चुडै़ल की बेटी
बड़े-बड़े पहाड़ों के बीच में फूस की झोंपड़ी में एक बूढ़ा अपने तीन बेटों के साथ रहता था। प्रतिदिन बूढ़ा लकड़ी लाने जंगल चला जाता था। एक दिन जंगल में सफेद कपड़े पहने एक बुढ़िया मिली। वह चौरस पत्थर पर बैठी शतरंज खेल रही थी। लकड़हारे को खुद भी शतरंज का शौक था वह रुककर खेल देखने लगा।
क्या तुम खेलोगे उस विधवा स्त्री ने पूछा
हाँ हाँ बूढ़ा बोला
किस शर्त पर खेलोगे बुढ़िया बोली।
बूढें ने लकड़ी के गठ्ठर को दांव पर लगाया।
नहीं खाली लकड़ी के गठ्ठर पर नहीं खेलूँगी। तुम्हारे कितने बच्चे है जब बुढ़िया को मालुम हुआ लकड़हारे के तीन पुत्र हैं तो वह प्रसन्न हो गई और बोली यह ठीक है मेरे तीन पुत्रियाँ है। अगर तुम जीत गये तो मैं उन्हें दुल्हन बनाकर तुम्हारे घर तुम्हारे तीनों पुत्रों से शादी करने भेज दूंगी। यदि तुम हार गये तो तुम्हारे तीनों पुत्र मेरे घर दामाद बनकर आयेंगे और वहीं रहेंगे। बूढ़ा कुछ देर सोचता रहा फिर रजामंद हो गया और दोनों शतरंज ख्ेालने लगे। बूढ़ा एक एक कर सब बाजियाँ हार गया।
बूढ़ी उठी और एक अंधेरी घाटी की ओर इशारा करती हुई बोली, मेरा घर वहाँ है कल अपने बड़े पुत्र को भेजना, तीन दिन बाद मझले ओर उसके तीन दिन बाद सबसे छोटे पुत्र को भेजना। बुढ़िया के जाने के बाद लकड़हारा बिना लकड़ियां लिये घर आया और तीनों पुत्रों को बताया। तीनों पुत्र सुनकर बहुत खुश हुए।
अगले ही दिन बड़ा पुत्र धाटी में गया । तान दिन बाद दूसरी पुत्र घाटी में गया तीन दिन बाद तीसरा सबसे छोटा पुत्र गया वह इधर उधर बुढ़िया का घर ढूँढ़ रहा था उसे एक छोटी सी झोंपड़ी दिखाई दी उसमें एक साधु बैठा था। साधु ने लम्बी सी दाढ़ी थी। उसे देखकर साधु बोला, पुत्र तुम किधर जा रहे हो।
छोटा पुत्र बोला, महाराज मैं एक बुढ़िया की सबसे छोटी पुत्री से विवाह करने जा रहा हूँ। मेरे दो बड़े भाई भी आ चुके है। जगह यहीं बताई थीं।
साधु बोला, पुत्र वह बुढ़िया एक चुड़ैल है और उसके एक ही लडक़ी है। उससे शादी का प्रलोभन देकर बहुत से युवकों को बुलाकर मार डाला। तुम्हारे बड़े भाई को उसके महल के बाहर खड़े शेर ने खा लिया है। और मझले भाई को उसके अंदर के दरवाजे पर पहरा देने वाले चीते ने खा लिया था। सौभाग्य से तुम मुझे मिल गये हो यह कह कर साधु ने एक लोहे का मोती निकाल कर उसे देते हुए कहा, इसे बाहर द्वार पर बैठे हुए शेर के सामने फेंक देना। तथा एक लोहे की छड़ देते हुए कहा,
इसे अंदर के दरवाजे की रखवाली कर रहे चीते के सामने फेंक देना। फिर साधु ने एक बलूत के पेड़ की डाल तोड़ कर झरने में डुबाया और उसे उसे देते हुए कहा, जब तुम तीसरे द्वार पर पहुंचो तब इससे द्वार ठेलना तुम अंदर सुरक्षित पहुँच जाओगे।
