरे दिन दरबार में नहीं गये । न अकबर ने उसके न आने का कारण किसी से पूछा न कोई खबर ली। एक माह व्यतीत हो गया । बीरबल को ज्ञात हुआ कि बादषाह ने कोई अन्य दीवान नियुक्त कर दिया है । बीरबल को अपमान लगााऔर वे कुछ दिन के लिये नगर से ही कहीं बाहर रहने लगे । दो तीन माह व्यतीत हो गये अब अकबर को  बीरबल की कमी खटकने लगी। नये दीवान पर उन्हें भरोसा भी नहीं था,और कुछ मसलों पर उसका निर्णय अकबर को बिलकुल पसंद नहीं आया था ।अकबर ने बीरबल को वापस बुलाने के लिये प्रयत्न किया पर वो अपने महल में नहीं थे किसी को पता भी नहीं था बीरबल कहां है। अब अकबर ने नये योग्य  दीवान के लिये मुनादी करवा दी‘ बादषाह अकबर नये दीवान नियुक्त करना चाहते हैं लेकिन उनकी परीक्षा लेंगे । दिल्ली दरबार में पूछे गये प्रष्नों का सटीक उत्तर देगा वही दीवान नियुक्त किया जायेगा ।

बीरबल की बुद्धिमत्ता से सभी परिचित थे इसलिये जो भी दीवान का पद लेने की सोचते यह सोच कर तुप रह गये कि बादषाह वीरबल से तुलना करेगे फिर भी पांच उम्मीदवार उपस्थित हुए। उनमें से एक ने गरारीदार पाजामा और ढीला जामा पहना था सिर पर साफा थाएक आंख ढकी हुई थी दाढ़ी बढी हुई थी जिसमें अधपके बाल झाांक रहे थे।

परीक्षा लेने के लिये पंडित जगन्नाथ ने पहले तो नियम बताये कहा कि यदि कोई प्रष्न का उत्तर नहीं दे पायेगा या सोच विचार में समय  लेगा उसे वहीं से प्रतियोगिता से हटा दिया जायेगा।

पहला प्रष्न पंडित जगन्नाथ ही ने पूछा,‘ इस भूलोक के समुद्रों में तोती की सीपें कितनी हैं । चार में से किसी ने करोडत्र किसी ने अरब सीपी बताईं लेकिन साफे वाले व्यक्ति ने कहा ,‘ संसार में मनु यों की  जितनी आंखें हें उतनी सीपी हैं।’

दरबार से वाह वाह की आवाज उठने लगी।उन चारों से प्रष्न पूछना बंद कर पंडित जगन्नाथ ने साफे वाले से ही प्रष्न किया ‘षरीर का प्रथम सुख क्या है ?’

आरोग्य।’ साफेवाले उम्मीदवार ने उत्तर दिया

सबसे उत्तम ष्षस्त्र क्या है ? 

‘बुद्धि ’ साफे वाले ने उत्तर दिया । राजा टोडरमल ने पूछा ,‘ चीनी और रेत ष्षामिल हो जाये तो उन्हें अलग अलग करने का जल में डालने के सिवाय क्या उपाय है ?

प्रतिस्पर्द्धी ने कहा,‘ उसे धरती पर फैला दिया जाये तो चींटी चीनी को उठा ले जायेंगी और रेत रह जायेगी।

पांचवा प्रष्न फिर नबाव खानाखान ने किया ,‘ क्या तुम समुद्र का पानी पी सकोगे?’

उम्मीदवार ने उत्तर दिया ‘हां मैं समुद्र का पानी पी सकता हूं यदि उसमें मिलनेवानी नदियों का पानी

को रोक दिया जाये।’

पंडित जगन्नाथ ने गहरी दृश्टि उम्मीदवार पर डाली उसके चेहरे को समझने का प्रयास किया किफर बोले ,‘ चिता बिना मनुश्स किसमें जलता है?’ उत्तर मिला ,‘ चिंता में।’

टोडरमल ने आगे पूछा,‘ सबसे नीच धंधा क्या है ?

भिक्षा का वह व्यक्ति बोला। कुछ देर सन्नाटा छाया रहा तो वह व्यक्ति बोला‘ आपसब श्रेश्ठ जनह ैंएक प्रष्न का मैं भी जबाव आपसे चाहता हूंयदि आपमें से कोई उसका उत्तर देदे तो बहुत कृपा होगी ं’

‘ पूछिये श्रीमन ’ अकबर की आज्ञा से एक दरबारी बोला

‘किवाड़ बंद करने और खोलने के समय में जो चूं चूं षब्द होता है उसका अर्थ क्या है?

