ष् आओ हम बच्चा हो जायेंष्
कोराना की वजह से छुट्टियाँ हो गई मां बाप की आफत आगयी गर्मियों की छुट्टियाँ तो दो महिने की होती हैं होते ही झगड़ा टंटा शुरू हो जाता है।यह तो पता ही नहीं कब स्कूल खुलेंगे। सब कुछ गड़बड़ सब कुछ झाला। न सोने का ठीक न जागने का। स्कूल बंद होने वाले है सोचकर ही मांओ को झरझुरी आ जाती है । सारा दिन ऊधम न तकिये का पता होगा न चादर का घर तो लगेगा ही नहीं कि साफ हुआ है । जिंदगी मंे चलते चलते जैसे तूफान आ जाये। सबसे पहला नियम सुबह उठने का टूटेगा। पाँच बजे बच्चों को तैयार कर बच्चों केा स्कूल भेजने के बाद चाय की चुस्कियों के बीच अखबार या एक झपकी नींद एऔर दस बजे तक काम खत्म कुछ शापिंग वापिंग लंच ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण् टीवी सीरियल कुछ काम। दोपहर तक जिंदगी सैट हो जाती है बच्चे आये खाना हुआ बच्चो के पंसदीदा चैनल चले मतलब एक रुटीन लाइफ सब कुछ फायदे में एक नियम के चलते। कामकाजी महिला तो उनका भी अपना रुटीनण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण् लेकिन छुट्टियाँ बाप रे बाप ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण् एक तूफान ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण् एक झंझावात जो सुबह से सब कुछ बिगाड़ देता है । नौ बजे तक बच्चे हिलने का नाम नहीं लेतेण्ण्ण्ण्ण्
No comments:
Post a Comment