युवक ने साधु को धन्यवाद दिया और आगे घाटी की ओर बढ़ गया। शीघ्र ही उसे एक विशाल महल दिखाई दिया। बाहर द्वार पर शेर के सामने लोहे का मोती डाल दिया वह उसके साथ खेलने लगा। अंदर द्वार के सामने पहरा दे रहे चीते के सामने उसने छड़ डाल दी वह उससे खेलने लगा तीसरा द्वार कसकर बंद था जब छोटे पुत्र ने बलूत की डाली से उसे ठेला तो एक हजार किलो वजन का टुकड़ा गिरा और दरवाजा खुल गया। अगर उसके हाथ से दरवाजा खोला होता तो अवश्य दबकर मर गया होता।
चुड़ैल अपने कमरे में बैठी पोशाक सिल रही थीं, शोर सुनकर बाहर निकल आई। उसने बाहर आकर युवक को देखा, वह समझ गई कि यह लकड़हारे का तीसरा पुत्र है। उसे आश्चर्य हुआ कि युवक सब खतरे पारकर अंदर कैसे आ गया। लेकिन ऊपर से,खुश दिखाई देती हुई बोली, तुम बिलकुल ठीक समय पर आ गये। मेरे पास एक बोरी अलसी के बीज हैं जरा उसे खेत में वारिश से पहले बो आओ। वापिस आने पर मैं तुम्हारी शादी कर दूंगी।
युवक ने बाहर देखा काले बादल घिरे हुए थे किसी भी समय वारिश हो सकती थी। उसने बीजों का बोरा उठाया और बाहर खेत में निकल गया लेकिन खेत में तमाम घास फूस उगी हुई थी। युवक सोचने लगा बिना हल बैल के कैसे तो खेत जोता जाये और कैसे इतनी जल्दी बोया जाये। उसने हाथ से कुछ जंगली पौधे उखाड़ने की कोशिश की फिर थक कर सो गया। जब उसकी आंख खुली उसने देखा झुंड के झुंड घूस खेत को खोद चुके हैं। मिट्टी सब उलट पलट हो चुकी है उसने बीज बोया। घूसों को धन्यवाद दिया और बुढ़िया के पास वापस आ गया।
उसे वापस आया देख बुढ़िया परेशान हो गई। बोली, क्या काम खत्म हो गया। हाँ युवक ने कहा, लेकिन बुढ़िया बोली, क्या बीज बो आये। तुमने देखा नहीं कि बादल सब चले गये हैं चन्द्रमा चमक रहा है अब वारिश नहीं होगी बारिश नहीं होगी तो बीज फूटेगा नहीं और बेकार जायेगा। जाओ उन्हें बीनकर लाओ और ध्यान रहे एक भी बीज रह न जाये। वापस आओगे तभी शादी करा दूंगी। छोटे पुत्र ने खाली बोरा वापिस लिया और बीज ढूँढ़ने चल दिया। बड़ी देर तक बीज ढूंढ़ता रहा मुठ्ठी भर बीज भी नहीं मिले और झुके झुके उसकी कमर दर्द करने लगी। वह उदास चंद्रमा को देखने लगा कि वह आखिर निकल ही क्यों। एकाएक उसने देखा हजारों चींटियॉं जमीन में से एक एक बीज लेकर निकल आई और उसके बोरे में डाल दिये। और फिर से बीज लेने चलीं गई। कुछ ही देर में बोरा भर गया और वह चींटियों को धन्यवाद दे वापस आ गया।
बीज मिल गये बुड़िया के माथे पर बल पड़ गये।
हाँ लड़के ने कहा, बहुत ठीक बुढ़िया बोली, इस समय तो मैं सोने जा रही हूँ कल तुम्हें और काम दंूगी।
दूसरे दिन बुढ़िया बोली मैं छिप रही हूँ अगर तुमने मुझे ढूंढ़ लिया तो शादी कर दूंगी। यह कहते ही वह गायब हो गयी।
छोटा पुत्र उसे चारो ओर ढूंढ़ने लगा लेकिन कहीं भी दिखाई नहीं दी। वह निराश हो चला था कि उसे एक मधुर आवाज सुनाई दी। मेरी माँ बगीचे में छिपी है। वह दीवाल के पास लटके आधे हरे आधे लाल आडू की शक्ल में हैैं। हरा भाग उसकी पीठ है और लाल भाग मुँह। लाल भाग को काटना वह वापस आ जायेगी।
