रानी कोमल
बहुत दिन पहले की बात है किसी देश में एक राजा था , उसकी रानी बहुत सुंदर तथा कोमल थी। रात को वह फूलों की शैया पर सोया करती थी । एक दिन भूल से माली फूलों के साथ एक कली भी शैया पर बिछा गया । कली रानी के कोमल शरीर में गड़ गई। उसे बहुत देर तक नींद नहीं आई। वह उठ कर बैठ गई । राजा बोले,‘ रानी जी क्या बात है’ रानी बोली ,‘ महाराज ,यह कली शरीर पर चुभ रही थी इसलिये नींद नहीं आई। कल इस माली को दंड देना पड़ेगा’ । कली हटाकर रानी सो गई। दूसरे दिन राजा ने माली को बहुत डांटा और नौकरी से निकाल
दिया
दूसरी रात रानी को स्वप्न आया, उसे लगा कोई कह रहा है‘,‘ रानी आज एक कली के चुभने की वजह से तुमने माली को नौकरी से निकलवा दिया,जब बारह साल तक ईंटें ढ़ोनी पड़ेंगी ,तब क्या करोगी?’
रानी चौंक कर उठ गई । उसने राजा को स्वप्न सुनाया । राजा बोले ,‘ रानी जी स्वप्न तो आते रहते हैं, सो जाओ ।’ रानी सो गई।राजा के मंन्त्री के भी एक कन्या थी । मंन्त्री चाहता था कि राजा से उसकी कन्या का विवाह हो जाये पर यह भी जानता था कि जब तक रानी हैं राजा शादी नहीं करेंगे।
मंत्री ने एक दिन नदी में नहाती रानी को अंदर ही अंदर गोताखोरों से ख्ंिाचवा लिया । सब समझे रानी को मगर खींच ले गया । उघर मंत्री ने एक सुंदर से बक्से में बेहोश रानी को बिठा दिया । ताला लगाकर ताली उसी मेंलटका दी ।
बहते बहते बक्सा राजा की बहन कुंतल के देश में पहुॅंचा । राजा का बहनोई कीर्तिवर्मा नदी के किनारे सेवकों के साथ घूम रहा था । इतना सुंदर बक्सा बहते देख उसने सेवकों से मंगवाया । बक्सा खोला गया तो देखा उसमें रूपवती स्त्री लेटी है । राजा के बहनोई ने बक्सा वैसे ही बंद कर दिया और महल में भिजवा दिया और सेवकों से कह दिया कि संदूक तब तक न खोलें जबतक राजा न आ जायें।
सेवक संदूक महल में रख आये राजा की बहन को चैन नहीं आया ,ऐसी क्या वस्तु है जो उसके पति उससे छिपा रहे हैं । उसने चुपके से संदूक खोला तो देखा एक अत्यन्त रूपवती स्त्री लेटी है । रानी कुंतला ने सोचा न हो राजा इसे मेरी सौत बना कर लाये हैं । उसने रानी के सारे आभूषण उतरवा लिये ,फटी धोती पहना दी और कोयला शरीर पर पोत दिया । शाम हुई कीर्तिवर्मा महल में आये उन्होंने रानी कुंतला से कहा ,‘ आओ तुम्हें एक वस्तु दिखायें ।’
रानी कुंतला अनजान बन गई बोली ,‘ क्या दिखाओगे ’।
राजा बोले ,‘ आज यह संदूक हमें नदी में बहता मिला । देखो इसके अंदर क्या है?’
राजा ने संदूक खोला तो भिखरिणी सी काली स्त्री को देखकर चौंक गये । नजाने क्या है ? उन्होंने तो अत्यन्त रूपवती स्त्री देखी थी । उन्होंने कुतला से कहा ,‘ इसे अपनी बांदियों में रख लो न जाने कौन है ।’
रानी चुपचाप महल की अन्य बांदियों के साथ रहने खाने लगी बांदियों का काम करने लगी।
राजा कीर्तिवर्मा ने एक दूसरा विशाल महल बनवाने की सोची । महल के बहुत से सेवक और बांदियॉं ईंटें गारा ढ़ोने के काम पर लगा दी गई,उनमें रानी भी थी। बारह साल तक रानी ने ईंटें ढ़ोईं महल पूर्ण हुआ तो राजा कीर्तिवर्मा ने विशाल भोज का आयोजन किया समीप के सभी राजा महाराजा सामंत आदि निमंत्रित किये गये । रानी कुंतला ने भी अपने भाई के पास दूत भेजा कि भाई भाभी जरूर आवें । राजा रूपवर्मा भी आये । रात में रानी कुंतला ने रानी सुमति से कहा कि वह उसके भाई के पैर दबा आये । रानी सुमति पति को देखते ही पहचान गई।वह पैर दबाती जाती आंसू उसकी आंखों से गिरते जाते । एक बूंद राजा के पैरों पर गिर पड़ी । राजा चौंक गये बोले ,‘बांदी रोती क्यों है ।’
‘ कुछ नहीं महाराज ’ कहकर रानी पैर दबाने लगी ।
राजा बोले,‘ नहीं रानी अपने दुःख का कारण बता।’
रानी बोली,‘ नही महाराज कुछ बीता याद आ गया ।’
‘हमें भी सुना ’।
‘ महाराज कहा जाता है स्वप्न सच्चे नहीं होते लेकिन एक रानी का सपना सच हुआ। उसके बारह साल पहले ंएक कली शरीर में चुभ गई उसने माली को नौकरी से निकलवा दिया । रानी को स्वप्न दिखा कि एक कली चुभने से तो रानी तू इतनी परेशान हुई जब बारह साल ईंटें ढोयेगी तो क्या होगा ? उस रानी का सपना सच हुआ ।’
बादीं की बात सुन कर राजा चौंक गया उसने रानी का घूंघट हटाया रानी को देख वह बहुत खुश हुआ । राजा ने रानी से उसकी तकलीफों के लिये क्षमा मांगी । अपनी बहन और बहनोई को बुलाया बहन भाभी को न पहचान पाने के लिये बहुत लज्जित हुई । भाभी से क्षमा मांगी । राजा ध्ूामधाम से रानी को वापस लाया । मंत्री और उसकी पुत्री को देश निकाला दे दिया ।
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