मामा की पुरानी कहानी
बंदर मामा बने पुजारी
पहनी लुंगी भगवा,
डाल गले में तार जनेऊ
बन गये सबके अगवा।
राम नाम का कुरता पहना
माला गले मे डाली ,
छापा तिलक लगाया माथे
ऐनक ऑंख चढ़ाली ।
बगल में पोथी पॉंच ली
खट खट पहनी खड़ाऊॅं,
निकले गंगा घाट पर
आओ पाप भगाऊॅं।
मगरमच्छ की आंखें चमकी
मामा कुछ तोे याद करो ,
मीठे फल अब तुम्हें खिलाऊॅं
पीठ पर गंगा पार करो ।
सिहर उठे मामाजी सुनकर
बीच की डुबकी ध्यानकर ,
तोड़ जनेऊ छोड़ खड़ाऊॅं
जान बचाई भागकर।
चंदा ऐसा लगता
चंदा लगता आसमान में
कोई खेल रहा हो बौल
या मम्मी ने खूब बनाई
रोटी गोलम गोल।
मम्मी ने बेसन का लडडू
लगता है दुबकाया ।
या पापा की घुटी चांद की
पहुॅंच रही है छाया ।
चंदामामा जो कुछ भी हो
लगता प्यारा प्यारा ,
दुनिया भर की सब चीजों से
एकदम न्यारा न्यारा ।
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