Friday, 1 August 2025

chathi seekh

 चौथी सीख

एक राजा के एक पुत्र था। राजा की बहुत इच्छा थी कि राजकुमार पढ़ लिख कर विद्वान बने जिससे राज्य काज आसानी से कर सके। लेकिन राजा का बातों पर राजकुमर ने कभी ध्यान नहीं दिया। बड़े होने पर राजकुमार को अपनी बचपन की भूलों का बहुत दुःख हुआ। उसने भूल सुधारने की सोची। ज्ञान प्राप्त करने की कोई उमर नहीं होती उसने सोचा और अपनी पत्नी को बता कर व तीन गिन्नी लेकर वह विद्या प्राप्त करने चल दिया।

चलते चलते उसने एक वृद्ध व्यक्ति को देखा। वह तम्बाकू के खेत में काम कर रहा था। राजकुमार ने उससे पूछा कि कोई एक ऐसा व्यक्ति है जो उसे ज्ञान दे सके। वह ज्ञान की गुरुदक्षिणा हेतु सोने की गिन्नी देगा। वृद्ध व्यक्ति बोला कि प्रति गिन्नी वह एक एक ज्ञान की बात बताने के लिये तैयार है। तीन गिन्नी के बदले तीन बातें बतायेगा। राजकुमार तैयार हो गया तो वृद्ध बोला, ध्यान से सुनो, तुम राज पुत्र हो अगर मित्र या किसी के भी घर जाओ तो आसन खिसकाए बिना कभी न बैठना, अब मुझे एक गिन्नी दो ।

दूसरी नसीहत यह है, वृद्ध ने कहा, तुम राज पुत्र हो जब कभी स्नान करो सामान्य स्नान गृह में कभी न नहाना। अपने नहाने का प्रबन्ध हमेशा अलग ही रखना। अब मुझे दूरी गिन्नी दे दो।

मेरी तीसरी बात यह ध्यान रखना यदि तुम्हारे पाास न्याय हेतु कोई आये तो यह ध्यान रखना जिधर के पक्ष में अधिक व्यक्ति हो उधर ही की बात मानना, राजकुमार ने तीनों गिन्नियाँ वृद्ध को दे दी।

तुम्हारी शिक्षा पूर्ण हो चुकी है लेकिन एक नसीहत मैं तुम्हें मुफ्त देता हूँ। तुम राजपुत्र हो अगर गुस्सा आये तो प्रकट न होने दो, गुस्से में कोई निर्णय न लो पहले पूरी बात सुनो उसे तोलो तब निर्णय लो।

राजकुमार खाली हाथ वापस चल दिया, मन ही मन पछता रहा था कि उसने फालतू बातों के लिये अपनी तीन बहुमूल्य गिन्नियाँ खो दी। चलते चलते राजकुमार एक शहर में पहुँचा। राजकुमार को भूख लगी थी। वह एक दुकान पर पहुँचा। दुकानदार ने एक कालीन की ओर इशारा करते हुए कहा, बैठो।

राजकुमार को वृद्ध की पहली नसीहत याद आई, उसने कालीन खींचा तो देखा उसके नीचे एक कुँआ था। दुकानदार अजनबियों को वहाँ बिठाकर कुए में गिरा देता था। उसके बाद उन्हें लूट लेता था। उसे वृद्ध की बुद्धिमत्ता पर विश्वास हो गया।

आगे चला तो एक तलाब दिखाई दिया। उसने सोचा नहाया जाये। वृद्ध की बात याद आई उसने जहाँ सब नहा रहे थे वहाँ नहाकर जरा आगे जाकर नहाया। आगे बढ़कर उसे याद आया कि वह अपनी मोतियों की माला भूल आया है लौटकर उसने देखा तो उसे पड़ी मिल गई। सार्वजनिक स्थान पर तो कोई भी ले गया होता।

रात होने पर एक गाँव में गया एक किसान से कहा कि उसे अपने बरामदे में सोने दे। बरामदे में एक व्यक्ति और सोया हुआ था सुबह वह मृत पाया गया। अब गाँव वालों ने विचार करके निष्कर्ष निकाला कि मृत व्यक्ति के शरीर को जंगल मे फेंक दिया जाये। चूंकि राजकुमार भी यात्री था इसलिये वही उसे जंगल में फेंक कर आये। पहले तो राजकुमार ने मना किया फिर उसे वृद्ध की तीसरी नसीहत याद आई कि सबकी इच्छा के विरुद्ध कार्य न करे। वह मृतक को जंगल में खींचता हुआ ले गया। जंगल में लाश फेंकने से पहल उसने मृतक की तलाशी ली उसे रुपयों से भरी थैली मिली वह उसने ले ली।

शाम तक वह अपने राज्य की सीमा में पहुँच गया महल में पहुँचते आधी रात बीत गई बिना किसी को जगाये राजकुमार महल मेें पहुँचा उसने पत्नी के साथ किसी को सोते देखा। गुस्से में उसने तलवार खंींच ली। पर उसे वृद्ध की चौथी नसीहत याद आई, उसने पत्नी को जगाया, हड़बड़ा कर पत्नी उठी। पति को देखकर प्रसन्न हुई उसी समय दूसरे व्यक्ति ने भी चादर हटा कर  देखा ।देखा वह उसका पुत्र था सोचा आज वृद्ध की नसीहत की वजह से वह निर्दोषों की हत्या करने से बच गया। जिन्दगी भर राजकुमार वृद्ध की बातों पर अमल करता रहा और बहुत सी मुसीबतों से बचता रहा।


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