Monday, 21 July 2025

Dayalu pari

 दयालु परी और विरूपा

घने जंगल में पहाड़ी के ऊपर महल मेें एक बहुत ही क्रूर और अत्याचारी राजा रहा करता था। उसका पुत्र भी निर्दयी था। कोई भी राजा के डर से जंगल में अंदर नहीं जाता था, क्योंकि राजा उसे पकड़ कर गुलाम बना लेता था। एक दिन एक सुंदर कन्या विरूपा जंगल में रास्ता भूल गई, घूमते घूमते वह महल के पास आ गई। अंधेरा घिरने लगा था, डरी हुई कन्या महल के समीप घर का रास्ता पूछनें के लिये आई। महल का दरवाजा खटखटाया तो एक क्रूर और भयानक चेहरे वाले नौकर ने दरवाजा खोला, 

“मुझे बस्ती का रास्ता बता सकते हो“ विरूपा ने पूछा। 

“नहीं मुझे नहीं मालुम हॉं मै मालिक को बुलाता हूॅ, शायद उन्हें पता हो, नौकर ने कहा। 

नौकर दरवाजे को धड़ाम से बंद करके चला गया, कुछ देर बाद एक बहुत ही क्रूर दिखने वाले आदमी ने दरवाजा खोला उसके पीछे वह नौकर भी झांक रहा था, वह बोला तुम घर से बहुत दूर हो अंधेरा हो गया है इसलिये इस समय तो घर नहीं जा सकती हो मेरे पीछे आओ तो मैं तुम्हें रात भर टिकने का ठिकाना बता दूॅ। 

कन्या उसके चेहरे को ही देखकर सहम रही थी सहमी सहमी उसके पीछे गईं। काफी दूर तक अंधेरे में चलने के बाद एक बहुत ही हल्की रोशनी वाले कमरे में पहुॅचें। कमरा सुदंर सजा हुआ था। वहॉं दो नौकर थे। राजा ने विरूपा को खाना देने के लिये कहा तथा सोने की जगह बताने के लिये कहकर चला गया। खाने के बाद उसे सोने के कमरे में पहुंचा दिया जहॉं वह अकेली रह गई। 

पलंग बहुत आराम दायक था लेकिन विरूपा को अपने घर की अपने मॉ बाप की बहुत ही याद आ रही थी। उसे चिन्ता भी हो रही थी कि मॉं बाप बहुत परेशन होंगे। वह आदमी भी कुछ अच्छा नहीं नजर आ रहा है क्या करूॅं वह बुड़बुड़ाई उसे सारी रात नींद आई, वह रोती और सिसकती रही। 

सुबह होते ही वह नीचे उतरी वहॉं राजा और उसका लड़का मिला उन्होने उससे नाश्ता करने के लिये कहा तो उसने मना कर दिया और कहा,“ बस मुझे घर जाने का रास्ता बता दीजिये। 

राजा ने उसे गुस्से से घूरा और कहा,“लड़की हमारे लड़के को तुम बहुत पसंद आई हो इसलिये अब हम तुम्हें घर नहीं जाने देगें। 

“विरूपा की आंखों में ऑंसू भर आये वह गिड़गिड़ाते हुए बोली, “नहीं मैं आपसे प्रार्थना करती हूॅ। मुझे आप घर जाने दो। 

“नहीं तुम घर नहीं जाओगी तुम मेरे लड़के से शादी करोगी,“राजा ने कहा राजा ने उसे तरह तरह की सुंदर वस्तुऐं भेंट देनी चाही पर विरूपा शादी के लिये कैसे भी तैयार नहीं हुई। गुस्से में आकर राजा ने महल के एक कमरे में लड़की को बंद कर दिया और आज्ञा दी जबतक विरूपा शादी के लिये तैयार न हो जाये ताला न खोला जाये, और लड़की से कहा,“ अगर तुम शादी नहीं करोगी तो तुम्हें मौत के घाट उतार दिया जायेगा। 

विरूपा फूट फूट कर रोने लगी। रोते रोते उसे लगा कोई खिड़की पर हल्के से थपथपा रहा है। खोलने पर खिड़की की चौखट पर एक बहुत सुंदर युवती खड़ी है। युवती ने लड़की से रोने का कारण पूछा तो लडकी ने बताया “अगर कल तक मैने राजा के लड़के के साथ शादी करने के लिये हॉ नही की तो राजा मुझे मौत के घाट उतार देगा। 

