व्यापारी की बेटी
बात कुछ पुरानी है, एक व्यापारी ने अपनी छत की मरम्मत के लिये एक राज बुलाया। जिस समय राज छत का काम कर रहा था व्यापारी अपनी युवा पुत्री कंगना के साथ छत की मरम्मत का काम देखने आया। राज ने व्यापारी की बेहद सुन्दर लड़की देखी तो उसे देखता ही रह गया। काम करता जाता और चोर नजरों से कंगना को भी देख लेता था। बार बार देखने से उसका ध्यान जरा चूका और उसकी उंगली एक स्थान से कट गई । खून बहते देख कंगना के मुँह से ऑह निकला तो व्यापारी ने भी ध्यान दिया और दासी बुलाकर व्यापारी ने राज की उंगली पर मलहम पट्टी करवा दी। राज ने समझा, कंगना भी उससे प्यार करने लगी है। घर आकर वह कंगना के ध्यान में खो गया। धीरे धीरे वह बीमार रहने लगा और सूखता चला गया।
राज की माँ पुत्र की दशा देखकर बहुत परेशान हुई। उसने पुत्र को वैद्य को दिखाया परन्तु किसी प्रकार का लाभ नही हुआ। वैद्य ने कहा कि कोई बात तुम्हारे बेटे के मन में उमड़ घुमड़ कर रही है। माँ ने प्यार से दुलार से बेटे से पूछा कि आखिर ऐसी क्या बात हो गई है जो वह इतना चिन्तित है।
‘माँ ! अगर तुम मेरे कहे अनुसार करो तब तो मैं तुम्हें बताऊँ नहीं तो कोई फायदा नही,’ राज की माँ ने वादा किया कि वह उसके कहे अनुसार करेगी।
तब राज ने बताया वह कंगना से प्यार करने लगा है और उससे शादी करना चाहता है।
उसकी माँ बहुत उलझन में पड़ी, ‘हम यह सब कर कैसे पायेंगे। कंगना बहुत बड़े व्यापारी की बेटी हैै और तुम एक साधारण राज, कहीं भी तो मेल नहीं है।’
राज ने कहा, ‘माँ ! तुम ने मुझसे वादा किया था।’
‘वादा किया था यह तो ठीक है पर कहीं कहने का मुँह तो हो मुझे पागल खाने में और डाल दिया जायेगा। यह मैंने माना कि तुम अच्छे से राजकुंवर की तरह सुंदर सलोने हो पर हर माँ को अपना बच्चा सबसे अच्छा लगता है, परन्तु यहाँ आकर क्या इस टूटी खटिया पर उसे बिठाओगे, हम कैसे उसका निर्वाह कर पायेंगे।’
‘माँ यह सब बाद की बात है, तुम ऐसा करो,’ राज ने कहा,‘ तुम एक लकड़ी लेकर व्यापारी का दरवाजा खटखटाना, जब तक कि कोई बाहर न आ जाये, तुम कहना मुझे बस व्यापारी से बात करनी है, उसके आने पर मेरी इच्छा बताना, सुनकर अवश्य वह दरवाजा बंद कर लेगा। फिर तुम रोज जाना, अंत में झुंझला कर एक दिन अवश्य वह दरवाजा खोलकर तुम्हें बुलायेगा।’
उसकी माँ व्यापारी के दरवाजे पर जाकर दरवाजा खटखटाने लगी। सेवक ने द्वार खोल और राज की माँ को जाने के लिये कहा लेकिन माँ ने कहा वह व्यापारी से बात किये वगैर नहीं जायेगी। तंग आकर व्यापारी ने पूछा, आखिर वह चाहती क्या है।
‘महोदय , मेरे पुत्र ने जब से आपकी पुत्री को देखा है वह उससे प्रेम करने लगा है, अगर उससे शादी नहीं हुई तो वह मर जायेगा।’
व्यापारी कुछ देर सोचता रहा फिर बोला,‘ ठीक है मैं शादी तो कर दूंगा लेकिन तुम्हारे पुत्र को पहले तीन बहुमूल्य वस्तुऐं लानी पड़ेंगी। ये तीन चीजें हैंः पहली अजदहे के मुँह का मोती, दूसरी सुनहले कछुए का खोल, और तीसरी है सुनहला शेर। अगर ये तीनों चीजें वह ले आया तो मैं अपनी पुत्री की शादी उससे कर दूंगा।’
