Monday, 30 June 2025

kahani ek aur bansurivala

 एक और बाँसुरीवाला

किसी शहर में एक किसान रहता था, उसके तीन पत्नियाँ थीं, बड़ी पत्नी से एक पुत्र जै था अैर दो पत्नियाँ निसंतान थी। पिता पुत्र को बहुत प्यार करता था लेकिन दोनों सौतेली माताओं को वह एक आंख नहीं भाता था। वे उसके लिये कोई न कोई परेशानी पैदा करती रहती थी। एक दिन उसकी माँ ने पति से कहा, तुम किसी तरह लड़के को यहाँ से हटा दो, इसे कहीं काम पर लगा दो नहीं तो इसकी जान मुश्किल में पड़ जायेगी।

पति ने कहा,‘ अभी वह बच्चा है, एक साल और पास रहने दो फिर उसे कहीं काम पर भेज दूंगा। नहीं तो इसे तो खेत पर काम करने के लिये भेज दूंगा और खेत के मजदूरों को घर के काम के लिये भेज दँूगा। एक साल बाद किसान ने लड़के को भेड़ें चराने के लिये भेजना प्रारम्भ कर दिया। पहले ही दिन उसे पोटली में खाना बांध कर दे दिया, वह गाता हुआ भेड़ों को चरते देखते एक पहाड़ी पर जा बैठा। तभी वहाँ एक वृद्ध आया और बोला,‘ बेटा भगवान तुम्हारा भला करें।’

‘बैठो बाबा, ’लड़का बोला,।

‘मैं बहुत भूखा हूँ ’वृद्ध ने कहा, ‘अगर तुम्हारे पास थोड़ा सा खाना हो तो मुझे खाना दे दो।’

‘हाँ बाबा, खाना तो है पर थोड़ा ही है,’ यह कहते हुए उसने खाना दे दिया।

वृद्ध ने तृप्ति से खाना खाया और बोला, ‘तुम दयालु लड़के हो तुमने अपना खाना मुझे दिया, इसलिये मैं तुम्हें तीन चीजें देना चाहूँगा। तुम बताओ तुम्हें क्या चाहिये।’

‘एक चिड़िया मारने के लिये धनुष होता तो अच्छा था ’लड़के ने सोचते हुए कहा,

‘ठीक है मैं ऐसा धनुष दूँगा जो जिंदगी भर टूटेगा नहीं और निशाना लगाओगे तो कभी खाली नहीं जायेगा।’ यह कहकर उसके एक धनुष अैार तीर अपने झोले में से निकाल कर दिया। लड़का बहुत खुश हुआ, फिर बोला,‘ एक छोटी ही सी सही बाँसुरी बजाने के लिए मिल जाती।’

‘ मैं तुम्हें बाँसुरी देता हूँ, वृद्ध व्यक्ति बोला, लेकिन यह अदभुत् है तुम्हें छोड़कर जो भी इसे सुनेगा नाचने लगेगा। अब तीसरी वस्तु बताओ।’ 

लड़का कुछ देर सोचता रहा फिर बोला, मुझे और कुछ नहीं चाहिये।

‘कुछ नहीं ’वृद्ध बोला, ‘कुछ तो बताओ, जो मांगोगे मिल जायेगा।’ तो लड़का सोच कर बोला, मेरी सौतेली माँ बहुत खराब है मुझे जरा भी प्यार नहीं करती बल्कि मेरे में कोई न कोई नुक्स निकालती रहती है जिससे पिता मुझे पीटते हैं मुझे पिटता देखकर हंसेती है, मैं चाहता हूँ वो मैं कहूँ तो इतना हंसे कि वो न हंसने के लिये गिड़गिड़ाये, जब मैं मना करूँ तो चुप हो जाये।’

ऐसा ही होगा, अच्छा अलविदा यह कहकर वृद्ध चला गया। शाम हुई वह घर चला जैसे ही उसने बाँसुरी बजाई उसकी भेडं़े नाचने लगी। घर पहुँचने पर उसने बाँसुरी बंद कर दी। बाँसुरी बंद करते ही उनका नाचना बंद हो गया।