लड़के ने इधर उधर देखा कि कौन कह रहा है। ऊपर एक अधखिले कमल की गुलाबी पंखुड़ियों से गाल वाली सुंदर कन्या हरी पोशाक पहने खड़ी थी। वह समझ गण कि यह चुड़ैल की पुत्री है। वह जल्दी से बगीचे में गया वहाँ लटके आडू के लाल हिस्से को काटकर एक पत्थर पर पटक दिया। उसी क्षण मुँह से खून बहती बुढ़िया वहाँ खड़ी थी।
ओह पुत्र तुमने तो करीब करीब मुझे मार ही डाला वह बोली
‘ मुझे क्या मालुम तुम आडू बनी हुई हो। ’लड़के ने बुरा सा मुँह बनाया और बोला,‘ मैंने तो खाने के लिये तोड़ा था अच्छा नहीं लगा इसलिये फेंक दिया।’
लंगड़ाती बुढ़िया मुड़कर चली चलते चलते बोली, ड्रैगन राजा के यहाँ से सुलेमानी पत्थर का पलंग लेकर जाओ तब शादी होने दूंगी नहीं तो नहीं।
अभी यह बगीचे में मुँह लटकाये खड़ा था कि चुड़ैल की पुत्री वहाँ आई और उदासी का कारण पूछा।
तुम्हारी माँ ने ड्रैगन राजा का पलंग लाने के लिये कहा है, वह बोला, लेकिन उसके राज्य की सीमा में कोइ मनुष्य पैर नहीं रख सकता। धैर्य रखो। लड़की ने कहा, यह बहुत सरल है मेरे पास एक सोने का कांटा है तुम समुद्र में उससे लाइन खींचना और एक रास्ता बन जायेगा जो तुम्हें ड्रैगन राजा के महल तक पहुँचा देगा।
युवक ने कांटा लिया और समुद्र किनारे जाकर उससे पानी में लाइन बनाई तुरंत एक सड़क वहाँ दिखाई पड़ने लगी। युवक उसपर चलकर डैªगन राजा के महल तक पहुँचा उसने राजा से सफेद सुलेमानी पत्थर का पलंग मांगा। राजा के पास कई पलंग थे उसने अपने अनुचरों के साथ पलंग भिजवाया। वे बुढ़िया के महल के पास पलंग रखकर चले गये।
जब बुढ़िया ने देखा कि लड़का पलंग लेकर वापस आ गया है तो बोली, पश्चिम में बंदर राजा के पहाड़ पर से ड्रम लाओ उसे हम शादी पर बजायेंगे।
युवक जाने लगा तो बाहर बुढ़िया की पुत्री मिली, वह बोली, अब तुम्हें माँ ने क्या लाने के लिये बोला है।, बंदर राजा की पहाड़ी पर से उनका ड्रम चुराकर लाना है।
मैंने सुना है बेटी ने बताया कि बंदर राजा पश्चिमी स्वर्ग की यात्रा पर गया हुआ है, अभी वहाँ से वापस नहीं आया है। पहाड़ी से पहले एक मिट्टी की नदी है तुम उसमें बंदरों की तरह लुढ़कते जाना। छोटे-छोटे बंदर तुम्हें अपना पूर्वज समझेगे और घर ले जायेेंगे। मैं तुम्हें एक सुई, कुछ नीबू और तेल देती हूँ अपने साथ ले जाओ खतरा देखकर पहले सुई फिर नीबू फिर तेल फेंकना।
लड़का तीनों चीजें लेकर मिट्टी की नदी पर पहुँचा और उसमें लोटने लगा उसकी आंखे छोड़कर सारा शरीर मिट्टी में सन गया। वह जल्दी जल्दी पहाड़ी पर चढ़ा। छोटे बंदरों ने देखा तो चिल्लाए दादाजी आये हैं यह कहकर उसके चारों ओर एकत्रित हो गये और एक बड़ी सी डलिया में बैठाकर अपने रहने के स्थान पर ले गये लड़के ने ताली बजाकर कहा, ‘पुत्रो तुम्हारा दादा बहुत भूखा है। अपने बगीचे से कुछ फल तोड़कर लादो।’ सब बंदर दादाजी को खुश करने के लिए छोटी छोटी डलिया लेकर भागे। जैसे ही बंदर गये युवक डलिया में से निकला और छांह में रखे ड्रम को उठाकर भागा। अभी वह पहाड़ी अधिक दूर नहीं गया था कि उसे अपने पीछे बंदरों के भागने की आवाज सुनाई दी। वे चीख रहे थे। काला चोर काला चोर धोखेबाज हमारा दादा बनकर हमें धोखा देकर हमारा ड्रम चुकाकर भाग रहा है। पकड़ो पकड़ो भाग न पाये।
