Monday, 11 August 2025

soorya chandra

 सूर्य चन्द्र

जल प्रलय से पूर्व की कहानी है। सूरज सात भाई थे। चारों ओर चमचम चमचम करते सात सूरज घूमा करते। चंदा तारो की फीकी सी रोशनी टिमटिम करती रहती। एक लड़का रोज चंदा को बांसुरी बजा कर सुनाया करता था क्योंकि वह सूरज की तरफ जाता तो गर्मी से झुलसने लगता परंतु चंदा के पास आता तो उसे शीतलता अनुभव होती। दोनो में दोस्ती हो गई। 

लड़का रोज जंगल में शिकार करके लाता उसकी मॉं पका देती थी। एक दिन जब वह शिकार खेलने गया तो चंद्रमा को बॉसुरी सुनाने में अधिक समय लग गया। शिकार करने गया तो कुछ मिला ही नही। एकाएक एक जगह उसे एक हिरणी दिखाई दी वह गर्भवती थी। जैसे ही उसने निशाना बॉधा हिरणी बोली कि वह बच्चे को जन्म देने वाली है अगर उसे न मारे तो वह उसे ऐसी बात बतायेगी जो किसी को मालूम नही है और बहुत काम की है 

लड़के ने धनुष नीचे कर लिया हिरणी बोली ,‘आज रात को अंधकार होते ही चारों ओर पानी ही पानी हो जायेगा। पृथ्वी जलमग्न हो जायेगी। तुम सात दिन का खाना लेकर एक किश्ती में जो मेरी बात का विश्वास करले उसके साथ बैठ जाना। जलप्रलय के समय सब मनुष्य समाप्त हो जायेगें तुम बच जाओगे।’ उसके बाद लड़के को कोई शिकार नही मिला घर पर मॉ आग जलाये बैठी इंतजार कर रही थी। वह लड़के को खाली हाथ देखकर उस पर खूब चिल्लाई। लड़के ने मॉ को हिरणी की बात बताई तो उसे विश्वास नहीं आया। 

वह बाहर बैठकर किश्ती बनाने लगा। पड़ोस की एक लड़की ने लड़के को किश्ती बनाते देखा तो कारण पूछा लडके ने उसे हिरणी की बात बताई तो वह भी अपने लिये सात दिन का खाना लेकर आ गई। शाम तक किश्ती तैयार हो गई। लड़का और लड़की उसमें खाना लेकर बैठ गये। सब लोग आते जाते उनका मजाक उड़ाते पर लड़का लड़की हिरणी की बात का विश्वास कर बैठे ही रहे जैसे ही अंधेरा हुआ एकदम बिजली कड़की और धमाके से बरसात शुरू हो गई। 

सारी पृथ्वी जलमग्न हो गई समस्त गॉव वाले डूब गये परंतु लड़का लड़की किश्ती मे बैठे अंजीर के पेड़ पर पहॅुच गये। सात दिन तक पानी बरसता रहा अंत में सातो सूर्य निकल आये चंद्रमा भी अपनी शीतल चंदनी लिये एक तरफ टिमटिम करने लगा। सितारे उसके चारों ओर घूमने लगे। परंतु बरसात के बाद सातो सूर्याें की रोशनी बहुत प्रखर हो गई। जल्दी ही सारा पानी सूख गया। पेड़ पौधे झुलस गये सारी धरती सूखने लगी। लड़का गर्मी के कारण झुलसने लगा। उसने अपनी परेशानी चंद्रमा को बताई। 

कुछ देर तक तो चंद्रमा सोचता रहा। फिर उसने उपाय सोचा और इन्द्र इन्द्राणी से कह रहे थे कि आज पूर्णिमा के दिन जो अपने से छोटे को खालेगा वो दूसरे दिन अधिक बलवान होकर निकलेगा । चंद्रमा ने सुनकर कुछ सोचा और सबसे बड़े भाई सूरज के पास पहुॅचा और बोला ,‘ भाई तुमने सुना क्या?’ सूरज बोला,‘ क्या ?’ चंद्रमा ऐसे बोला जैसे रहस्य की बात बता रहा हो 

आज मैं अपने सारे पुत्र तारों को खा जाऊॅगा तो मै ये दूसरे दिन मेरे मुॅह से और भी अधिक विशाल और बलवान होकर निकलेगें यह कहकर उसने तारों को खाना शुरू कर दिया। चंद्रमा छोटा था धीरे धीरे उसने एक दो तारों को मुॅंह में रखना शुरू कर दिया। उसकी देखा देखी सूरज ने जल्दी जल्दी अपने छः भाइयों को खा लिया। जब चंद्रमा ने देखा कि सूरज अपने भाइयों को खा चुका है तो झट से मुॅह में दबाये तारों को उगल दिया और खिलखिला कर हंस पड़ा । उधर छः सूर्याे के कम हो जाने से लड़के ने बहुत राहत महसूस की ओर पृथ्वी की जलन भी कम हो गई। कहीं कहीं थोड़ा पानी बच रहा था। बच गया लड़के ने चंद्रमा को बहुत बहुत धन्यवाद दिया। परंन्तु सूरज ने जब चंद्रमा को हॅसते देखा तो वह गुस्से से लाल हो गया। और चंद्रमा को खाने लपका। चंद्रमा ने झटपट अपने बेटों को समेटा और भाग चला। 

तबसे आज तक सूर्य चंद्रमा का पीछा कर रहा है और चंद्रमा दिन में न निकल कर तारों के साथ रात में निकलता है ।  


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