एशी पटेल
लेगार्थ देश के समृद्ध किसान के पास बहुत से खलिहान थे, उसकी पत्नी बहुत खर्चीली थी। उसके सात पुत्र और एक पुत्री थी। सबसे छोटा पुत्र एशी पटेल सारा दिन इधर उधर भागता रहता था और एसे ही धूल मिट्टी में सो जाता इसलिये अन्य सब बड़े पुत्र उसे दुत्कारते रहते थे । उसे सारे छोटे छोटे काम करने के लिये दिये जाते थे। सबके लिये वह हंसी का पात्र था लेकिन उसकी बहन उसे बहुत प्यार करती थी। एशी पटेल तरह तरह की दानवों और राक्षसों से लड़ने की बहादुरी की कथाऐं सुनाता था जिसका नायक वह खुद होता था। उसके भाई सुनते और मजाक उडाते थे।
एक दिन राजकुमारी जैमलवली वहां घुमनें आई नदी में एशी पटेल की बहन तैर रही थी। राजकुमारी को एशी पटेल की बहन इतनी अच्छी लगी कि उसने उसका घर पता लिया और पिता से कहकर अपने महल में अपनी सहेली बनाने के लिये बुलवा लिया। वह प्रतिदिन सुबह अच्छें अच्छे कपडे पहन कर टट्टू पर चढकर महल में चली जाती थी इससे एशी पटेल और भी अकेला हो गया था।
चारों ओर खबर फैली कि समुद्र की राह भयानक जानवर आ रहा है जिसकी सांस में जहर है जिसको भी उसकी सॉस की हवा लग जाये वह व्याक्ति मर जाता है और जमीन बंजर हो जाती है।
वह जानवर आया और चारों ओर हाहाकार मच गया। वहंी एक मांत्रिक रहता था जिसे सब ज्ञात था लेकिन राजा उसकी सहायता नहीं लेना चाहते थे। क्योकि कभी कभी वह धोखेबाजी कर देता था। रानी ने एक टोहनी का पता लगाया वह एक लम्बे चौडे शरीर वाली स्त्री के पास ले गई जिसने एक अन्य मांत्रिक का पता लगाया जो बहुत बुद्विमान और शक्तिशाली मंा़िंत्रक था। सूर्योदय होने पर उसे सूर्य की अभ्यर्थना की और बताया कि जहरीले जानवर को हर हफ्ते सात कुंवारी कन्याओं की बलि चढा़ने पर ही प्रसन्न किया जा सकता है। अगर इससे भी वह सन्तुष्ट नहीं हुआ तो एक अन्य उपाय है यद्यपि उपाय बहुत खतरनाक है उसे आवश्यकता होने पर ही बताया जायेगा। राजा हर हफ्ते सात कुंवारी कन्याऐ जहरीले जानवर के पास भेजता । वह अपनी लंबी जीभ बाहर निकालता और एक ही झपेटे में उन्हे अंदर समेट लेता। सब व्यक्ति दृश्य देख देख कर रोते थंे। एक दिन एशी पटेल बोला ।
‘इस राक्षस से मै लडूंगा इस तरह तो यह सबको थोडा थोडा करके खा जायेगा ’भाइयों ने उसे खूब मारा जब पिता बचाने आये तो एशी पटेल ने कहा घबराइये नहीं पिता जी मै उन सबको मार गिरा सकता था लेकिन मै अपनी शक्ति जहरीले जानवर से लड़ने के लिये बचा रहा हूॅ।
जब कई हफ्ते बीत गये और जहरीले जानवर को प्रसन्न नहीं किया जा सकता तो राजा ने मान्त्रिक से दुसरा उपाय पूछा । मान्त्रिक ने सिर झुका कर कहा यह जहरीला जानवर तब ही जायेगा जब राजकुमारी जैमलवली को उसके हवाले किया जाये। सुनकर राजा का चेहरा पीला पड़ गया और दिल दुःख से भर गया फिर भी बोला मै यह कार्य करूंगा। लेकिन राजा ने जैमलवली को दानव के हवाले करने के लिये तीन हफ्ते का समय मांगा।
राजा ने पूरे शहर में मुनादी करवा दी कि जो कोई भी जहरीले जानवर को मारेगा उसकी राजकुमारी से शादी करा दी जायेगी तथा राज्य का उत्तराधिकारी बना दिया जायेगा। उसे जादुई तलवार और जादुई खंजर दी जायेगी अगर यह उपाय भी कारगर न हुआ तो जैमलवली को दानव के हवाले े कर दिया जायेगा। अगर तब भी रााक्षस नहीं गया तो मांत्रिक को भी जहरीले दानच के सुपुर्द कर दिय जायेगा।
रानी सुनकर बहुत प्रसन्न हुई क्योकि वह जैमलवली की सौतेली मॉ थी। छत्तीस शक्तिशाली विजेता पधारे लेकिन बारह जानवर की शक्ल देखते ही बीमार पड़ गये। बारह भाग गये। बारह राजा के मेहमान बने । यद्यपि राजा ने तरह तरह के पकवान बनवाने नाच गाने का प्रोग्राम रखा लेकिन उनके चेहरे पर मुर्दनी छायी हुई थी जब सब योद्धा सोने चले गये तो राजा उन्हे देख हताश हुआ। उसने जादुई खंजर तलवार बाहर निकाली और बोला अपनी पु़त्री का बलिदान वे अपने हांथों से करेगा। उसने सुबह नाव तैयार करायी। क्षण भर मे यह खबर पूरे लेगार्थ में फैल गई और बच्चा बच्चा राजकुमारी का बलिदान देखने के लिये बलिस्थल पर पहुंचने लगा।