घर पहुँचा तो लड़के का पिता खाना खा रहा था, लड़का बोला सारा दिन घूमते घूमते थक गया, मुझे बहुत जोर की भूख लगी है। पिता ने उसे अपने साथ खाने पर बिठा लिया तो सौतेली माँ ने आंखों ही आंखों में उसे डांटा और साथ ही सौतेली माँ ने हंसना प्रारम्भ कर दिया और हंसती चली गई, अंत में हंसते हंसते थक गई और जमीन पर गिर पड़ी। लेकिन हंसी नहीं रुकी वह अधमरी सी हो गई, यह देख लड़के ने कहा, ‘बस अब मत हंसो।’ यह कहते ही हंसी रुक गई यह देख सब आश्चर्य चकित रह गये।

सौतेली माँ का भाई टोपा अधिकतर घर आता था। सौतेली माँ ने उससे लड़के की शिकायत की कि किस प्रकार उसे हंसा हंसा कर बेदम कर दिया था। शायद लड़के पर कोई प्रेत भूत चढ़ गया उसे निकाल दो। 

‘ठीक है मैं ऐसा पीटूँगा कि उसका प्रेत झट पट भाग लेगा’ सौतेली माँ के भाई ने कहा, 

दूसरे दिन जब सुबह लड़का ढोर लेकर जंगल के लिये चला, पीछे पीछे सौतेली माँ का भाई चला जब जंगल वे पहुँच गये तब टोपा बोला, तूने अपनी माँ के साथ बहुत बुरा किया है, मुझे सच सच बताओं तुमने यह किया कैसे जो कुछ भी किया, अगर मुझे विश्वास नहीं हुआ तो तुम्हें पीटूँगा।’

‘ओ हो तो तुम इसलिये मेरे पीछे पीछे परेशान से आ रहे थे,’ लड़का बोला, ‘चलो तुम्हें दिखाऊँ मैं क्या क्या कर सकता हूँ, मैं छोटा जरूर हूँ पर बहुत दूर की चिड़िया मार कर दिखाऊँगा।’

‘ठीक है निशाना लगाओ,’

अपने छोटे से धनुष से खींच कर एक तीर उसने दूर उड़ती हुई चिड़िया के मारा। जैसे ही टोपा ने चिड़िया उठाई लड़के ने बाँसुरी बजाना प्रारम्भ कर दिया। भाई के हाथ से चिड़िया गिर गयी और वह नाचने लगा, जैसे जैसे बाँसुरी का संगीत ऊँचा होता गया उसका नाचना भी तेज होता गया। वह अपने कपड़े फाड़ने लगा यहाँ तक कि उसकू पैरों से खून बहने लगा।

‘रोको, भगवान के लिये रुक जाओ,’ टोपा गिड़गिड़ाने लगा, ‘अगर थोड़ा और नाचा तो मैं मर जाऊँगा, मैं वादा करता हूँ आगे से में तुम्हें कभी नहीं सताऊँगा।’

‘पीछे कूदो’ लड़का बोला, ‘और भाग जाओ।’

टोपा तेजी से पलटा और भाग लिया। घर पहुँचा तो सब हैरान रह गये कि उसकी यह गत कैसे बनी।

‘यह सब तुम्हारे बेटे ने किया है ’टोपा चिल्लाया‘ जरूर उस पर किसी राक्षस का साया पड़ा है और कोई इतना कुछ नहीं कर सकता।’

‘ आखिर उसने किया क्या है।’

‘उसने मुझे मारने की हद तक नचाया, पता नहीं उस बाँसुरी में क्या था कि मेरा नाचना रुका ही नहीं’

 शाम को जब घर आया तो पिता ने पूछा।

‘पिताजी मैंने कुछ नहीं किया बस बाँसुरी बजाई थी ’लड़का भोला सा मुँह बना कर बोला।

‘ठीक है बाँसुरी मुझे भी बजा कर सुनाओ ’पिता बोले

‘बाप रे बाप’ टोपा बोला ‘बाँसुरी मत बजाना’

