Sunday, 29 June 2025

Mulla nasruddeen

 तुरंत जबाव लीजिये -  

                     बुखारा के मुल्ला नसरूद्दीन अपने आप में अपनी मिसाल 

थे । उनके किस्से दूर दूर तक मशहूर थे । एक आदमी ने सुन रखा था कि मुल्ला नसरूद्दीन बहुत ही समझदार है । उसके पास हर समस्या का हल ,हर सवाल का जवाब मौजूद रहता है।  वह बड़ी दूर से चलकर मुल्ला नसरूद्दीन के पास पहॅुचा और बोला‘,‘ मैंने आपकी बहुत तारीफ सुनी है ,और मैं बहुत दूर से चलकर आया हॅू। एक सवाल मुझे बहुत देर से परेशान किये हुए है ,‘जिन्दगी में आदमी को क्या याद रखना चाहिये और क्या भूल जाना चाहिये ? कृपया मुझे इस बात का जबाव दीजिये ।’ क्षण भर को मुल्ला ने सोचा और फिर बोला ,‘किसी ने आपके लिये अच्छा किया हो उसे याद रखना चाहिये और अगर किसी ने बुरा किया हो तो भूल जाना चाहिये ।’’

मुल्ला नसरूद्दीन दोस्तों के साथ बैठे गुफ्तगू का मजा ले रहे थे एक दोस्त ने गप्प मारी ,’’ मेरे दादा बड़े तैराक थे। एक बार उनके सिर पर तैरने का ऐसा जनून सवार हुआ कि चार दिन और चार रात लगातार तैरते रहे। ’’ मुल्ला ने दोस्त की बात काटते हुए कहा,’’ यह तो कुछ भी नहीं , मेरे दादा के तो पासंग में भी नहीं ’ दोस्त ने पूछा ,’’ वह कैसे ,’’ बड़ी शान से छाती फुलाकर मुल्ला ने कहा,’’ पचास वर्ष पहले वे झील में तैरने गये थे और आज तक नहीं लौटे।’

’मुल्ला नसरूद्दीन एक दिन बाजार में चले जा रहे थे कि एक दलाल ने कहा,’’ मैनें सुना है कि शैतान के साथ तुम्हारी खूब पटती है। जरा मुझे शैतान का हुलिया तो बताओ कि उसकी शक्ल सूरत कैसी है?’

’’ तुमने ठीक सुना है,’’ मुल्ला ने जबाव दिया ,’’ जरा शीशे में अपना मुॅह देखलो ।’’

एक दिन बादशाह मुल्ला नसरूद्दीन से बातें कर रहा था बातों ही बातों में उसने मुल्ला से पूछा,’’ मुल्ला यह तो बताओ मौत के बाद में स्वर्ग में जाउंगा या नर्क में ।’

’मुल्ला ने तुरंत कहा , ’’ में निश्चय पूर्वक कह सकता हँू नर्क में ।’ यह सुनना था कि बादशाह एकदम आग बबूला हो गया गुस्से में उसकी आँखें लाल हो गईं । इस अपमान से वह तिलमिला उठा ।

‘भगवान आपका भला करे इतना गुस्सा मत कीजिये ,’’ बादशाह को शांत करने के लिये मुल्ला ने कहा ,’’ मैने सोच समझकर ही ऐसा कहा है । बात यह है कि स्वर्ग जाने योग्य बहुत से ऐसे लोगों को आपने कत्ल करवा दिया है अब वहाँ इतनी भीड़ भाड़ हो गई होगी कि आपके लिये जगह ही नहीं बची होगी ।’

दरभंगा नरेश के घने घुंघराले केश थे , जबकि गोनू झा की चंदियॉं चमचमाती जरा जरा से केश इधर उधर थे । एक बार विनोद में महाराज ने कहा , क्या बात है गोनू झा मेरे सिर पर तो इतने घने केश हैं और आपका सिर बंजर धरती बना हुआ हैं।ै 

’’ मेरी खोपडी़ में अंदर विधाता ने गोबर भरने में कंजूसी कर दी ,’’ गोनू झा का छूटते ही जबाब था। महाराज कट कर रह गये । 


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