एशी पटेल ने रात को सोते में पिता को मॉं से कहते सुना कि उसकी मॉ टीगांेग नामक घोडे के पीछे पीछे चले। टीगोंग बहुत तेज दौडने वाला घोडा था लेकिन उसे चलाना केवल एशी पटेल के पिता ही जानते थे। एशी पटेल की मॉ ने पूछा आखिर उस घोडे को तुम चलाते कैसे हो।
पिता ने कहा, किसी को कहना मत मै बता रहा हूॅ जो भी इसका राज जान जायेगा वह घोडा ले उडा तो कोई भी उसकेा पकड़ नहीं पायेगा। बांयी तरफ कान पर एक ताली का मतलब है खडा हो जाये। दो दायें कंधे पर खूब तेज और तीखी पाइप की आवाज मतलब पूरी तेजी से दौडे।
जब पिता सोया हुआ था एशी पटेल ने पिता के सिरहाने से रखा पाइप चुरा लिया और टीगांेग की पीठ पर चढ़ गया। टीगोंग ने जैसे ही महसूस किया कि उसक मालिक उसकी पीठ पर नहीं वह हिनहिना उठा। बूढा जागा उसने अपने पुत्रों को जगाया वो अस्तबल की ओर भागे। बूढा जैसे ही चिल्लाया उसकी आवाज हे हे हो टीगोंग हो सुनकर स्थिर खडा़ हो गया लेकिन एशी पटेल ने पाइप बजा दिया और टीगोंग पूरी तेजी से भाग खडा़ हुआ। और बूढा और उसके बेटे निराश वापस लौट गये।
प्रातः होते ही एशी पटेल समुद्र के किनारे पहुंच गया वहां उसने देखा कि राजा की नाव किनारे खडी है राजा के अंगरक्षक वगैरह नाव में बैठे है। एशी पटेल ने इधर उधर देखा उसे सामने एक झोंपडी नजर आई चुपचाप वहां गया चूल्हें में से एक हांडी में आग लगाकर बाहर चुल्हा बनाने का सा बहाना करने लगा। मिटटी खोदने लगा खोदते खोदतेे चिल्लाया सोना सोना जैस उसे मिट्टी खोदने मिला हो नाव में से लोग उतरकर देखने लगे। एशी पटेल आग की हांडी लेकर जल्दी से नाव खोलकर उसमे चढ़ गया और भयानक समुद्री दानव के रहने के स्थान के लिये चला। अजगर कई मील के दायरे मे पसरा पडा था उसकी जीभ भी मील भर लम्बी थी एक झपट में अनेको बस्तुओं को लपेटकर ले सकती थी उसके छुरे जैसे नुकीले दांत थे। एशी पटेल सीधे उसके मुंह की तरफ नाव खेता रहा उसने नाव का मस्तूल ऊॅचा कर दिया था और पतवार नीची । अजगर ने जम्हाई ली और सारा पानी बहाव के साथ अजगर के मुॅह में चला गया जिसमें एशी पटेल की नाव भी चली गई लेकिन उसका मस्तूल अजगर के तलवे में अटक गया और पतवार ने नीचे जबडे पर पकड कर ली एशी पटेल हांडी लेकर अंदर पेट में चलता चला गया यहां तक कि उसका जिगर आ गया। जल्दी जल्दी जिगर मे गडढा खोदकर उसने आग की हांडी रखदी और वापस नाव में चढ गया। अजगर के पेट का तेल जलने लगा और वह अंदर से काफी जल गया। उसकी जवान दर्द से ऐंठने लगी। धीर धीरे जीभ मंुह से बाहर आ गई और लंबी पसर गई वह सख्त होगई वह समुद्री टापू सी बन गई । आजकल यह वही टापू है जो डेनमार्क को स्वीडन और नार्वे से अलग करा है। दानव ने अपना सिर दर्द से इधर उधर पटका तो दांत निकल कर इधर उधर गिर गये जो बाद में आर्कन शैट लैंड और फराओ द्वीप बने । खुद अजगर ने कुंडली मारली वह आइस लौंड बन गया वह अंदर से अब भी जल रहा है और ज्वालामुखी के रूप मंे फटता रहता है।
राजा ने एशी पटेल को आशीर्वाद दिया और अपनी पुत्री की शादी कर दी। टीगांग घोडे पर सवार राजकुमारी को लेकर ऐशी पटेल वापस चला वह कुछ ही दूर गया था कि रानी के सवार आते दिखे उन्होने एशी पटेल को जान से मारने की कोशिश की मांत्रिक भी साथ था क्योकि सारा राज्य एशी पटेल का हो जाने वाला था इससे रानी घबरा गई लेकिन जादुई तलवार और खंजर उडे़ और रानी और मांत्रिक के पेटों मे घुस गये। खून का दरिया सा बह गया।
एशी पटेल और राजकुमारी राजा रानी बन गये। राजा ने सन्यास ले लिया और समय समय पर उन्हे सलाहे देेने लगा।
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