नये मंत्री
एक बार अकबर बाग में घूम रहे थे बीरबल उनके साथ थे । अकबर कुछ राजनैयिक समस्यााओं पर बीरवल से सलाह करना चाहता था। बीरबल से किसी बात पर असहमत था । बीरबल ने अपने पक्ष को रखना चाहा तो अकबर क्रुद्ध होकर बीरबल से बोले ‘ बीरबल तुम मेरे सामने से हट जाओ आगे से दरबार में भी मत आना ।’
बीरबल ने सामने से हट जाना ही बेहतर समझाा और वह दूसरे दिन दरबार में नहीं गये । न अकबर ने उसके न आने का कारण किसी से पूछा न कोई खबर ली। एक माह व्यतीत हो गया । बीरबल को ज्ञात हुआ कि बादषाह ने कोई अन्य दीवान नियुक्त कर दिया है । बीरबल को अपमान लगााऔर वे कुछ दिन के लिये नगर से ही कहीं बाहर रहने लगे । दो तीन माह व्यतीत हो गये अब अकबर को बीरबल की कमी खटकने लगी। नये दीवान पर उन्हें भरोसा भी नहीं था,और कुछ मसलों पर उसका निर्णय अकबर को बिलकुल पसंद नहीं आया था ।अकबर ने बीरबल को वापस बुलाने के लिये प्रयत्न किया पर वो अपने महल में नहीं थे किसी को पता भी नहीं था बीरबल कहां है। अब अकबर ने नये योग्य दीवान के लिये मुनादी करवा दी‘ बादषाह अकबर नये दीवान नियुक्त करना चाहते हैं लेकिन उनकी परीक्षा लेंगे । दिल्ली दरबार में पूछे गये प्रष्नों का सटीक उत्तर देगा वही दीवान नियुक्त किया जायेगा ।
बीरबल की बुद्धिमत्ता से सभी परिचित थे इसलिये जो भी दीवान का पद लेने की सोचते यह सोच कर तुप रह गये कि बादषाह वीरबल से तुलना करेगे फिर भी पांच उम्मीदवार उपस्थित हुए। उनमें से एक ने गरारीदार पाजामा और ढीला जामा पहना था सिर पर साफा थाएक आंख ढकी हुई थी दाढ़ी बढी हुई थी जिसमें अधपके बाल झाांक रहे थे।
परीक्षा लेने के लिये पंडित जगन्नाथ ने पहले तो नियम बताये कहा कि यदि कोई प्रष्न का उत्तर नहीं दे पायेगा या सोच विचार में समय लेगा उसे वहीं से प्रतियोगिता से हटा दिया जायेगा।
पहला प्रष्न पंडित जगन्नाथ ही ने पूछा,‘ इस भूलोक के समुद्रों में तोती की सीपें कितनी हैं । चार में से किसी ने करोडत्र किसी ने अरब सीपी बताईं लेकिन साफे वाले व्यक्ति ने कहा ,‘ संसार में मनु यों की जितनी आंखें हें उतनी सीपी हैं।’
दरबार से वाह वाह की आवाज उठने लगी।उन चारों से प्रष्न पूछना बंद कर पंडित जगन्नाथ ने साफे वाले से ही प्रष्न किया ‘षरीर का प्रथम सुख क्या है ?’
आरोग्य।’ साफेवाले उम्मीदवार ने उत्तर दिया
सबसे उत्तम ष्षस्त्र क्या है ?
‘बुद्धि ’ साफे वाले ने उत्तर दिया । राजा टोडरमल ने पूछा ,‘ चीनी और रेत ष्षामिल हो जाये तो उन्हें अलग अलग करने का जल में डालने के सिवाय क्या उपाय है ?
प्रतिस्पर्द्धी ने कहा,‘ उसे धरती पर फैला दिया जाये तो चींटी चीनी को उठा ले जायेंगी और रेत रह जायेगी।
पांचवा प्रष्न फिर नबाव खानाखान ने किया ,‘ क्या तुम समुद्र का पानी पी सकोगे?’
उम्मीदवार ने उत्तर दिया ‘हां मैं समुद्र का पानी पी सकता हूं यदि उसमें मिलनेवानी नदियों का पानी
को रोक दिया जाये।’
पंडित जगन्नाथ ने गहरी दृश्टि उम्मीदवार पर डाली उसके चेहरे को समझने का प्रयास किया किफर बोले ,‘ चिता बिना मनुश्स किसमें जलता है?’ उत्तर मिला ,‘ चिंता में।’
टोडरमल ने आगे पूछा,‘ सबसे नीच धंधा क्या है ?
भिक्षा का वह व्यक्ति बोला। कुछ देर सन्नाटा छाया रहा तो वह व्यक्ति बोला‘ आपसब श्रेश्ठ जनह ैंएक प्रष्न का मैं भी जबाव आपसे चाहता हूंयदि आपमें से कोई उसका उत्तर देदे तो बहुत कृपा होगी ं’
‘ पूछिये श्रीमन ’ अकबर की आज्ञा से एक दरबारी बोला
‘किवाड़ बंद करने और खोलने के समय में जो चूं चूं षब्द होता है उसका अर्थ क्या है?
अधिकांष दरबारी उसका चेहरा देखने लगे।कुछ के चेहरे पर मुस्कान झलकने लगी। अकबर बहुत प्रसन्न हुआ कि अब वीरबल जैसा व्यक्ति उसे मिल गया।
अकबर ने उसके लिये दीवान योग्य पोषाक मंगवायी और भेंट की तो वह बोला,‘ षहंषाह
मैं तो एक गरीब साधारण सा व्यक्ति हूं मैं कहा इस पद के योग्य हूं जो काम राजा वीरबल सभांलते थे मैं कैसे कर सकता हूं,इतनी योग्यता मुझमें नहीं है।’
अकबर बोले ,‘ मैंने वीरबल को क्रोध में पदच्युत कर दिया थाक्रोध षांत होने पर मैंने दरबार में बुलाने के लिये उसकी खोज करवाइ्र पर वह मिला नहीं इस वजह से मुझे दीवान पद पर योग्य व्यक्ति की आवष्यकता हुई।’
‘हुजूर अगर वीरबल को मैं ढूंढकर ले लाऊं तो आप दोबारा नियुकत कर देंगे।’
‘हां हां बिलकुल,इसमें कोई षक नहीं।’
षहंषाह हुजूर उसका पता ठिकाना मैं जानता हूं मैं बता सकताहूं बताऐं क्या मै। उन्हें उपस्थित कर सकता हूं।’
अगर तुम वीरबल का पता बताओगे तो हम तुम्हारे बहुत एहसानमंद होंगे।’ वीरबल ने साफा उतारा आंख पर से पट्टी हटाकर अपना ढीला चोगा उतार दिया। सामने वीरबल को देखकर बादषाह प्रसन्न हो उठे और दरबार में से हर्शघ्वनि उठने लगी। सबने वीरबल का स्वागत किया ।
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