सुंदर युवती बोली, रोओ मत मेरे पीछे आओ“

वह युवती खिड़की के रास्ते अंदर आई और दरवाजा खोला और एक अधेंरे गलियारे में होती हुई महल के द्धार पर आई। युवती ने हाथ हिलाया और द्धार पर बैठै पहरेदार को नींद आ गई और चुपचाप वे लोग द्धार पर जंगल में आ गई। 

अभी कन्या बाहर निकली ही थी कि राजा ने नौकर को विरूपा को देखने के लिये भेजा। नौकर कमरे में घुसा तो देखा लड़की गायब थी। राजा कुŸाा और नौकर को ले लड़की को ढूंढने निकला। 

लड़की ने युवती से पूछा वह कौन है तो युवती ने बताया, मै एक परी हॅॅू। तुम्हें सहायता के लिये रोते देखा, इसलिये सहायता करने चली आई, पर अब मुझे तुम्हें यहीं छोड़कर जाना पड़ेगा। 

विरूपा सुनकर परेशान हो गई,“मुझे रास्ता तो मालुम नहीं है क्या तुम मुझे घर का रास्ता नहीं दिखाओगी। 

परी ने उसे एक अंगूठी दी और कहा, देखो यह अंगूठी लो और एक रिबन उस पर कस कर बॉध दो और इसे हमेशा अपने पास रखो यह तुम्हें पहुॅचा देगा, लेकिन ध्यान रखना अगर यह खो गई तो तुम फिर रास्ता भूल जाओगी और राजा तुम्हें पकड़ लेगा। यह कहकर परी अदृश्य हो गई। 

परी के जाने से विरूपा जंगल में घबड़ाने लगी फिर अंगूठी अपने सामने रखकर चलने लगी अंगूठी तैरती हुई उसके आगे आगे चल दी। 

कुछ दूर चलने पर उसे जंगल में सुंदर फूल खिले दिखाई पड़े वह उन्हें तोड़ने केे लिये रूक गई। फूल इक्कठ्ठा करते उसके हाथ से अंगूठी गिर गई। उसने बहुत ढूढने की कोशिश की लेकिन अंगूठी आगे बढ़ी। चलते चलते वह एक नदी के किनारे आई। उसकी समझ में न आया नदी कैसे पार करें। 

अभी वह नदी के किनारे घूम रही थी कि उसे कुत्ते के भौकने की आवाज आई साथ ही राजा की आवाज भी। विरूपा घबड़ा गईं। परी ने अंगूठी ध्यान से रखने के लिये दी थी, और मैने उसे खो दिया अब राजा पकड़ कर महल में ले जायेगा। यह सोचकर लड़की रोने लगी। 

रोते रोते उसे गाने की आवाज सुनाई दी साथ ही परी दिखाई दी, परी बोली,लगता है तुमने अंगूठी खो दी। 

विरूपा बोली, मैं फूल तोड़ने रूकी थी, वहीं मुझसे अंगूठी खो गई, अब नहीं मालुम कहॉं जाऊ, यह नदी कैसे पार करूॅ। राजा और कुत्ते मुझे ढूढं रहे हैैं। 

परी गुस्से से बोली, तुम बहुत लापरवाह हो। मेरी बात पर ध्यान नहीं दिया। खैर मुझे तुम पर दया आ गई है और तुम्हें दूसरी अंगूठी देती हूॅं इसके पीछे जाना यह तुम्हें घर पहुंचा देगी। यह कहकर परी गायब हो गई। 

तब तक राजा और कुत्ता उसके बहुत नजदीक आ चुके थे। लेकिन विरूपा अंगूठी के पीछे चलती एक पुल पर पहुॅची। पुल पार करते ही उसे अपने घर का बाड़ा दिखाई देने लगा। जल्दी से वह घर में घुस गई। कुछ देर तक कुत्ता बाहर भौकंता रहा फिर राजा और कुत्ता वापस चले गये। परेशान मॉं बाप को उसने पूरी कहानी सुनाई और परी को बहुत धन्यवाद दिया।


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