‘रुको,’ टोपा बोला, ‘अगर आपको बाँसुरी सुननी ही है तो मुझे पहले पहले खंम्भे से बांध दें क्योंकि अब मुझमें नाचने की हिम्मत जरा भी नहीं है। मैं जरूर मर जाऊँगा।’

सबको टोपा की खस्ता हालत देखकर बहुत हंसी आ रही थी, उन्होंने उसे खम्भे से बांध दिया।

‘अब बाँसुरी बजाओ,’ पिता ने कहा, 

‘ठीक है मैं बाँसुरी शुरु करता हूँ, लेकिन जब आप बंद करने की कहेंगे मैं बंद कर दूँगा।’ जै ने कहा

जैसे ही जै ने बाँसुरी बजाना शुरु किया सबने उछलना कूदना शुरु कर दिया यहाँ तक कि टोपा खम्भे से सिर टकराने लगा और दर्द से चीखने लगा। कोई मेज पर कूद रहा था तो कोई कुर्सी हवा में उठाये नाच रहा था जै गली में निकल गया सब उसके पीछे पीछे नाचते चलने लगे। जो भी बाँसुरी की आवाज सुनता घर से दीवार फांदता निकल आता। यहाँ तक कि सोते हुए व्यक्ति भी उठ बैठे और नाचने लगे। जब नाचने नाचते बहुत थक गये तो पिता ने जै से बाँसुरी बजाना बंद करने के लिये कहा, लड़के ने जैसे ही बाँसुरी बजाना बंद किया सबके कदम अपने आप रुक गये।

‘ ऐसा मधुर संगीत मैंने आज तक नहीं सुना ’पिता प्रसन्न होकर बोला,

‘ ठहर जा दुष्ट लड़के, ’जब सब घर वापस आ गये तो टोपा बोला, ‘मैंने कल पंचायत बुलाई है मैं तुझे  पंचायत में मजा चखाऊँगा।’

‘भगवान करे कल जल्दी आये,’ जै हंसता हुआ बोला,

दूसरे दिन टोपा और सौतेली माँ पंचायत के सामने पहुँचे, सारा गाँव एकत्रित हो गया। टोपा ने पंचों के सामने सारा किस्सा रक्खा ,और कहा जरूर यह तंत्र मंत्र जानता है और पूरे गाँव को नष्ट कर देगा।

‘इस पर चुड़ैल आती है’ सौतेली माँ ने जै को घूरते हुए कहा, लेकिन एकाएक उसका भाव बदल गया। पहले उसके चेहरे पर मुस्कान आई फिर हंसी और वह जोर जोर से हंसने लगी।

मुखिय चिल्लाया,‘ ए औरत पागलों की तरह हंसना बंद कर।’ लेकिन उसकी हंसी तब तक नहीं रुकी जब तक जै ने टोका नहीं।

तब टोपा बोला, ‘देख लीजिए हजूर, यह तो कुछ भी नहीं बाँसुरी बजाकर तो आप सब की वो गत बनायेगा कि आप भी इससे तौबा कर जाओगे।’

‘जै हम भी सुनना चाहेगे, तुम्हारी बाँसुरी।’

‘अरे नहीं नहीं ’टोपा चिल्लाया ‘यह गजब मत कीजिये। पहले से बाँसुरी की आवाज से ही दूर भाग जाऊँ।’

टोपा सिर पर पैर रखकर वहाँ से भागा।

जैसे ही जै ने बाँसुरी में फूंक मारी सारे के सारे गाँव वालों के हाथ पैर अपने आप उठ गये और सब उछल कूद करने लगे। मुखिया चौकी पर खड़ा कूद रहा था।  अब वह थक गया तो चिल्लाया ‘जै इसे बजाना बंद करो।’

‘लेकिन मैं तब ही बजाना बंद करूँगा, माँ और टोपा मामा यह वादा करेंगे कि मुझे कभी नहीं सतायेंगे।’ जै ने कहा,

सब घर वालों ने उछलते कूदते पंचों के सामने कसम खाई कि वे कभी जै को परेशान नहीं करेंगे। और उसकी सहायता करेंगे।

जै ने बाँसुरी बजाना बंद कर दिया और फिर किसी ने उसे नहीं सताया।

डॉ॰ शशि गोयल


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