माँ के घर पहुंचते ही लड़का उठ कर खड़ा हो गया और पूछने लगा कि क्या हुआ
‘ व्यापारी शादी करने के लिये तो तैयार है, ’निराशा से सिर हिलाते हुए माँ ने कहा, ‘लेकिन आशा नहीं है तीन अनमोल वस्तुऐं चाहिये, अजदहे के मुँह में मोती, सुनहले कछुए का खोल, और सुनहला शेर। ये तीनों वस्तुऐं मिलने पर ही वह तुमसे अपनी पुत्री की शादी करेगा।’
‘अरे! ये तो बहुत आसान है। ’ लड़का बोला ,‘मैं जाकर ले आऊँगा।’
उसने पश्चिम की तरफ यात्रा प्रारम्भ कर दी क्योंकि उसने सुना था अनमोल वस्तुऐं पश्चिम की तरफ ही मिलती है।
उसे यात्रा करते करते कई दिन बीत गये, एक दिन उसे रास्ते में एक अजदहा मिला वह बोला, ‘तुम किधर जा रहे हो, अब आगे यहाँ से नहीं जा सकते।’
‘क्यों ? ’राज ने पूछा तो, अजदहा फुफकारते हुए बोला, ‘तुम बुद्ध प्रदेश में जा रहे हो, वह पश्चिमी स्वर्ग है वहाँ तुम्हें बुद्ध अवश्य मिलेंगे, अगर उनसे एक प्रश्न मेरे लिये पूछो तो में जाने दूंगा,’‘ बुद्ध मिलेंगे तो जरूर पूछूंगा बताओ।’ युवक बोला। ‘तुम इस स्थान का नाम बताकर पूछना कि वहाँ रहने वाला अजदहा सैंकड़ों वर्षों से तुम्हारी सेवा कर रहा है फिर भी स्वर्ग क्यों नहीं जाता।’ राज ने उसे आश्वासन दिया वह अवश्य बुद्ध से उसका प्रश्न पूछेगा और आगे चला।
काफी दूर चलने पर उसे एक विशाल कछुआ मिला। उसने अपना शरीर रास्ते में फैला लिया और राज का रास्ता रोक लिया। राज ने कहा कि उसे जरूरी काम से जाना है।
‘ जाने तो दूँ, पर बुद्ध भगवान् से मेरी एक मुश्किल का हल पूछ लो तो जाओ।’ कछुऐ ने कहा ।
‘मुझे अपनी परेशानी बताओ में भगवान बुद्ध से अवश्य पूछूंगा।’
‘तुम बुद्ध से पूछना कि अमुक स्थान पर रहने वाला कछुआ एक हजार साल से सत्कर्म करते हुए रह रहा है फिर भी उसे स्वर्ग क्यों नही जाने दिया जाता।’ राज ने वादा किया वह बुद्ध से उसका प्रश्न जरूर पूछेगा और आगे बढ़ा।
करीब पन्द्रह दिन तक वह चलता रहा। जंगल घना होता गया, उसे एक मन्दिर दिखाई दिया। वह आराम करने के लिये, वहाँ रुक गया। अंदर जाकर देखा भगवान की मूर्ति के आगे एक लम्बे लम्बे सुनहरे बालों वाला शेर बैठा है। राज एकदम चौंक गया क्योंकि उसे सुनहला शेर ही चाहिये था। उसने शेर से सहायता की प्रार्थना की तो शेर तैयार हो गया। राज ने कहा कि शादी के दिन आकर उसके ससुर के सामने बैठ जाये बस। यह कहकर आगे बढ़ गया।
चलते चलते वह बु़द्ध भगवान के सामने पहुँचा उसने बुद्ध के सामने शीश नवाया। भगवान् ने उसे आशीर्वाद दिया और कहा जो पूछना है पूछो। राज ने अजदहे और कछुए की समस्याऐं बुद्ध को बताई तो वे बोले,‘ उस अजदहे के मुँह में दो मोती है जब कि अन्य अजदहों के मुँह में एक ही मोती होता है एक मोती थूक दे तो वह स्वर्ग चला जायेगा। कछुए के खोल के अंदर एक सुनहला खोल है जो बहुत खुरदुरा है अगर वह खोल फेंक दे तो वह स्वर्ग चला जायेगा।’