अधिकांष दरबारी उसका चेहरा देखने लगे।कुछ के चेहरे पर मुस्कान झलकने लगी। अकबर बहुत प्रसन्न हुआ कि अब वीरबल जैसा व्यक्ति उसे मिल गया।

अकबर ने उसके लिये दीवान योग्य पोषाक मंगवायी और भेंट की तो वह बोला,‘ षहंषाह

मैं तो एक गरीब साधारण सा व्यक्ति हूं मैं कहा इस पद के योग्य हूं जो काम राजा वीरबल सभांलते थे मैं कैसे कर सकता हूं,इतनी योग्यता मुझमें नहीं है।’

अकबर बोले ,‘ मैंने वीरबल को क्रोध में पदच्युत कर दिया थाक्रोध षांत होने पर मैंने दरबार में बुलाने के लिये उसकी खोज करवाइ्र पर वह मिला नहीं इस वजह से मुझे दीवान पद पर योग्य व्यक्ति की आवष्यकता हुई।’

‘हुजूर अगर वीरबल को मैं ढूंढकर ले लाऊं तो आप दोबारा नियुकत कर देंगे।’

‘हां हां बिलकुल,इसमें कोई षक नहीं।’

षहंषाह हुजूर उसका पता ठिकाना मैं जानता हूं मैं बता सकताहूं बताऐं क्या मै। उन्हें उपस्थित कर सकता हूं।’

अगर तुम वीरबल का पता बताओगे तो हम तुम्हारे बहुत एहसानमंद होंगे।’ वीरबल ने साफा उतारा आंख पर से पट्टी हटाकर अपना ढीला चोगा उतार दिया। सामने वीरबल को देखकर बादषाह प्रसन्न हो उठे और दरबार में से हर्शघ्वनि उठने लगी। सबने वीरबल का स्वागत किया ।




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Monday, 23 June 2025

Aram ki roti bal katha

 आराम की रोटी



एक दिन एक जंगली कुत्ते की भंेट एक झबरीले घरेलू कुत्ते से हुई । झबरीला कुत्ता घरेलू कुत्ता था। उसके बाल एकदम चिकने चमकदार लम्बे लम्बे थे ,उनसे खुशबू आ रही थी। बु्रश से भली भांति संवरे थे तथा बेहद हष्टपुष्ट था। उसे जंगली कुत्ता हैरानी सेे देखता रह गया, क्योंकि उसकी खुद की हड्डी हड्डी निकली हुई थी, जगह जगह कीचड़ लगी हुई थीं। जब स्वयं अपनी बदबू सहन नहीं होती थी तो वह नदी तालब या पोखर में लोटपोट कर आता था नहीं तो बरसात में तो बार बार धुल ही जाता था। पर उसकी खाल तो रूखी है बाल भी उलझ रहे हैं। वह उससे उसकी सुंदरता का राज जाने बिना रह नहीं पाया।

वह झबरीले से बोला, ‘भई तुम तो बहुत खूबसूरत लग रहे हो, कहाँ रहते हो? मुझे तो आजकल ढूँढ़़े से भी खाना नहीं मिलता, मंहगाई के कारण लोग जूठा छोड़ते ही नहीं, अब देखों न चील के मुँह में यह हड्डी गिर गई उसे ही निचोड़ रहा हूँ कहीं कुछ मिला ही नही। अब सड़कांे पर भी कुछ नहीं मिलता पर तुम्हें देखकर तो ऐसा नहीं लगता।’

झबरीला मुस्कराया और बोला ,‘ऐसे बने रहने के लिये काम करना पड़ता है, तुम्हारी तरह इधर उधर केवल मटरगश्ती से काम नहीं चलता है।’ 

‘अरे तो काम की कौन मना करता है भाई काम तो करने को मैं भी तैयार हूँ ,चलो भई मुझे भी ले चलो पर काम क्या करना होगा ?’

‘काम वैसे कुछ खास है नही। रातभर जाग कर घर का पहरा देना होता है जिससे चोर घर के अंदर न आ सके।’ झबरीले ने कहा.