लड़के ने सुई अपने पीछे फेंकी वहाँ एक सुइयों का पहाड़ खड़ा हो गया। छोटे छोटे बंदर जगह जगह से घायल हो गये लेकिन वे भागत रहे। जब वे पास आने लगे तो उसने नींबू पीछे फेंक दिया। एक नींबू का पहाड़ खड़ा हो गया। बंदरों के घायल शरीर में नीबुओं का रस लग रहा था। तिलमिला रहे थे, कुछ मर गये कुछ पीछा करते रहे। अंत में लड़के ने तेल बोतल में से निकाल कर फेंका तुरंत ही एक चिकना फिसलने वाला पहाड़ खड़ा हो गया जरा भी बंदर चढ़ने की कोशिश करते तो फिसल कर गिर जाते इस प्रकार लड़का उन से बच कर वापस आ गया।
जब बुढ़िया ने देखा वह ड्रम भी ले आया है तो बोली, अभी तो सूर्यास्त होने में देर है। बगीचे में जाकर बबूल की लकड़ियाँ काट लाओ उनसे मसहरी बनानी है।
लड़का जाने लगा था लेकिन जाते जाते सोच रहा था कि अवश्य वहाँ कोई धोखा है उसने हिम्मत बांध कर चुड़ैल की बेटी से पूछा, वहाँ भी कुछ बात है।
माली एक भयानक बालों वाला मनुष्य है, लकड़ी बोली उसे आदमियों की उंगली और बाल खाना बहुत पसंद है। उसने नारियल की जटाओं से बना कोट उसके कंधे पर डाल दिया। दसों उंगलियों में लकड़ी के खोल पहना दिये। एक तेज धारदार हंसिया देते हुए कहा, जल्दी से जाओ अब तुम्हारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।
लड़के ने बगीचे में जाकर बबूल का पेड़ ढूढ़ा और डालियाँ काट ही रहा था कि एक बालों वाला विशाल काय आदमी ने कंधे पर पड़े कोट केा खंीचा और दूसरे हाथ से उंगलियों के लकड़ी के खोल खींचे। उसके ख्याल से कोट लड़के की खाल और खाल उसकी उंगलियों थी वह उन्हें चबाने में लग गया, लड़का लकड़ियाँ उठाकर भाग लिय।
बुढ़िया ने कहा, मैने आटे की सेवंइयाँ बनाकर रसोई में रखी हैं तुमने कुछ खाया नहीं है जाकर खालो।
लकड़हारे के पुत्र को बहुत तेज भूख लगी थी। उसने रसोई में जाकर बर्तन का ढक्कन उठाया बढ़िया खुशबू आ रही थी। उसने सेवइयाँ खानी प्रारम्भ कर दी, लेकिन खाते ही उसके पेट में भयंकर दर्द होने लगा। तभी द्वार खुला एक नौकरानी लैम्प लिये बाहर आई और बोली, मेरी मालकिन ने बुलाया है। लड़का पुत्री के पास पहुंचा। पुत्री ने लड़के को छत की कड़ी से लटकवाया और लकड़ी से पीठ पर पिटाई की कुछ ही देर में लड़के के मुँह से लंबे लंबे सांप निकल कर गिरने प्रारम्भ हो गये। सांपों के निकलने के बाद लड़की ने युवक को सीधा करवाया और बोली, मेरी माँ ने तुम्हें सांप सिवइयों के रूप में खिलाये। अब तुम जाकर जल्दी से शादी की बात करो।