राज इन दोनों उत्तरों को सुनकर बहुत प्रसन्न हुआ क्योंकि उसे वे ही दोनों वस्तुऐं चाहिये थी। उसने बुद्ध को धन्यवाद दिया और वापस घर के लिये चल दिया। रास्ते में उसने कछुए और अजदहे को उनकी समस्या का हल बताया और कछुए से खोल और अजदहे से मोती लेकर आगे बढ़ा।
घर आते ही उसने दोनों चीजें व्यापारी को सौंप दी और सुनहले शेर के लिये वादा किया कि वह शादी के दिन देगा। अब तो अपनी पुत्री की शादी राज से करनी पड़ी। सुनहला शेर शादी के दिन उपस्थित हुआ। मेहमान तीनों अलभ्य वस्तुओं को देखकर चकित रह गये शादी के बाद राज घर पर ही रहने लगा। वह एक घन्टे के लिये भी पत्नी को सामने से नहीं हटने देता।
एक दिन पत्नी ने पूछा ,‘तुम काम करने क्यों नहीं जाते’
तो राज बोला,‘ मैं तुमसे अलग नहीं रह सकता।’
‘ऐसा करो, ’पत्नी बोली, ‘मैं अपनी एक तस्वीर बनाऊँगी उसे अपने साथ ले जाया करना। तस्वीर में तुम मुझे देखना और मैं तुम्हें हमेशा देखती रहूँगी।’
तब से राज जहाँ भी जाता पत्नी का चित्र साथ ले जाता। एक दिन हवा का तेज झोंका आया और तस्वीर हवा में उड़ गई राज उसके पीछे भागा लेकिन हवा उसे एकदम उड़ा ले गई। उड़ते उड़ते तस्वीर राजमहल में जाकर गिरी। राज वहाँ टहल रहा था उसने तस्वीर देखी, ‘क्या इतनी सुंदर लड़कियाँ भी हैं।’ राज ने हिजड़े से पूछा, ‘अगर इतनी सुंदर लड़की है तो उसे ढूँढ़ो में उसे अपनी पत्नी बनाऊँगा।’
हिजड़ा घर घर जाकर उसे ढूढ़ने लगा। अंत में से राज की पत्नी का नाम पता मिल ही गया। वह वहाँ पहुँच गया और राजा का संदेश सुना दिया। राज की पत्नी राज से बोली, ‘आप दुःखी मत होइये तीन साल बाद एक छः फुट लम्बी प्याज और मुर्गों के चूजों से बनी पोशाक पहन कर आना तब सब ठीक हो जायेगा।’
राज की पत्नी महल में आ तो गई लेकिन चेहरा पथरीला हो गया। न कभी हंसती न मुस्कराती। राजा से भी मिलने से उसने इंकार कर दिया। कहलवा दिया उसकी तबियत खराब है। धीरे धीरे राजा की उत्सुकता उसमें समाप्त हो गई और वह अपने महल में अकेली रह गई। समय तेजी से बीतने लगा। तीन साल गुजर गये। दिन रात करके राज ने मुर्गे के चूजों के पंखों की पोशाक सिली और छः फुट लम्बी प्याज का डंडा बना कर महल के सामने गया। उसे देखकर उसकी पत्नी खिलखिला कर हंस पड़ी। राजा यह देखकर हैरान रह गया वह बोला, ‘मैंने तुम्हें तीन साल से हंसते नहीं देखा लेकिन इस बेवकूफ जैसे दिखने वाले व्यक्ति को देखकर कैसे हंस पड़ी।’
हंसते हंसते वह बोली, ‘अगर आप भी चूजों के पंखों की पोशाक पहन कर और प्याज का डंडा लेकर निकलें तो मुझे ऐसे ही आप को देखकर हंसी आयेगी।’
राजा ने सोचा रानी की खुश करने का बहुत आसान तरीका है उसने राज को इशारे से बुलाया अपने बढ़िया राजसी वस्त्र उसे पहनाये और उसकी पोशाक पहनकर प्याज का डंडा हाथ में लेकर सड़क पर निकल गया।
उधर राज की पत्नी ने हिजड़े को बुलाया ओर परों के वस्त्र पहनने वाले के सिर को कलम कर देने की आज्ञा दे दी। राजा को हिजड़ा उस पोशाक में पहचान ही नहीं पाया वह कुछ बोलता उससे पहले ही उसका सिर धड़ से अलग हो गया। राज राजा बन गया और वे सुख से रहने लगे।
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