‘फिर सोते कब हो?’ जंगली कुत्ते का मन शंकित हुआ।

‘सारा दिन पड़ा है सोने के लिये। दिन में तो सब जगे होते हैं तो अपना काम है खाना और सोना। वैसे हम लोग सोते ही कितना है जरा सी आहट से तो नीद खुल जाती है। सोने के लिये भी बड़ा नरम बिछौना मिलता है मुझे।’ झबरीले की बात सुनकर जंगली कुत्ते का मन बेहद ललचा उठा।

‘अच्छा भई तब तो तू मुझे भी ले चल यहाँ तो कभी पानी, कभी आंधी, सूखे पत्ते बहुत जान मुश्किल में है जरा से काम के लिये इतना आराम बुरा तो है नहीं।’

‘ठीक है तो चलो मैं तुम्हें अपने मालिक से मिला दूँ।’ कहता झबरीला उछलता कूदता आगे बढ़ा एकाएक जंगली कुत्ते को झबरीले के बालों में फंसा पट्टा दिखाई दिया। वह बोला, ‘भाई यह क्या है?’ ‘ यह पट्टा है’ लापरवाही से झबरीला बोला, ‘आज कल अच्छी नस्ल के कुत्तों को लोग हाल चुरा लेते हैं इसलिये दिन में मेरा मालिक इसमें जंजीर डाल देता है जिससे कहीं इधर उधर न चला जाऊँ। आज तो आँख बचा कर आ ही गया।’

‘क्या ? कहीं घूम नहीं पाते ’

‘हाँ भाई कहीं इधर उधर नहीं जा पाते मालिक की नजर के सामने रहना पड़ता है। परंतु मेरा मालिक बहुत अच्छा है दूध और रोटी खिलाता है वह भी चमचमाते बर्तन में।’

‘पर जंजीर तो छोटी होती होगी रात में दरवाजे लगे होते होंगे। इसका मतलब हुआ तुम्हें अपने मन से कहीं भी घूमने की आने जाने की स्वतंत्रता नहीं है।’

‘नहीं वह तो नहीं आ जा पाते रहना बंधे बंधे एक जगह पड़ता है। रात में खोल देते हैं ’

ना बाबा ना फिर तो मेरा रूखा सूखा खाना ही ठीक है। अपनी स्वतंत्रता की कीमत पर अच्छे भोजन के लालच में मैं बंधा नहीं  रह सकता। ऐसा भोजन , सुख आराम तुम्हें मुबारक। यह कह कर वापस जंगल की ओर भाग लिया।




Saturday, 21 June 2025

sunder hai vah

 सुंदर है वह

राहुल ने जेब थपथपाई, पन्द्रह रुपये स्कूटर में पेट्रोल भरवाने के बाद बचे थे। चार रुपये स्कूल के पंेसिल बॉक्स में थे। दस रुपये की रेजगारी एक़ हो गई थी। तब उसने जेब में डाल ली और चुपचाप निकल गया। भरी आंखें और भारी दिल से सोचता चला जा रहा था, किसी को उसकी जरूरत नहीं है वह सबके लिये बोझ हे, एक फालतू चीज जो घर के किसी कोने में पड़ी जगह ही घेर रही है जिसका कोई उपयोग नहीं है। उसके सामने पिता का क्रोधित चेहरा और माँ की गुस्से में भरी आवाज गंूज रही थीं, इस लड़के के मारे बहुत परेशन हूँ कभी कोई काम ठीक से नहीं करता, कोई चीज ढंग से नहीं रखता। अब कहाँ ढूँढ़ चाबियाँ नाक में दम कर रखा है।

यह किसी को परेशान नहीं करेगा, जो होगा देखी जायेगा, लेकिन अब वह लौट कर घर नहीं जायेगा। पिताजी ने स्कूटर में पेट्रोल भरवाने भेजा था, चाबी लौटकर उसने कहाँ रख दी उसे ध्यान ही नहीं। दोनों पेंट की जेब देख ली, कार्निस देख ली, जहाँ चाबी टंगी रहती है वह जगह देख ली पर वह कहीं नहीं थी, पता नहीं कहाँ रख दी। उसे ध्यान ही नहीं रहता, उस समय रेडियो पर इतना अच्छा गाना आ रहा था कि उसे ही सुनता रह गया चाबी का ध्यान ही नहीं रहा कहाँ बध्यानी में रख दी। वह धुन में आगे बढ़ता जा रहा था कि उसे पत्तों के चरमराने की आवाज आई। उसने  चौंक कर अपने चारों ओर देखा, ख्यालों मे बढ़ता वह जंगल कीह तरफ निकल आया था। उसे पीछे कुछ सरसराहट सुनाई दी वह घबड़ा गया, उसने मुड़ कर देखा काला सा साया नजर आया शायद भालू है। वह तेजी से भागा और भागते भागते चट्टान की ओट में हो गया ाअैर दम साध कर रहा था।चिड़िया अपेन अपने घोंसलों में चली गई थी। हाँ कोई कोई लेटलतीफ चिड़िया वापस लौटती टिटकार लगा देती थी।

