Friday, 25 July 2025

Androcleege aur singh

 एन्ड्रोक्लीज और सिंह

दो हजार साल पहले ऐन्ड्रोक्लीज नाम का एक गुलाम रोम में रहता था। वह दयालु लड़का था। वह अपने अत्याचारी मालिक से बहुत डरता था। क्योकि मालिक गुलामों की छोटी से छोटी गलती की सजा कोड़ों से पीटकर देता था। ऐन्ड्रोक्लीज अपने मालिक के साथ अफ्रीका की यात्रा पर था उसने स्वतन्त्र होने का निश्चय किया। वह भाग गया। 

ऐन्ड्रोक्लीज घने जंगलों में भाग गया क्योकि वह जानता था वहाँ कोई भी उसका पीछा नही करेगा। उसके शरीर पर हलका सा झोगा था और पैर नंगे थे ।न ही किसी प्रकार का कोई हथियार था। ऐन्ड्रोक्लीज भागता चला गया । भागते भागते अंघेरा हो गया।वह थककर एक गुफा में लेट गया और गहरी नीद सो गया। जब सुबह होने लगी उसकी आँख खुली साथ ही उसे भयानक गुरहिट सुनाई दी जो गुफा में ही गूँज रही थी। मानों भूकम्प आ रहा हो। ऐन्ड्रोक्लीज ने देखा एक विशाल शेर गुफा के मुँह पर बैठा गुर्रा रहा है। 

शेर बिना आगे पीछे बड़े लगातार गुर्राये जा रहा था। ऐन्ड्रोक्लीज इंतजार करने लगा कि कब शेर उस पर हमला करे लेकिन तभी उसने देखा शेर के अगले पंजे से खून बह रहा है। 

‘वह घायल हो गया है शायद वह मुझ पर नही गुर्रा रहा वह दर्द से छटपटा रहा है बेचारा जानवर’ ऐन्ड्रोक्लीज बुदबुदाया। वह धीर धीरे सरक कर शेर के पास यह देखने पहुँचा कि किस बजह से खून बह रहा है। उसने देखा एक बड़ा काँटा उसके पैर में धंसा हुआ है। जिस बजह से उसके खून बह रहा है और दर्द हो रहा था। ऐन्ड्रोक्लीज शेर से बहुत प्यार से जैसे किसी दर्द से छटपटाते बच्चे से बोलते हैं बोलने लगा। 

‘देखो मैं कोशिश करता हूँ तुम्हारी सहायता कर सकूँ। ’उसने कहते हुए उसका घायल पंजा उठा लिया। बहुत सावधानी से उसने काँटा बाहर निकाल दिया। संभवत शेर समझ गया कि ऐन्ड्रोक्लीज उसकी सहायता कर रहा है जब काँटा बाहर निकल गया तो शेर ने अपनी खुरदुरी जीभ से प्यार से ऐन्ड्रोक्लीज का चेहरा चाटा।

ऐन्ड्रोक्लीज और शेर दोस्त बन गये। वे भाई भाई की तरह रहने लगे। शेर खरगोश हिरन मार कर लाता। ऐन्ड्रोक्लीज ने शेर को मारने से पहले मछली पकड़ना सिखाया। ऐन्ड्रोक्लीज झाड़ियो पर से फल तोड़ता खाता, शेर भी फल खाना सीख गया था लेकिन पसंद हिरन का माँस ही करता था। 

एक दिन ऐन्ड्रोक्लीज गुफा के पास अकेला बैठा था। एक रोमन सैनिकों की टुकड़ी वहाँ से गुजरी जो भागें हुए गुलामों की ही खेाज कर रही थी। वह टुकड़ी़ ऐन्ड्रोक्लीज को पकड़ कर ले गई। उन दिनों भगोड़े गुलामों को खूखांर जानवरों के आगे डाल दिया जात था। खूखांर जानवरों और मनुष्यों के लड़ने का खेल उन दिनों का सबसे अधिक प्रिय खेल था। कभी कभी हथियार बंद आदमी भी खूखांर जानवरों से लड़ते थे। जानवरों को ताकतवर बनाये रखने के लिये भगोड़े गुलामों को उनके आगे फेंक दिया जाता था। 

अंत में एक दिन ऐन्ड्रोक्लीज को भी भूखे शेर के सामने फेंके जाने का दिन आ गया। सारे रोमन वासी घेरे के चारों ओर बैठे उत्सुकता से देख रहे थे। ठहाके गूंज रहे थे ऐन्ड्रोक्लीज घेरे में लाया गया और दूसरे दरवाजे से एक विशाल भूखा शेर लपकता आया। ऐन्ड्रोक्लीज ने अपनी आँखें बंद कर ली और मौत का इंतजार करने लगा। एकाएक चारों ओर की हँसी चीख चिल्लाहट रूक गई और सब दम साधकर देखने लगे। पहले उन्हें अपनी आँखों पर विश्वास नही हुआ। शेर ऐन्ड्रोक्लीज के टुकड़े टुकड़े करने के स्थान पर उसके सारे शरीर को जीभ से चाट रहा था और खुशी से कूद रहा था जैसे कुत्ता हो। यह ऐन्ड्रोक्लीज का अपना शेर था जो मित्र को पाकर खुश था। 

भीड़ ख्ुाशी से पागल हो उठी। उन्होनें समझा ऐन्ड्रोक्लीज जादूगर है और उसे भूखे शेरों को वंश में करना आता है। उन्होनें माँग की ऐन्ड्रोक्लीज को स्वतन्त्र कर दिया जाय। ऐन्ड्रोक्लीज सम्राट के पास ले जाया गया। सम्राट ने उसे जाने की आज्ञा देते हुए कहा कि वह गुलाम नही है साथ ही उसकी कोई इच्छा भी पूछी । ‘सीजर ’ऐन्ड्रोक्लीज ने झुकते हुए कहा,‘ मेरा मित्र शेर भी मेरे साथ जा सकता है क्या?’

सम्राट ने शेर को भी छोड़े जाने की आज्ञा दी। सब ने शेर और ऐन्ड्रोक्लीज को रोम की सड़कों पर साथ साथ जाते देखा। 



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