दूसरे दिन शाम को उनकी शादी हुई। राजा का ड्रम बजा कमरे में सुलेमानी पत्थर का पलंग सजा था उसपर मच्छरदानी लगी हुई थी। लेकिन जैसे ही वे पलंग पर आये एक नदी दोनों के बीच बहने लगी। लड़की ने मेज के नीचे रख्ेा घड़े केा निकाला उसमें एक लकड़ी का टुकड़ा तैर रहा था। उसे फेकते ही नदी गायब हो गई। लड़की युवक से बोली, हमें यहाँ से तुरंत निकलना चाहिये नहीं तो माँ हमें कुछ कुछ नुकसान पहुँचाने की कोशिश करेगी। उसने एक फटा छाता और एक मुर्गा लड़के को दिये। और आधी रात को वे भाग चले।
चंद्रमा की रोशनी पहाड़ों पर गिर रही थी तभी एक एक तेज सीटी की आवाज सुनाई दी। ओह माँ ने चाकू हमें मारने के लिये भेजा है। खून मिलते ही यह गिर जायेगा जल्दी से मुर्गा फेक दो चाकू इसे काट कर गिर जायेगा। मुर्गे के लगते ही चाकू गायब हो गया।
कुछ देर से सीटी की आवाज फिर सुनाई दी। ओह मुर्गे का खून सीठा होता है और मानव का मीठा माँ ने पहचान कर दूसरा चाकू भेजा है।
‘मैं मर जाऊँगी लेकिन तुम भाग जाओ,’’
लड़के ने कहा, नहीं मुझे मरने दो मेरे मरने के बाद मेरा शरीर मेरे घर भिजवा देना।
‘नहीं, ’लड़की बोली,‘ मुझे मरने दो मौत के बाद में फिर जीवित हो जाऊँगी मेरा शरीर घर ले जाना सात दिन बाद में फिर से जीवित हो जाऊँगी।’ अभी वह कह ही पाई थी कि सनसनाता चाकू लड़की के हृदय में धंस गया। और लड़की जमीन पर गिर पड़ी। रोता हुआ लकड़हारे का पुत्र उसे घर ले गया।
सुबह होने तक वह घर पहुँचा और पिता को सब बताया। अपने दोनों पुत्रों के मर जाने की खबर से वृद्ध लकड़हारा रोने लगा। लड़के ने लड़की का शरीर एक ताबूत में रख दिया और प्रतिदिन उसे देखता रहता।
छटवें दिन ताबूत में से कराहने की आवाज आई लड़के ने सोचा अगर ताबूत नहीं खोलेगा तो लड़की का दम घुट जायंगा उसकी पत्नी जीवित हो गई है। उसने ताबूत खोंल दिया।
लड़की का चेहरा बिलकुल सफेद था। चाकू अभी जरा सा उसके हृदय में गढ़ा था लड़की ने आंख खोली और बोली, यह तुमने क्या किया, एक दिन पहले क्यों खोल दिया शायद भाग्य भी नहीं चाहता कि हम मिले। अब मैं नहीं बचूंगी। मेरे मरने के बाद तुम सात बार छू करके चाकू को लाल कपड़े से ढक देना यह मेरी माँ के पास चला जायेगा उसे मालुम पड़ जायेगा कि मैं मर गई।’
यह कहकर उसकी गर्दन एक ओर लुढ़क गई। पहले तो लड़का जार जार रोने लगा फिर उसने लाल कपड़ा डाल कर जैसे ही चाकू को सात बार छू किया कि चुडै़ल वहाँ आ पहुँची।
अपनी बेटी को देख कर वह फूट फूट कर रो पड़ी। उसने लडकी के हृदय से चाकू लगाया और गर्दन झुका कर बैठ गई चाकू उड़ा और चुडै़ल के गर्दन पर गिरा। उसकी गर्दन कट गई। और लड़की ने आंखे खोल दी। उसी ताबूत में चुड़ैल के शव को रखकर उन्होंने श्मशान में गाड़ दिया। चुड़ैल के मरते ही लड़की में से भी जादुई ताकत खत्म हो गई और सामान्य बन कर रहने लगी।
No comments:
Post a Comment