चट्टान के पीछे उसे गुफा सी नजर आई। एक बार परेशान हुआ कि उसने ध्यान क्यों नहीं दिया अब तो उसे यह भी नहीं मालुम कि किधर जाये जो शहर में जा सके। रात यहीं गुफा में काट तब दिन निकलने पर शहर जायेगा। पर गुफा किसी जंगली जानवर की हुई तो। उसने एक पेड़ की डाल उठा ली। उससे उसने खट खट की और अंदर झांका जमी धुंधली सी रोशनी अंदर पहुंच रही थी, झांकते ही वह दो कदम पीछे हटा और एक चीख उसके मुंह से निकल गई। अंदर कोई विशाल साया था वह थर थर कांपने लगा। उसके पैर जड़ हो गये। उसने उस साये को बाहर आते देख काला आबसूनी चेहरा जिस पर बड़े बड़े दाग, लाल बड़ी आंखे चौड़ी और फैली नाक बाहर निकले बड़े दांत, हर समय दांत होंठों पर रहने से होठ सफेद पड़ गये। थे। वह उस व्यक्ति को फटी आंखों से देख रहा था। जैसे कहानियों का राक्षस उसे गर्दन से उठा कर लटका देगा।

अंदर आया बच्चे, एक कोमल स्वर ने उसे अंदर बुलाया।

एक आज्ञाकरी बच्चे की तरह वह अंदर उसके साथ चला गया। बाहर रहना ठीक नहीं, यहाँ जंगली जानवर भी हैं। जो रात मे निकल आते हैं, बच्चे क्या रास्ता भटक गया है। उसके कोमल स्पर्श और मधुर वाणी से भी उसका भय कम नहीं हुआ। पहले उसे मोटा करेगा खिलायेगा पिलायेगा फिर मार कर खा जायेगा। उसकी आंखों से आंसू टप टप गिरने लगे, तभी एक खि खिच की सी आवाज आई तो वह तेजी से अंदर चला गया। जानवर से इंसान का डर कम था। राहुल सिकुड़ कर एक तरफ बैठ गया और ध्यान से उस व्यक्ति को देखने लगा। उसने चारों ओर देखा। एक तरफ घासफूस का बिछौना था उस पर चादर फैली कोई चीज पड़ी थी। ईंटों का चूल्हा बना था। दो तीन बर्तन भी टंगे थे। अब तक दोनों चुप थे। उफ कितना भयानक चेहरा है पर अब डर कुछ कम हो रहा था। सर्दी बढ़ने लगी उसे कमकपी सी आ रही थी। उस व्यक्ति ने चूल्हें में आग तेज की और राहुल को उसके पास बैठने के लिये कहा सिर खंूटी पर से एक मोटा सा कपड़ा ओढ़ने के लिये दिया। उसे सर्दी बहुत लग रही थी उन कपड़ों को लपेट कर जरा गर्मी आई।

बटलोई उतार कर व्यक्ति ने रोटिया हाथ से थप थप कर बनाकर तंवे पर डाली एक कटोरे में सब्जी और रोटी उकसे सामने रख दी। गरम गरम रोटी सब्जी देख उसकी भूख भड़क उठी। जल्दी जल्दी खाता फिर रुक कर उस व्यक्ति को देखता अब उस व्यक्ति का चेहरा उसे उतना डरावना नहीं लग रहा था। खाकर उसने घड़े में से पानी पिया। अब तक उस व्यक्ति ने उससे कुछ नहीं पूछा या कहा था। ऊनी कपड़े को उसे अच्छे से लपेट कर पुआल पर लेट जोन के लिये कहा।

जरा डर कम हुआ तो उसे उस व्यक्ति के चेहरे में ऐसा क्या है यह देखने का ध्यान आया कभी वनमानुस, कभी मानवभक्षी, आदि वासी याद कर कर उसका कलेजा कांप रहा था। लेटे लेटे वह बार बार कनखियों से उसे देख रहा था अभी ठंड भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई थी। उस व्यक्ति ने एमक मोटा लबादा सा उसके ऊपर डाल दिया और खुद सिमट कर चूल्हें के पास ही लेट गया। बार बार आंख उठा उठा कर उसकी निगाह गुफा के मुँह पर जहाँ उसने कांटो से भरी लकड़ियाँ रख दी थीं और कभी स्वयं उसकी ओर उठ जाती थी कुछ देर में ही चूल्हे से टिका व्यक्ति गहरी और एक सी सांसे लेने लगा और राहुल को भी नींद आ गई।

सुबह वह अचकपा कर उठ बैठा। गुफा खाली थी, वह बाहर आया। रात को भयानक लगने वाला जंगल बहुत खुशनुमा और सूबसूरत लग रहा था। सामने ही तालाब में कमल खिले थे ाअैर वह डरावना व्यक्ति कमल के फूल आग पर भून रहा था। कमल गट्टे ओर कुछ फल तोड़कर रखे थे उसे पास बुलाया। उसने हाथ मुँह धोयें और नमक से दांत साफ किये। जैसे जैसे वह व्यक्ति कह रहा था राहुल कर रहा था। अब उसे उससे जरा सा भी यहाँ आप अकेले रहते हैं। राहुल ही बोला।

खरखराती सी आवाज निकली, हाँ,

लेकिन क्यों

मुझे देख कर तुम्हें डर लगा था न। ऐसे ही जो भी देखता है यही चीख उठता है। ऐसी चीखें सुन सुन कर में थक गया था, दिन में कई बार मुझे अपनी बदसूरती का ऐहसास दिलाया जाता इससे में परेशान हो गया था। अब झुट पूटे में ही में बाहर निकलता हूँ जंगल के किनारे बंधी हुई एक दुकान से सब सौदा लाता हूँ । उसी को मैं जंगल से लकड़ी बीन बेच आता हूँ और डलिया बना लेता हूँ। वहीं बेच देता हूँ उसे मेरे चेहरे की आदत पड़ गई है वह मुझे देख डरता नहीं है। हाँ अब तुम चलो तुम्हें तुम्हारें घर के बाहर तक छोड़ आऊँ बच्चे माँ बाप गुस्सा अवश्य होते हैं पर प्यार था उनका कम नहीं होता। मेरी माँ मुझे बहुत प्यार करती थी और उसे मेरे चेहरे में सारे जहाँ की सुंदरता दिखती थी। उस व्यक्ति की आंख भर आई। नहीं वे मुझ पर बहुत चिल्लाते हैं, माँ तो कहती हूँ काम का न काज का मत काम बिगाड़ने वाला है अब उन्हें चैन मिल गया होगा। राहुल ने रूठने के अंदाज में कहा अच्छा तुम्हारें माँ बाप तुम्हें कितना प्यार करते हैं देखना चाहोगे। राहुल चुप रहा। ठीक हे मेरे साथ चलो। अगर तुम्हारे जाने से तुम्हारे माँ बाप प्रसन्न हों तो तुम मत जाना मेरे पास रहना मैं तुम्हें पढ़ाऊँगा पर एक बार चलो।

उस व्यक्ति के पीछे छिपा छिपा वह घर के पास आया। उसकी माँ घर की चौखट पर बदहवास बैठी थी उसकी आंखों से आंसू गिर रहे थे लग रहा था उसने मुँह में पानी भी नहीं दिया था। पापा बाहर टहल रहे थें बैचेन से कमी दरवाजे क्ी ओर और कभी अंदर टेलीफोन पर दौड़ रहे थे। उनकी भी हालत एक दम खराब थी। वह दौड़ कर उनसे लिप्ट गया। उसे देख माँ ीाी उसे चिपकर कर फड़क फड़क कर रो उठी मेरे अब लाल तू कहाँ चला गया था।

कुछ देर वह मम्मी पापा से चिपका रहा फिर एकाएक उसे उस व्यक्ति का ख्याल आया पापा...जो अंकल मुझे घर पहुँचा गये उनसे मिलवाऊँह। वह दरवाजे तक गया पर वहाँ कोई नहीं था। वह सोचने लगा अंकल कितने अच्छे थे। उसकी आंखों में उनका प्यार भरा चेहरा सुंदर बनकर झलक उठा। कुछ लोग दिल के कितने सुंदर होते हैं। उसने सोचा।

डॉ॰ शशि गोयल

चिदम्बरा